गद्दारी से पुराना नाता है, छुरा घोंपना आता है, कांग्रेस की बैठक के पहले सिंधिया के महल पर लगे पोस्टर

ग्वालियर स्थित जयविलास पैलेस के बाहर एक पोस्टर लगाया गया है, जिसमें कमलनाथ को छुरा घोंप रहे हैं सिंधिया और सिंधिया पर तीर चला रहे हैं दिग्विजय सिंह

Updated: May 07, 2022, 12:10 PM IST

गद्दारी से पुराना नाता है, छुरा घोंपना आता है, कांग्रेस की बैठक के पहले सिंधिया के महल पर लगे पोस्टर

ग्वालियर। मिशन 2023 में जुटी कांग्रेस शनिवार को ग्वालियर में एक बड़ी बैठक कर रही है। इस बैठक में पीसीसी चीफ कमलनाथ, राज्यसभा सांसद दिग्विजय सिंह, नेता प्रतिपक्ष डॉ गोविंद सिंह समेत कांग्रेस के कई दिग्गज शामिल होंगे। बैठक से पहले ही कांग्रेस ने सिंधिया के गढ़ में उन्हें घेरना शुरू कर दिया है। सिंधिया के महल जयविलास पैलेस पर कांग्रेस ने एक अजीबोगरीब पोस्टर लगाया हैं जो पूरे प्रदेश में सुर्खियां बटोर रहा है।

इस पोस्टर में सिंधिया कमलनाथ के पीठ में छुरा घोंपते नजर आ रहे। हालांकि, इसमें सिंधिया का चेहरा और गले में डले BJP के गमछे को ब्लर किया गया है। इस पोस्टर में पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह, नेता प्रतिपक्ष गोविंद सिंह और विधायक सज्जन सिंह वर्मा की भी तस्वीर है। पोस्टर में दिग्विजय सिंह राम की मुद्रा में सिंधिया पर तीर चलाते दिख रहे हैं। दूसरी ओर नेता प्रतिपक्ष गोविंद सिंह लक्ष्मण की मुद्रा में धनुष पर तीर चढ़ाते नजर आ रहे हैं। 

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पोस्टर में सबसे ऊपर पूर्व मंत्री सज्जन सिंह वर्मा हनुमान की मुद्रा में संजीवनी पर्वत लेकर आते दिख रहे हैं। इसमें सिंधिया की तरफ लिखा है कि गद्दारी से नाता है, छुरा घोंपना आता है। वहीं कांग्रेस की तरफ लिखा है वफादारी से नाता है तीर चलाना आता है। यह बैनर जय विलास पैलेस के ठीक बाहर लगाया गया है। बताया जा रहा है कि कांग्रेस पार्टी के प्रदेश प्रवक्ता सिद्धार्थ सिंह राजावत ने यह पोस्टर लगवाए हैं।

बैनर के माध्यम से यह जताने की कोशिश की गई है कि केंद्रीय मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया ने कांग्रेस से गद्दारी की है। इतना ही नहीं, यह भी बताया गया है कि सिंधिया परिवार का गद्दारी से पुराना नाता है। सिंधिया के ये पोस्टर ऐसे समय में लगाए गए हैं जब कांग्रेस ने ग्वालियर चंबल अंचल में पूरी ताकत झोंक दी है। शनिवार को यहां कांग्रेस की एक बेहद महत्वपूर्ण बैठक भी है। बैठक से पूर्व इस पोस्टर ने सियासी पारा गर्म कर दिया है।

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बता दें कि 2019 लोकसभा चुनाव में मिली करारी हार के बाद ज्योतिरादित्य सिंधिया ने 2020 की शुरुआत में ही पाला बदल लिया था और बीजेपी में शामिल हो गए थे। उनके साथ कांग्रेस के करीब दो दर्जन विधायकों ने भी पार्टी छोड़ दी थी, जिसके चलते कमलनाथ के नेतृत्व वाली सरकार गिर गई थी। इसके बाद से कांग्रेस लगातार सिंधिया पर हमलावर रही है। सिंधिया पर कांग्रेस पैसे लेकर ईमान बेचने का आरोप लगाती है।