न्यायपालिका में महिलाओं को मिले 50 फीसदी आरक्षण, यह हजारों साल के दमन का मुद्दा: CJI रमन्ना

सुप्रीम कोर्ट के चीफ जस्टिस एनवी रमन्ना ने कहा, "दुनिया की महिलाओं एक हो जाओ। आपके पास खोने के लिए कुछ नहीं है, सिवाए आपनी जंजीरों के।"

Updated: Sep 26, 2021, 05:25 PM IST

न्यायपालिका में महिलाओं को मिले 50 फीसदी आरक्षण, यह हजारों साल के दमन का मुद्दा: CJI रमन्ना
Photo Courtesy: ABP

नई दिल्ली। सुप्रीम कोर्ट के चीफ जस्टिस एनवी रमन्ना ने महिलाओं को 50 फीसदी आरक्षण देने की वकालत की है। जस्टिस रमन्ना ने कहा है कि यह महिलाओं का अधिकार है। सीजेआई ने इसे हजारों सालों के दमन का मुद्दा बताते हुए कहा है कि महिलाएं 50 फीसदी आरक्षण मांगने की हकदार हैं। उन्होंने कहा कि आरक्षण के मांग की पुरजोर सिफारिश करने की जरूरत है।

सीजेआई रमन्ना सुप्रीम कोर्ट के महिला वकीलों द्वारा 9 नवनियुक्त जजों के सम्मान समारोह में शामिल होने पहुंचे थे। यहां कार्यक्रम को संबोधित करते हुए उन्होंने महिलाओं से एकजुट होने का आह्वान किया। जस्टिस रमन्ना ने कार्ल मार्क्स को याद करते हुए कहा, 'मैं आप सब को याद दिलाना चाहता हूं कि कार्ल मार्क्स ने कहा 'दुनिया के मजदूरों एक हो जाओ, तुम्हारे पास खोने के लिए कुछ नहीं है, सिवाए आपनी जंजीरों के। मैं इसे संशोधित करता हूं। मैं कहता हूं 'दुनिया की महिलाओं एक हो जाओ। तुम्हारे पास खोने के लिए कुछ नहीं है, सिवाए आपनी जंजीरों के।'

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जस्टिस रमन्ना ने आगे कहा कि यह हजारों साल के दमन का मुद्दा है। उन्होंने कहा, 'देश के करीब 17 लाख वकीलों में से केवल 15 फीसदी महिलाएं हैं। हाईकोर्ट में महज साढ़े 11 फीसदी महिला जज हैं। सुप्रीम कोर्ट में भी 11-12 महिला जज हैं। 33 में से सिर्फ चार महिला जज। स्टेट बार काउंसिल में तो महज 2 फीसदी चुने हर प्रतिनिधि महिलाएं हैं।'

चीफ जस्टिस ने सुविधाओं की कमी को इसका एक कारण बताते हुए कहा कि कई चुनौतियां हैं जो इस प्रणाली में महिला वकीलों के लिए अनुकूल नहीं हैं।उन्होंने कहा, 'मुव्वकिलों की प्राथमिकता, असहज वातावरण, भीड़-भाड़ वाले कोर्ट रूम, महिला वॉशरूम की कमी आदि कई समस्याएं हैं जिन्हें मैं सुलझाने का प्रयास कर रहा हूं।

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बता दें कि हाल के दिनों में यह दूसरी बार है जब सुप्रीम कोर्ट के चीफ जस्टिस ने देश की न्यायपालिका में महिलाओं के प्रतिनिधित्व का मुद्दा उठाया है। बार काउंसिल ऑफ इंडिया के एक कार्यक्रम में भी उन्होंने महिलाओं 50 फीसदी प्रतिनिधित्व की वकालत की थी। सुप्रीम कोर्ट में इसी महीने की 1 तारीख को तीन महिलाओं ने जज के रूप में शपथ ली थी। इसके बाद उच्चतम न्यायालय की कुल 33 जजों की संख्या में चार महिलाएं हो गयीं हैं।