पंचायत चुनाव में राजनीतिक वंश बेल: ग्राम पंचायत प्रधान से जिला पंचायत सदस्य तक कई नेताओं के परिजन चुनावी मैदान में

पंचायत चुनावों में पूर्व मुख्यमंत्री उमा भारती, पूर्व राज्यपाल रामनरेश यादव, मंत्री विजय शाह सहित कई विधायकों, पूर्व विधायकों के परिजन चुनावी मैदान में ताल ठोक रहे।

Updated: Jun 07, 2022, 06:29 PM IST

पंचायत चुनाव में राजनीतिक वंश बेल: ग्राम पंचायत प्रधान से जिला पंचायत सदस्य तक कई नेताओं के परिजन चुनावी मैदान में
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भोपाल। मध्य प्रदेश में पंचायत चुनाव को लेकर ग्राम पंचायत प्रधान से लेकर जनपद पंचायत सदस्य, जिला पंचायत सदस्य के नामांकन की प्रक्रिया पूरी हो चुकी है। इन पंचायत चुनावों में प्रदेश की राजनीति के कई दिग्गज नेताओं के परिजन ग्राम प्रधान चुनाव से लेकर, जनपद पंचायत सदस्य, जिला पंचायत सदस्य चुनाव तक अपनी किस्मत आजमा रहे हैं। इन नामों को जानने पर लगता है कि पंचायत चुनाव में कई दिग्गज नेताओं की राजनीतिक वंश बेल खूब फलफूल रही है।

इनमें पहला नाम है पूर्व मुख्यमंत्री उमा भारती के विधायक भतीजे राहुल लोधी की पत्नी उमिता सिंह का। उमिता सिंह खरगापुर, टीकमगढ़ से भाजपा विधायक राहुल लोधी की पत्नी है और जिला पंचायत सदस्य चुनाव में अपनी किस्मत आजमा रही है। इसके बाद मध्य प्रदेश के पूर्व राज्यपाल रामनरेश यादव की पौत्रवधु रोशनी यादव निवाड़ी जिला पंचायत सदस्य का चुनाव लड़ रही है।

अगला नाम वन मंत्री विजय शाह के बेटे दिव्यादित्य शाह का है वे खंडवा जिला पंचायत के अनुसूचित जनजाति घोषित जिला पंचायत सदस्य वार्ड से चुनावी मैदान में है। टीकमगढ़ से भाजपा विधायक राकेश गिरी की दोनों बहनें कामिनी गिरी, रानी गिरी जनपद पंचायत सदस्य के चुनावी मैदान में है। निवाड़ी से भाजपा विधायक अनिल जैन की पत्नी निरंजना जैन जनपद पंचायत सदस्य चुनाव में दावेदार हैं। सतना से भाजपा पूर्व विधायक जुगल किशोर बागरी के बेटे पुष्पराज बागरी भी जिला पंचायत सदस्य चुनाव में उम्मीदवार है।

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महात्मा गांधी ने कहा था कि भारत गांव में निवास करता हैं। पूर्व प्रधानमंत्री राजीव गांधी ने संविधान संशोधन कर पंचायती राज कानून लेकर आए और देश में पंचायती राज की स्थापना की। राजीव गांधी का उद्देश्य रहा होगा कि ग्राम पंचायत के स्तर पर लोकतंत्र की जड़े स्थापित और मजबूत की जाए। ग्राम पंचायत में राजनीतिक नेतृत्व का विकास हो, जिससे देश में आम किसान, ग्रामीण नेता बनकर उभर सके और देश के नीति निर्माता बने।

भारतीय लोकतंत्र में प्रत्येक नागरिक को चुनाव लडने का अधिकार है और इस हिसाब से ऊपर लिखे नामों से कोई आपत्ति नहीं हैं लेकिन एक ही परिवार में विधायक, जनपद पंचायत सदस्य, जिला पंचायत सदस्य निर्वाचित होना कहीं न कहीं परिवारवादी राजनीति को दर्शाता है बाकि जनमत जिसके साथ, लोकतंत्र उसके हाथ।