MP Youth Congress Election: यूथ कांग्रेस चुनाव में अंतिम दौर का मतदान खत्म, 2 घंटे देर तक चली वोटिंग

त्रिकोणीय रहा यूथ कांग्रेस का चुनावी मुकाबला, विवेक त्रिपाठी, विक्रांत भूरिया और संजय यादव रेस में आगे, मतदान के दौरान सर्वर डाउन होने के कारण बढ़ी बेचैनी

Updated: Dec 13, 2020, 01:13 AM IST

MP Youth Congress Election: यूथ कांग्रेस चुनाव में अंतिम दौर का मतदान खत्म, 2 घंटे देर तक चली वोटिंग
Photo Courtesy : Patrika

भोपाल। मध्य प्रदेश कांग्रेस की युवा इकाई को जल्द ही नया अध्यक्ष मिलने जा रहा है। युवा कांग्रेस का नया अध्यक्ष चुनने के लिए तीसरे और आखिरी दौर का मतदान शनिवार को संपन्न हो गया। मतदान प्रक्रिया के तीसरे और आखिरी दिन भी वोटर्स ने बढ़चढ़ कर हिस्सा लिया। इंडियन यूथ कांग्रेस की वेबसाइट पर जारी अपडेट के मुताबिक इस चुनाव में 1 लाख 11 हजार से ज्यादा सदस्यों ने मतदान किया है।

राज्य के उपचुनाव में कांग्रेस की हार के बाद ये पार्टी में संगठन के स्तर पर पहला बड़ा चुनाव है। गुरुवार को वोटिंग के पहले दिन भोपाल, ग्वालियर समेत 18 जिलों में वोटिंग हुई थी। जबकि शुक्रवार को इंदौर, छिंदवाड़ा सहित 18 जिलों में चुनाव हुए। चुनाव के आखिरी दिन यानी आज उज्जैन और जबलपुर समेत 16 जिलों में वोटिंग हुई। बताया जा रहा है कि नतीजों का एलान 15 दिसंबर तक कर दिया जाएगा।

सर्वर डाउन होने की वजह से उम्मीदवारों में बढ़ी बेचैनी

चुनाव प्रक्रिया के तीसरे दिन वोटिंग ऐप का सर्वर डाउन हो गया। इस वजह से तकरीबन दो घंटे तक मतदान प्रभावित हुआ। इस दौरान मतदाताओं को ओटीपी नहीं मिलने की शिकायतें कई जगहों से आईं। हालांकि सर्वर में आई दिक्कतों की वजह से चुनाव प्रभारी मकसूद मिर्जा ने वोटिंग का समय दो घंटे बढ़ाकर शाम के 6 बजे तक कर दिया। सर्वर में आई तकनीकी खामियों की वजह से उम्मीदवारों की बेचैनी बढ़ गई।

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इस दौरान सभी खेमों में हलचलें तेज दिखी वहीं कयासों के बाजार भी गर्म थे। उम्मीदवारों को इस बात का भी डर सता रहा था कि कहीं कोई हैकिंग न हो जाए। आनन-फानन में मतदाताओं के लिए हेल्पलाइन नंबर्स भी जारी किए गए। लेकिन ऐसी शिकायतें मिलीं कि किसी भी नंबर पर कॉल नहीं लग पा रहा था। हालांकि चुनाव प्रभारी ने स्पष्ट किया कि थोड़ी देर के लिए ही तकनीकी खामी आई थी, जिसे अब दुरुस्त कर लिया गया है। 

बता दें कि बीते दिनों राजस्थान में यूथ कांग्रेस का चुनाव ऑनलाइन माध्यम से किया गया था। तब ऐसे आरोप लगने की वजह से विवाद खड़ा हो गया था कि हैकर्स की मदद से चुनाव में हेरफेर किया गया है। विवाद बढ़ता देख शीर्ष नेतृत्व ने निर्वाचित अध्यक्ष को हटा दिया था। ऐसे में मध्य प्रदेश के उम्मीदवार भी आशंकित हो रहे थे।

त्रिकोणीय मुकाबले में त्रिपाठी मार सकते हैं बाजी

अध्यक्ष पद के लिए यह चुनाव अब दिलचस्प मोड़ पर आ गया है। बंपर वोटिंग की वजह से यह बता पाना मुश्किल है कि रेस में सबसे आगे कौन है। चुनाव पर नजर रखने वालों कि मानें तो यह मुकाबला साफ तौर पर त्रिकोणीय हो गया है। माना जा रहा है कि विवेक त्रिपाठी, विक्रांत भूरिया या संजय यादव के बीच नंबर एक की लड़ाई है।

