दीपक मरावी की मौत: एक दिन, दो कमेटी और उसी दिन क्लीन चिट, आखिर इतनी भी क्या जल्दी

Covaxin Trial Volunteer Death: भोपाल के मज़दूर दीपक मरावी की मौत की जाँच के लिए एक ही दिन में दो समितियां बनीं और उसी दिन जाँच पूरी करके Covaxin के ट्रायल को क्लीन चिट भी दे दी गई

Updated: Jan 10, 2021, 03:56 PM IST

दीपक मरावी की मौत: एक दिन, दो कमेटी और उसी दिन क्लीन चिट, आखिर इतनी भी क्या जल्दी

भोपाल। भारत बायोटेक की कोरोना वैक्सीन (Covaxin) के ट्रायल के दौरान टीका लगाए जाने के 9 दिनों के भीतर हुई मज़दूर दीपक मरावी की मौत के मामले में अब एक नया मोड़ सामने आया है। कल यानी शनिवार 9 जनवरी को इस मामले की जांच के लिए गांधी मेडिकल कॉलेज ने एक नहीं बल्कि दो-दो बार समिति बनाई। इतना ही नहीं, इस समिति कल ही जांच पूरी करके ट्रायल को क्लीन चिट देने वाली अपनी रिपोर्ट सौंप भी दी। 

सबसे हैरानी की बात तो यह है कि दीपक मरावी की मौत के मामले में गठित समिति ने चंद ही घंटों में जांच करके यह पता भी लगा लिया कि दीपक मरावी ने Covaxin के जिस ट्रायल में हिस्सा लिया था, उसमें सभी आवश्यक गाइडलाइन्स का पालन किया गया है। हैरान करने वाली बात यह भी है कि शनिवार को ही इस वैक्सीन ट्रायल की जांच करने के लिए पहले एक और जांच समिति बनाई गई थी। लेकिन चंद घंटों में समिति में संशोधन कर दूसरी समिति बना दी गई।जिसने उसी दिन यानी शनिवार को ही वैक्सीन के ट्रायल की जांच करके यह प्रमाणित भी कर दिया कि परीक्षण में सभी दिशानिर्देशों का पूरी तरह पालन किया गया है। दरअसल, संशोधित समिति के गठन के लिए शनिवार को जारी आदेश में भी साफ साफ लिखा गया है कि जांच रिपोर्ट आज यानि शनिवार को ही पेश कर दी जाए। यानी समिति ने वैसा ही किया जैसा उसे कहा गया था।

गांधी मेडिकल कॉलेज की तरफ से संशोधित जांच समिति का गठन करने के लिए जारी आदेश में कहा गया है कि यह कदम दीपक मरावी की मौत के मामले में मीडिया रिपोर्ट्स सामने आने पर उठाया जा रहा है। इस आदेश से ही साफ है कि जांच के लिए पहले एक और समिति गठित की गई थी। जिसमें आंशिक संशोधन करके संशोधित जांच समिति बनाई जा रही है। इस जांच समिति को यह पता करने की जिम्मेदारी सौंपी गई थी कि आखिर दीपक मरावी के ऊपर किए गए कोवैक्सीन के ट्रायल में सभी दिशानिर्देशों का ठीक ढंग से पालन किया गया है या नहीं? इस जांच समिति का अध्यक्ष कॉलेज के फार्माकोलॉजी विभाग के प्रमुख डॉ. अरुण कुमार श्रीवास्तव को बनाया गया था। 

हमसमवेत ने इस पूरे मामले में डॉ. अरुण कुमार श्रीवास्तव से बात की तो उन्होंने भी इस बात की पुष्टि की कि शनिवार को पहले जो समिति बनाई गई थी, उसमें थोड़ी देर बाद ही बदलाव करके संशोधित कमिटी का गठन किया गया। डॉ. अरुण कुमार श्रीवास्तव ने बताया कि पहले गठित की गई कमिटी के कुछ लोग छुट्टी पर थे, इसलिए संशोधित समिति का गठन करना पड़ा। जब हमने डॉ. अरुण कुमार श्रीवास्तव से यह पूछा कि उनकी अध्यक्षता में बनी जांच समिति इतनी जल्दी इस नतीजे पर कैसे पहुंच गई कि मृतक दीपक मरावी पर हुए वैक्सीन के ट्रायल में सभी आवश्यक गाइडलाइन्स का पालन किया गया था?  इस पर उन्होंने कहा कि यह जानकारी कॉन्फिडेंशियल यानी गोपनीय है, जिसे वो उजागर नहीं कर सकते। उन्होंने हमसे कहा कि अगर आपको इस बारे में और जानकारी चाहिए तो डीन से बात करनी होगी। इसके बाद हमने गांधी मेडिकल कॉलेज की डीन अरुणा कुमार से बात करने का प्रयास किया, लेकिन उनसे सम्पर्क नहीं हो पाया। 

