पंचायत प्रतिनिधियों ने शिवराज सरकार के खिलाफ खोला मोर्चा, 7 सूत्री मांगों को लेकर भोपाल में प्रदर्शन

मानदेय और भत्ता बढ़ाने, विकास निधि को 25 लाख तक बढ़ाने व अन्य मांगों को लेकर भोपाल में जुटे प्रदेशभर के जनपद सदस्य, प्रदेश के सभी जनपद कार्यालयों में ताला लगाने की दी चेतावनी

Updated: Jan 10, 2023, 07:02 PM IST

पंचायत प्रतिनिधियों ने शिवराज सरकार के खिलाफ खोला मोर्चा, 7 सूत्री मांगों को लेकर भोपाल में प्रदर्शन

भोपाल। चुनावी मध्य प्रदेश की शिवराज सरकार एक साथ कई मोर्चों पर विरोध झेल रही है। संविदा स्वास्थ्य कर्मियों, चयनित शिक्षकों और करणी सैनिकों के बाद अब निर्वाचित पंचायत प्रतिनिधियों ने भी राज्य सरकार के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। मंगलवार को राजधानी भोपाल में सैंकड़ों जनपद सदस्यों ने 7 सूत्री मांगों को लेकर धरना प्रदर्शन किया।

मंगलवार सुबह मध्य प्रदेश जनपद एकता संगठन के बैनर तले प्रदेशभर के जनपद सदस्य राजधानी भोपाल स्थित आंबेडकर पार्क पहुंचे। यहां उन्होंने शिवराज सरकार के खिलाफ जमकर नारेबाजी की। उन्होंने सरकार के समक्ष सात सूत्री मांगों को रखते हुए कहा कि यदि हमारी मांगों को पूरा नहीं किया गया तो हम प्रदेशभर के सभी जनपद कार्यालयों में ताला बंद कर देंगे। 

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बदनावर से इस रैली में शामिल होने आए जनपद सदस्य बलराम चौधरी ने कहा कि, 'गांधीजी ने "ग्राम स्वराज" का परिकल्पना भारत के प्रत्येक गांव को स्वतंत्र और आत्मनिर्भर बनाने के लिए किया था। उनका मानना था कि अगर गाँव नष्ट हो गये तो हिंदुस्तान भी नष्ट हो जायेगा, क्योंकि हिंदुस्तान की असली पहचान भारत का गाँव ही है। इसलिए गाँवों को आत्मनिर्भर बनाने के लिए गाँधी जी नें पंचायती राज व्यवस्था पर जोर दिया था। भारत के पूर्व प्रधानमंत्री राजीव गांधी ने गांधी जी के सपने को साकार करते हुए पंचायती राज व्यवस्था लागू किया।'

बलराम चौधरी ने आगे कहा कि, 'मध्य प्रदेश में दिग्विजय सिंह की सरकार ने पंचायत प्रतिनिधियों को अधिकार दिए। उन्होंने ग्राम पंचायतों को मजबूती दी। लेकिन प्रदेश में भाजपा की सरकार आते ही ग्राम पंचायतों के सारे अधिकार छीन लिए गए। यह सरकार गांधी के ग्राम स्वराज की परिकल्पना के खिलाफ है। यदि शिवराज सरकार हमारी मांगों को पूरा नहीं करती है तो हम सभी निर्वाचित प्रतिनिधि एकजुट होकर आगामी चुनाव में शिवराज सरकार को उखाड़ फेंकेंगे।

क्या है जनपद सदस्यों की मांग

1. जनपद सदस्य को बैठने के लिए हर ग्राम पंचायत मे कुर्सी और नेम प्लेट की व्यवस्था हो ।
2. जनपद सदस्य का मानदेय 1500 रुपए से बढाकर 15 हजार रुपए और भत्ता 10 हजार रुपए किया जाय।
3. विकाश निधि जो सालाना 4 लाख रूपये मिलती है उसे बढाकर 25 लाख किया जाए।
4. जनपद सदस्य को अपनी विकास निधि का उपयोग जनपद निर्माण एजेंसी द्वारा किया जाना सुनिश्चित हो।
5. 25 लाख से कम की कार्य योजना जनपद सदस्य के लेटर पैड पर स्वीकृति अनिवार्य हो ।
6. आवास योजना मे 10% सहभागिता जनपद सदस्य की हो।
7. जनपद सदस्य के मार्गदर्शन में प्रतिमाह जनसमस्या निवारण शिविर क्षेत्रिय कर्मचारियों की उपस्थिति मे संपन्न हो।