विवेक त्रिपाठी

गैर राजनीतिक पृष्टभूमि से आने वाले विवेक त्रिपाठी ने बेहद कम समय में प्रदेश कांग्रेस की युवा इकाई में अपनी पकड़ बनाई है। माना जा रहा है कि त्रिपाठी कांग्रेस के दिग्गजों के आंतरिक समर्थन के बिना ही टक्कर में आगे चल रहे हैं। त्रिपाठी के जीतने की संभावनाएं इसलिए भी ज्यादा हो गई हैं, क्योंकि चुनाव शुरू होने से ठीक एक दिन पहले आगर-मालवा से नवनिर्वाचित विधायक व NSUI के प्रदेश अध्यक्ष विपिन वानखेड़े ने अपना नाम वापस लेकर उन्हें समर्थन देने का एलान कर दिया था।

खास बात यह है कि इस बार के नए वोटर्स में सबसे ज्यादा सदस्यता NSUI ने करवाई है। ऐसे में छात्र संगठन से युवा इकाई में आए लोगों का स्पष्ट रूप से समर्थन NSUI के पदाधिकारियों के साथ रहेगा। विवेक अब तक मध्य प्रदेश में NSUI प्रवक्ता की जिम्मेदारी संभाल रहे हैं। माना जाता है कि वह संगठन के कामकाज के बारे में अच्छी समझ रखते हैं। तकरीबन एक दशक से छात्रों के बीच रहकर काम कर रहे विवेक त्रिपाठी कांग्रेस से जुड़े युवा वर्ग के बीच काफी लोकप्रिय हैं, साथ ही छात्रों के लिए संघर्ष में उन्होंने बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया है।

विक्रांत भूरिया

अध्यक्ष पद की लड़ाई में विक्रांत भूरिया भी जबरदस्त टक्कर दे रहे हैं। माना जा रहा है कि प्रदेश कांग्रेस के वरिष्ठ नेतृत्व का भूरिया को अप्रत्यक्ष समर्थन हासिल है। हालांकि, अब तक किसी ने खुले तौर पर भूरिया का पक्ष नहीं लिया है।

विक्रांत भूरिया दिग्गज कांग्रेस नेता व पूर्व केंद्रीय मंत्री कांतिलाल भूरिया के बेटे हैं। वह अपने विधानसभा क्षेत्र में लंबे समय से सक्रिय हैं और साल 2018 में झाबुआ से कांग्रेस ने उन्हें विधानसभा उम्मीदवार भी बनाया था। लेकिन वह जीतने में सफल नहीं हो सके थे। हालांकि संगठन के स्तर पर काम करने का अनुभव उनके पास ज्यादा नहीं है, लेकिन शैक्षणिक दृष्टिकोण से देखा जाए तो वह अन्य उम्मीदवारों पर भारी हैं।

संजय यादव

इस त्रिकोणीय मुकाबले में संजय यादव के भी जीतने की संभावनाएं हैं। खास बात यह है कि यूथ कांग्रेस की पूर्व कार्यकारिणी का समर्थन यादव के पक्ष में है। बताया जा रहा है कि युवा नेता व प्रदेश कांग्रेस के कार्यकारी अध्यक्ष जीतू पटवारी और मौजूदा यूथ कांग्रेस अध्यक्ष कुणाल चौधरी के समर्थकों ने संजय यादव के पक्ष में मतदान किया है। 

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बता दें कि यूथ कांग्रेस के मौजूदा सदस्यों के एक बड़े वर्ग की सदस्यता पटवारी और चौधरी ने खड़ी की है।  ऐसे में अध्यक्ष पद के लिए उनका समर्थन अहम हो जाता है। संजय यादव पूर्व मंत्री लाखन सिंह के भतीजे हैं और फिलहाल राष्ट्रीय युवक कांग्रेस संगठन में सचिव की भूमिका निभा रहे हैं। अध्यक्ष पद के लिए उनके अलावा अजीत बैरासी, सिद्धार्थ कुशवाह, जावेद खान, मोना कौरव, वंदना बेन और पिंकी मुदगल भी चुनाव मैदान में हैं।

मध्य प्रदेश में यूथ कांग्रेस के 3 लाख से ज्यादा सदस्य हैं, जिनमें एक तिहाई से ज्यादा सदस्यों ने ऑनलाइन वोटिंग प्रक्रिया में हिस्सा लिया है। पिछले दो साल से यह चुनाव टाला जा रहा है, नतीजतन विधायक कुणाल चौधरी ही पांच वर्षों से इस पद पर बने हुए थे, जबकि कार्यकाल तीन वर्षों का ही होता है।