बहरहाल, इस बेहद गंभीर मामले की जांच में अचानक इतनी जल्दबाज़ी दिखाया जाना वाकई हैरान करने वाला है। खासकर इसलिए क्योंकि दीपक की मौत तो 21 दिसंबर को ही हो गई थी। ऐसे में सवाल ये है कि जिस वैक्सीन ट्रायल में हिस्सा लेने के दौरान उसकी मौत हुई, उसमें सभी गाइडलाइन्स का ठीक से पालन हुआ या नहीं, ये जांच इतने दिनों तक क्यों नहीं की गई? सवाल यह भी है कि क्या यह जांच सिर्फ इसीलिए की गई क्योंकि दीपक की मौत का मामला अब जाकर मीडिया की सुर्खियों में आ गया था? अगर मीडिया इस मामले को सामने नहीं लाता, तो क्या ट्रायल में शामिल एक शख्स की मौत के बाद ट्रायल प्रक्रिया की जांच तक नहीं की जाती? और इतने दिनों बाद जब जांच समिति बनाई भी गई तो ट्रायल को क्लीन चिट देने में इतनी हड़बड़ी क्यों की गई? 

इस पूरे विवाद के बीच एक चौंकाने वाली खबर यह भी आई कि वैक्सीन का ट्रायल जिस पीपल्स मेडिकल कॉलेज के जरिए किया जा रहा था, उसके डीन डॉ. अरुण कुमार दीक्षित ने अचानक तत्काल प्रभाव से इस्तीफा दे दिया है। डॉ दीक्षित ने अपने कथित इस्तीफे में व्यक्तिगत कारणों से पद पर बने रहने में असर्थता जाहिर करते हुए त्यागपत्र दिया है। लेकिन कुछ ही देर बाद स्थानीय मीडिया में यह खबरें आई कि डीन का फर्जी इस्तीफा वायरल जो रहा है। उन्होंने इस्तीफा नहीं दिया है।

 

  

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क्या है पूरा मामला 

दीपक मरावी भोपाल के टीला जमालपुरा इलाके में रहने वाले दिहाड़ी मज़दूर थे। वे भोपाल गैस कांड पीड़ित क्षेत्र में रहते थे। भारत बायोटेक द्वारा निर्मित Covaxin के ट्रायल के दौरान उन पर भी परीक्षण किया गया था। दीपक मरावी को भोपाल के पीपल्स मेडिकल कॉलेज में 12 दिसंबर को कोवैक्सीन का टीका लगाया गया था। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक टीका लगाने के एक हफ्ते बाद दीपक मरावी की सेहत खराब होने लगी। उन्हें उल्टियां होने लगीं, खाना-पीना, चलना-फिरना सब दूभर हो गया। इन्हीं हालात में 21 दिसंबर को दीपक मरावी की मौत हो गई। 

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दीपक मरावी की पत्नी वैजयंती का कहना है कि उनके पति की जान वैक्सीन ने ही ली है। लेकिन covaxin निर्माता कंपनी भारत बायोटेक ने दावा किया है कि दीपक मरावी की मौत उनकी वैक्सीन के कारण नहीं हुई है। कंपनी का कहना है कि दीपक पर उनकी वैक्सीन का ट्रायल करने से पहले सभी मानकों का खयाल रखा गया था। भारत बायोटेक ने पोस्टमार्टम रिपोर्ट के हवाले से दावा किया है कि दीपक मरावी की मौत ज़हर और हार्टअटैक के कारण हुई है।

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बहरहाल, इस पूरे मामले में आगे चलकर जो भी हकीकत सामने आए, लेकिन तमाम आरोपों, दावों और स्पष्टीकरण के बीच सबसे दर्दनाक सच यही है कि एक दिहाड़ी मज़दूर की मौत हो गई है। जिनके तीन बच्चे और पत्नी बेसहारा हो गए हैं। दीपक के एक बच्चे के दिल में छेद है, जिसका इलाज अपने खर्च पर कराने की ज़िम्मेदारी मध्य प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री और कांग्रेस के राज्यसभा सांसद दिग्विजय सिंह ने ली है।