केरल में सीपीएम में 25 विधायकों के टिकट कटने से असंतोष, कांग्रेस के लिए बेहतर हुआ मौक़ा

सीपीएम ने किया लगातार दो बार चुनाव जीत चुके नेताओं को टिकट नहीं देने का सैद्धांतिक फ़ैसला, कई दिग्गजों के टिकट कटने से पार्टी को हो सकता है बड़ा नुक़सान

Updated: Mar 09, 2021, 01:16 PM IST

केरल में सीपीएम में 25 विधायकों के टिकट कटने से असंतोष, कांग्रेस के लिए बेहतर हुआ मौक़ा
Photo Courtesy: TheQuint

त्रिवेंद्रम। केरल विधानसभा चुनाव से पहले सत्तारूढ़ सीपीएम ने लगातार दो बार या उससे अधिक चुनाव जीत चुके नेताओं को इस बार टिकट नहीं देने का नया नियम लागू कर दिया है। देश के राजनीतिक इतिहास में यह पहला मौका है जब किसी पार्टी ने ऐसा प्रयोग किया है। लेकिन इस नए फैसले की चपेट में राज्य के कई दिग्गज सीपीएम नेता भी आ रहे हैं, जिसकी वजह से पार्टी को चुनावी नुकसान होने की आशंका जाहिर की जा रही है।  राजनीतिक विश्लेषक सीपीएम के इस फैसले को अपने पांव पर खुद कुल्हाड़ी मारने वाला बता रहे हैं। यह भी कहा जा रहा है कि सीपीएम के इस फैसले से कांग्रेस के लिए सत्ता में वापसी की राह कुछ आसान हो सकती है।  

सीपीएम के पोलित ब्यूरो के सेक्रेटेरियट ने इस नियम पर मुहर लगा दी है, जिसके बाद अब तय हो गया है कि पिनरई विजयन कैबिनेट के पांच मंत्रियों समेत 25 विधायकों का टिकट कटेगा। इस लिस्ट में विधानसभा के स्पीकर का भी नाम शामिल है। टिकट कटने वालों में पांच विधायक ऐसे हैं, जो छह बार से जीत रहे थे। एक विधायक 5 बार से, तीन विधायक 4 बार से और चार विधायक 3 बार से जीत रहे थे।

इस नए नियम को सीपीएम की स्टेट कमेटी लेकर आई है। पार्टी के इस फैसले के बाद कैडर में भारी नाराजगी है, वहीं स्टेट कमेटी के कई नेता भी इस फैसले से संतुष्ट नहीं हैं। इस फैसले के बाद कैबिनेट मंत्री पी जयराजन, एके बालन, टीएम थॉमस इसाक, जी सुधाकरन, सी रवींद्रनाथ और विधानसभा स्पीकर पी श्रीरामकृष्णन जैसे दिग्गजों के टिकट कट गए हैं। इन नेताओं के इलाकों में समर्थकों और पार्टी कैडर के द्वारा कमेटी के इस फैसले का विरोध भी शुरू हो गया है।

कन्नूर में मंत्री पी जयराजन का टिकट काटे जाने से कार्यकर्ताओं में भारी आक्रोश देखा जा रहा है। उन्होंने सड़कों पर प्रदर्शन से लेकर सोशल मीडिया पर जयराजन के समर्थन में पीजे आर्मी कैंपेन शुरू कर दिया है। पार्टी के इस फैसले पर पोलित ब्यूरो मेंबर एमए बेबी ने कहा कि, 'यह पार्टी का बहुत बोल्ड डिसीजन है, यह दूसरी पार्टियों के सामने नजीर है। इस नॉर्म के जरिए पार्टी में युवा चेहरे आगे आएंगे।'

पार्टी के इस फैसले को सही ठहराते हुए राज्य के मुख्यमंत्री पिनरई विजयन ने दलील दी है की अगले चुनाव के दौरान वे भी टू टर्म नॉर्म में आ जाएंगे और उन्हें भी टिकट नहीं मिलेगा। विजयन पांच बार विधायक रह चुके हैं, लेकिन पिछले चुनाव से पहले वे हार गए थे। ऐसे में वे लगातार दो बार चुनाव नहीं जीते, इसलिए इस नियम के दायरे में फिलहाल नहीं आ रहे हैं।

पार्टी कैडर इस नियम को अजीबोगरीब बता रहे हैं। कार्यकर्ताओं का कहना है कि सीएम विजयन सहित तीन बार विधायक रह चुकीं केके शैलेजा, तीन बार की विधायक जे मर्सिकुट्‌टी अम्मा जैसे लोगों को सिर्फ इसलिए टिकट दिया जा रहा है क्योंकि वह लगातार दो बार चुनाव जीतने में सफल नहीं रहे। जबकि लगातार दो सफल होने वाले नेताओं को टिकट नहीं दिया जा रहा है।

इस टू टर्म नॉर्म को लागू करने के पीछे पार्टी युवाओं को अवसर देने की दलील दे रही है। लेकिन पार्टी के इस तर्क से बहुत से लोग सहमत नहीं हैं। कुछ जानकार मानते हैं कि यह फैसला विजयन गुट ने पूर्व सीएम अच्युतानंदन के खेमे से जुड़े बड़े नेताओं को दरकिनार करने के लिए करवाया है। केरल में सीपीएम के बड़े नेता अच्युतानंदन उम्र ज्यादा होने की वजह से अब राजनीति में ज्यादा सक्रिय नहीं हैं, लिहाजा विजयन की उनके पुराने साथियों को किनारे करके विरोधी गुट की चुनौती को पूरी तरह खत्म करना चाहते हैं।

बहरहाल वजह कुछ भी हो, कई राजनीतिक विश्लेषक सीपीएम के इस नए प्रयोग को आत्मघाती कदम करार दे रहे हैं। उनका मानना है कि दिग्गज नेताओं की बगावत सीपीएम को चुनाव में भारी नुकसान पहुंचा सकती है। जिन 25 सीटों पर टिकट काटे जाएंगे, उनमें कम से कम 15 सीटों पर सीपीएम को भी नुकसान होने के आसार हैं। राजनीतिक पंडितों का कहना है कि सीपीएम का यह फैसला केरल में कांग्रेस के लिए यह एक सुनहरा अवसर साबित हो सकता है। वैसे तो केरल में आम तौर पर ऐसा ही होता रहा है कि एक बार सीपीएम की अगुवाई वाले लेफ्ट डेमोक्रेटिक फ्रंट की सरकार बनती है और दूसरी बार कांग्रेस की अगुवाई वाले यूडीएफ की। लेकिन इस बार कई ओपिनियन पोल लेफ्ट की वापसी का अनुमान जाहिर कर रहे थे। लेकिन सीपीएम का यह फैसला इन भविष्यवाणियों को गलत साबित करके यूडीएफ को केरल का पुराना रिकॉर्ड बरकरार रखने में मदद कर सकता है।