पूर्व CAG विनोद राय ने कांग्रेस नेता संजय निरुपम से मांगी माफी, निरुपम ने कहा 2G आवंटन की फर्जी रिपोर्ट पर भी मांगे माफी

कोयला घोटाला और 2G स्पेक्ट्रम आवंटन में घोटाले की रिपोर्ट तैयार करनेवाले सीएजी विनोद राय इस माफीनामे के बाद से लोगों के निशाने पर आ गए हैं... निरूपम ने कहा है कि CAG विनोद राय ने घोटाले की झूठी कहानी गढ़ी थी..

Updated: Oct 28, 2021, 10:04 PM IST

पूर्व CAG विनोद राय ने कांग्रेस नेता संजय निरुपम से मांगी माफी, निरुपम ने कहा 2G आवंटन की फर्जी रिपोर्ट पर भी मांगे माफी
Photo Courtesy : NDTV

नई दिल्ली। पूर्व नियंत्रक एवं महालेखापरीक्षक (CAG) विनोद राय ने कांग्रेस नेता संजय निरुपम से माफी मांगी है। उन्होंने बेशर्त माफी मांगते हुए लिखा है कि मीडिया से बातचीत में तत्कालीन 2G घोटाले के आरोपों से मनमोहन सिंह का नाम हटवाने के लिए दबाव बनानेवाला बयान उन्होंने गलती से दे दिया था। उन्हें इस बात का पछतावा है कि इससे संजय निरूपम और उनके परिवार को कितनी पीड़ा पहुंची होगी। निरूपम ने उनकी माफी को ट्विटर पर सार्वजनिक करते हुए लिखा है कि विनोद राय को अब 2G और कोल ब्लॉक आवंटन पर यूपीए सरकार के खिलाफ फर्जी रिपोर्ट बनाने के लिए भी देश से माफी मांगनी चाहिए।

यह भी पढ़ें: शादी से पहले मस्जिद में नमाज़ पढ़ने जाते थे समीर, पहली पत्नी के पिता ने परिवार को बताया मुस्लिम

दरअसल, पूर्व CAG विनोद राय ने रिटायरमेंट के बाद एक किताब लिखी जिसमें उन्होंने UPA-2 सरकार के खिलाफ कई गंभीर आरोप लगाए थे।  विनोद राय ने अपनी किताब के प्रचार प्रसार के लिए अर्णब गोस्वामी व अन्य पत्रकारों को इंटरव्यू दिया था। इस दौरान उन्होंने आरोप लगाया था कि 2G स्पेक्ट्रम घोटाले से पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह का नाम हटाने के लिए कांग्रेस सांसद संजय निरुपम ने मुझपर दबाव बनाया था। इसे निरूपम ने तब झूठ बताते हुए पटियाला कोर्ट में मानहानि का मुकदमा दायर किया था। सात साल की लंबी लड़ाई के बाद अब जब बीजेपी दूसरी बार सत्ता में आ चुकी है, विनोद राय ने संजय निरुपम से बिना शर्त के माफी मांग ली है। 

विनोद राय ने अपने माफीनामे में लिखा है कि मैने गलती से संजय निरुपम का नाम लिया था। यह बात सही नहीं थी। वो मनगढ़ंत और झूठे आरोप थे। मैं समझ सकता हूं कि मेरे झूठे और मनगढ़ंत बयानों से संजय निरुपम, उनके परिजनों और चाहने वालों को पीड़ा हुई होगी। इसके लिए मैं माफी मांगता हूं। मेरे ये दावे कि निरूपम ने घोटाले की रिपोर्ट से मनमोहन सिंह का नाम हटवाया, कोरे झूठ थे।

मामले पर कांग्रेस नेता संजय निरुपम ने बयान जारी कर कहा है कि उन्होनें 2G स्पेक्ट्रम और कोल ब्लॉक को लेकर जो रिपोर्ट बनाई थी वह फर्जी थी। 2G रिपोर्ट के बारे में तो सात साल की सुनवाई के बाद जज महोदय ने खुद ही कहा कि सीबीआई ने कोई सबूत ही नहीं दिया। मतलब पूरी रिपोर्ट ही झूठी थी। इस पाप के लिए विनोद राय को मुझसे नहीं पूरे देश से माफी मांगनी चाहिए। 

राय का माफीनामा सामने आने के बाद सोशल मीडिया पर लोगों का गुस्सा देखने को मिल रहा है। कांग्रेस नेता पवन खेड़ा ने साफ कहा है कि विनोद राय एक फ्रॉड आदमी है। जिसने किताब बेचने के लिए झूठ बोला सोचिए उसने CAG रिपोर्ट्स में कितने झूठ लिखे होंगे। 

कांग्रेस के दिग्गज नेता दिग्विजय सिंह ने कहा है कि बीजेपी को फायदा पहुंचाने के लिए विनोद राय ने कांग्रेस सरकार को बदनाम किया और रिटायरमेंट के बाद बीजेपी ने उन्हें इसका इनाम दिया। 

पत्रकार नरेंद्र नाथ मिश्रा ने लिखा है कि पहले विनोद राय ने 2G मामले में 1 लाख 76 हजार करोड़ की फर्जी फिगर दे दी और अब कह रहे हैं सांसद पर यूं ही आरोप लगा दिया था.. फिर चुपके से माफी भी मांग ली। राय को अभी देश के सामने और माफी मांगनी है। 

फांसी की सजा होनी चाहिए: पप्पू यादव

जन अधिकार पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष पप्पू यादव ने कहा है कि विनोद राय को फांसी होनी चाहिए। पप्पू यादव ने ट्वीट किया, 'पूर्व CAG विनोद राय को माफी नहीं फांसी की सजा होनी चाहिए। 2G, कोयला घोटाला में 1-2 लाख करोड़ के फर्जी घोटाले का दुष्प्रचार कर न सिर्फ बेईमान मोदी सरकार देश पर थोप दिया, बल्कि, टेलीकॉम सेक्टर, बिजली सेक्टर को तबाह कर दिया।' 

बता दें कि विनोद राय भारत के 11वें नियन्त्रक एवं महालेखापरीक्षक थे, जो जनवरी 2008 से मई 2013 तक सीएजी रहे। देश के CAG के रूप में सरकारी महकमों के वित्तीय लेखा जोखा का रिपोर्ट बनाना उनका काम था। लेकिन उनका कार्यकाल सनसनीखेज रिपोर्ट्स के लिए जाना जाता है।  उन्होंने त्तकालीन प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह की सरकार को लाखों करोड़ों रुपए के घोटालों का आरोपी बना दिया। हालांकि उसके पांच साल बाद ही कोर्ट ने विनोद राय के घोटाले के आरोपों को खारिज करते हुए केस खत्म कर दिया। 

विनोद राय के आरोपों से सियासत को खूब खाद पानी मिला। कांग्रेस जहां चुनावों में बिखर गयी और उसे सबसे बुरी हार का सामना करना पड़ा वहीं,  बीजेपी ने सत्ता हासिल करने का दूसरा सबसे दमदार प्रयास सफल बना लिया। 2014 के चुनावों में बीजेपी ने इन्हीं रिपोर्ट्स को बेस बनाकर चुनाव लड़ा और इससे कमाए पैसों को काला धन बताया था। हालांकि, सात साल बाद भी न तो काला धन वापस आया और न ही स्पेक्ट्रम आवंटन में अनिमितता साबित हो पायी।