मॉकड्रिल के दौरान 22 मरीजों की मौत मामले में अस्पताल को क्लीनचीट, प्रियंका बोलीं- इंक्वायरी की भी मॉकड्रिल कर दी

आगरा के पारस अस्पताल के मालिक को एक वीडियो में कहते देखा गया था कि उन्होंने मरीजों की छंटनी के लिए 5 मिनट तक ऑक्सीजन सप्लाई बंद किया, जिससे 22 मरीज छंट गए

Updated: Jun 19, 2021, 05:23 PM IST

मॉकड्रिल के दौरान 22 मरीजों की मौत मामले में अस्पताल को क्लीनचीट, प्रियंका बोलीं- इंक्वायरी की भी मॉकड्रिल कर दी
Photo Courtesy : Patrika

आगरा। उत्तरप्रदेश की योगी सरकार ने 22 मौतों की मॉकड्रिल करने वाले आगरा के पारस अस्पताल को क्लीन चिट दे दी है। सरकारी जांच रिपोर्ट सामने आने के बाद अब जांच कमेटी पर गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं। आरोप है कि पारस अस्पताल के एकतरफा बयान को आधार बनाकर रिपोर्ट तैयार की गई है। इस मामले में कांग्रेस महासचिव प्रियंका गांधी ने राज्य सरकार को निशाने पर लेते हुए कहा है कि सरकार ने इंक्वायरी की भी मॉकड्रिल कर दी।

प्रियंका गांधी ने ट्वीट किया, 'विडंबना देखिए। खबरों के अनुसार आगरा में अस्पताल ने मरीजों की ऑक्सीजन बंद करके "मॉकड्रिल" की और भाजपा सरकार ने क्लीन चिट देकर इंक्वायरी की "मॉकड्रिल" कर दी। सरकार और अस्पताल: दोनों का रास्ता साफ। मरीजों के परिजनों की गुहार को अनसुना कर सरकार ने न्याय की उम्मीद को तोड़ दिया।' 

क्या है पूरा मामला? 

दरअसल, 7 जून को पारस अस्पताल के मालिक डॉ अरिंजय जैन का एक वीडियो वीडियो वायरल था, जिसमें वे खुद यह कबूल रहे हैं कि उन्होंने ऑक्सीजन बंद करके 5 मिनट में 22 लोगों की जान ले ली। वायरल वीडियो में आरिंजय का चेहरा तो नहीं दिख रहा, लेकिन उनकी आवाज़ सुनाई दे रही है। वीडियो में डॉक्टर कोरोना काल का अपना अनुभव साझा कर रहे हैं। वह बताते हैं कि ऑक्सीजन की कमी की वजह से मरीजों को छांटने के लिए उन्होंने मॉक ड्रिल की थी। तब अस्पताल में 96 कोरोना मरीज भर्ती थे, इनमें से 74 बचे और 22 छंट गए। यह घटना 26 अप्रैल की बताई गई जब कोरोना अपने पीक पर था। 

वीडियो वायरल होने के बाद अरिंजय के खिलाफ एफआईआर दर्ज कर अस्पताल को सील कर दिया गया। इस पूरे प्रकरण की जांच के लिए सरकार ने 4 सदस्यीय डेथ ऑडिट कमेटी का गठन किया। इस कमेटी ने अपनी जांच रिपोर्ट में अस्पताल को क्लीनचीट देते हुए दावा किया कि वहां 16 मरीजों की ही मौत हुई जिनमें सभी के हालात नाजुक थे। इनमें 14 मरीज गंभीर बीमारियों से ग्रसित थे और 2 का सीटी स्कोर काफी हाई था। यानी उनका फेफड़ा बुरी तरह से इंफेक्टेड था।

जांच कमेटी के इस रिपोर्ट को संदिग्ध माना जा रहा है। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक अस्पताल ने 26 अप्रैल के दिन सीसीटीवी कैमरों को बंद कर दिया था। लेकिन कमेटी ने इसे नजरअंदाज कर दिया। इसके अलावा 26 अप्रैल की रात जान गंवाने वाले 11 मरीजों के परिजन भी सामने आए हैं, लेकिन कमेटी ने इनसे भी बात नहीं कि। इस जांच कमेटी में एसएन मेडिकल कॉलेज से तीन डॉक्टर और आगरा मेडिकल विभाग से एक अधिकारी शामिल हैं।