पराली जलाने के मामले में MP नंबर वन, पिछले पांच साल में सामने आए 1 लाख से ज्यादा मामले

मध्य प्रदेश पराली जलाने के मामले में देश में नंबर 1 पर है। कृषि मंत्री के क्षेत्र विदिशा में सर्वाधिक मामले हैं। मूंग बोने की जल्दबाजी में किसान नियम तोड़ रहे हैं।

Updated: Apr 24, 2026, 02:28 PM IST

मध्य प्रदेश में गेहूं की पराली जलाने के मामले तेजी से बढ़ रहे हैं। राज्य इस मामले में देश में पहले स्थान पर पहुंच गया है। कंसोर्टियम फॉर रिसर्च ऑन एग्रोइकोसिस्टम मॉनिटरिंग एंड मॉडलिंग फ्रॉम स्पेस और ICAR के आंकड़ों के अनुसार, 1 से 21 अप्रैल 2026 के बीच देश के पांच राज्यों में पराली जलाने की कुल 29,167 घटनाएं दर्ज की गई हैं। इनमें से अकेले मध्य प्रदेश में 20,164 मामले सामने आए हैं। जो कुल मामलों का करीब 69 फीसदी है। पिछले पांच सालों की बात करें तो राज्य में ऐसे कुल 1,13,062 मामले सामने आ चुके हैं।

हालांकि, इस साल का आंकड़ा अभी पिछले साल के कुल मामलों से थोड़ा कम है। साल 2025 में मध्य प्रदेश में पराली जलाने की 20,422 घटनाएं दर्ज की गई थी। लेकिन विशेषज्ञों का मानना है कि मौजूदा रफ्तार को देखते हुए इस बार सभी पुराने रिकॉर्ड टूट सकते हैं। जिलों की बात करें तो केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान का संसदीय क्षेत्र विदिशा पराली जलाने के मामलों में सबसे आगे है। यहां 1 से 21 अप्रैल के बीच 2,086 घटनाएं रिकॉर्ड की गई हैं। इसके बाद उज्जैन में 2,053, रायसेन में 1,982, होशंगाबाद में 1,705 और सिवनी में 1,369 मामले सामने आए हैं।

यह भी पढ़ें:राजस्थान की गर्म हवाओं से तप रहा MP, 11 जिलों में लू का अलर्ट, 27 अप्रैल से बारिश की संभावना

मध्य प्रदेश के बाद पराली जलाने के मामलों में उत्तर प्रदेश दूसरे स्थान पर है। वहां इसी अवधि में 8,889 घटनाएं दर्ज की गई हैं। हालांकि, यह संख्या मध्य प्रदेश की तुलना में काफी कम है। वहीं, हरियाणा में 65 और पंजाब में सबसे कम 44 मामले दर्ज किए गए हैं। मध्य प्रदेश के गंजबासौदा स्थित कृषि महाविद्यालय के प्रोफेसर आशीष श्रीवास्तव के मुताबिक, गेहूं की कटाई के तुरंत बाद किसान ग्रीष्मकालीन मूंग की बुवाई की तैयारी में जुट जाते हैं। कम समय होने के कारण कई किसान फसल अवशेष हटाने के लिए पराली जलाने का आसान तरीका अपना लेते हैं।

विशेषज्ञों का कहना है कि किसान पराली जलाने की बजाय सुपरसीडर, रोटावेटर, सुपर स्ट्रॉ, मल्चर और रीपर जैसे कृषि उपकरणों का उपयोग कर सकते हैं। इसके अलावा गेहूं के भूसे को पशुओं के चारे के रूप में इस्तेमाल किया जा सकता है। पूसा डीकंपोजर के घोल का छिड़काव भी एक विकल्प है जिससे पराली प्राकृतिक खाद में बदल जाती है और मिट्टी की उर्वरता बढ़ती है। गौरतलब है कि केवल मध्य प्रदेश ही नहीं बल्कि पूरे देश में फसल अवशेष जलाना प्रतिबंधित है। ऐसा करते पाए जाने पर किसानों पर 2,500 रुपए से लेकर 15,000 रुपए तक का जुर्माना लगाया जा सकता है। बार-बार नियम तोड़ने पर प्रशासन सख्त कार्रवाई कर सकता है और सजा का भी प्रावधान है।

यह भी पढ़ें:जांजगीर चांपा में देर रात कांग्रेस नेता के घर गोलीबारी, बड़े बेटे की मौत और छोटे की हालत गंभीर