म्यांमार संकट: भारी विरोध के बीच मणिपुर सरकार ने वापस लिया शरणार्थियों को पनाह न देने का आदेश

म्यांमार में तख्ता पलट के बाद से हिंसा जारी, मणिपुर ने शरणार्थियों की मदद करने पर लगाया था रोक, जन-आक्रोश को देखते हुए 3 दिन में ही वापस लिया फैसला

Publish: Mar 30, 2021, 03:00 PM IST

म्यांमार संकट: भारी विरोध के बीच मणिपुर सरकार ने वापस लिया शरणार्थियों को पनाह न देने का आदेश

नई दिल्ली। मणिपुर की सरकार ने म्यांमार से आने वाले लोगों के एंट्री पर बैन लगाने का आदेश वापस ले लिया है। राज्य सरकार के फैसले के खिलाफ देशभर में हो रही आलोचनाओं और मणिपुर में जनाक्रोश को देखते हुए महज तीन दिन के भीतर ही सरकार ने बयान जारी कर अपना आदेश वापस ले लिया। 

राज्य सरकार ने एक पत्र जारी कर कहा कि ऐसा लगता है कि सरकारी आदेश की बातों को गलत तरीके से समझा गया। राज्य सरकार सभी मानवीय कदम उठा रही है जिसमें शरणार्थियों को इम्फाल ले जाना, घायलों का इलाज कराना शामिल है। राज्य सरकार हरसंभव मदद मुहैया कराती रहेगी। विशेष सचिव (गृह) एच ज्ञान प्रकाश ने मुझे सरकार का यह फैसला बताने के निर्देश दिए गए हैं कि उसने 26 मार्च को लिखे पत्र को वापस लेने का फैसला किया है।

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दरअसल, मणिपुर सरकार ने हाल ही में एक आदेश जारी कर अधिकारियों को आदेश दिए थे कि म्यांमार से आने वाले लोगों को शरण देने और उन्हें भोजन-पानी और पनाह देने पर पाबंदी लगाई जाए। आदेश के अनुसार मानवीय आधार पर बेहद गंभीर रूप से घायल शरणार्थियों को केवल दवाई देने की छूट होगी। इसमें कहा गया था कि कोई शरण मांगने आए तो उन्हें हाथ जोड़कर वापस भेज दें। इतना ही नहीं सरकार ने आधार पंजीकरण तत्काल प्रभाव से रोकते हुए पंजीकरण किट को कस्टडी में लेने का आदेश जारी किया था।

मणिपुर सरकार के इस आदेश की सोशल मीडिया पर तीखी आलोचना हो रही थी। कई लोग इस आदेश को अमानवीय और क्रूर बता रहे थे जो कि देश के आतिथ्य की लंबी परंपरा के ख‍िलाफ है। अतिथि देवो भवः का हवाला देते हुए कई लोग यह मांग कर रहे थे कि मुश्किल में पड़े पड़ोसी देश के नागरिकों को मदद करनी चाहिए।

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बता दें कि म्यांमार से लगी भारत की करीब 1643 किलोमीटर लंबी सीमा है। फरवरी में हुए तख्तापलट के बाद से वहां सैन्य शासन व जनता के बीच लगातार टकराव चल रहा है। म्यांमार के लोग सैन्य तानाशाही का विरोध करते हुए लोकतंत्र वापसी की मांग कर रहे हैं। लोकतंत्र बहाली की मांग कर रहे लोगों को बर्बर तरीके से मारा जा रहा। अबतक 500 से ज्यादा लोगों की मौत हो चुकी है। सेना के दमनकारी रवैये के कारण बड़े पैमाने पर लोगो के देश छोड़कर भारतीय सीमा की ओर आ रहे हैं।

उधर, मिजोरम के मुख्यमंत्री जोरामथांगा ने हाल ही में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को पत्र लिखकर उनसे शरणार्थियों को पनाह देने का अनुरोध किया था और कहा था कि म्यांमार में बड़े पैमाने पर मानवीय तबाही हो रही है और सेना निर्दोष नागरिकों की हत्या कर रही है। मिजोरम में अबटक 1000 से ज्यादा लोगों को शरण दी जा चुकी है। संयुक्त राष्ट्र में म्यांमार के राजदूत ने भी भारत सरकार से अपील की है कि म्यांमार से भागकर आ रहे निर्दोष नागरिकों को शरण दे।