महापंचायत की नाकामी पर बोले खट्टर, ये किसान नहीं, कांग्रेस और कम्युनिस्ट हैं

किसानों को खालिस्तानी करार देने वाले खट्टर ने महापंचायत स्थल पर हुई तोड़ फोड़ पर अपने लिए अभिव्यक्ति की आज़ादी की माँग की

Updated: Jan 11, 2021, 02:31 PM IST

महापंचायत की नाकामी पर बोले खट्टर, ये किसान नहीं, कांग्रेस और कम्युनिस्ट हैं
Photo Courtesy: The Federal News

नई दिल्ली। हरियाणा के मुख्यमंत्री मनोहर लाल खट्टर ने करनाल के कैमला में होने वाली महापंचायत से पहले पंचायत स्थल पर तोड़फोड़ के लिए किसान नेता गुरनाम सिंह चढूनी को ज़िम्मेदार ठहराया है। खट्टर ने कहा है कि गुरनाम सिंह चढूनी का एक भड़काऊ वीडियो दो दिन से वायरल हो रहा था और इसी वजह से कैमला में तोड़फोड़ हुई है। खट्टर ने कहा है कि लोकतंत्र में सभी को अपनी बात करने का हक है। जैसे हमने किसानों को आंदोलन करने से नहीं रोका, वैसे ही हमें भी अपनी बात रखने का मौका मिलना चाहिए। इसके साथ ही खट्टर ने कहा है कि इस पूरे किसान आंदोलन के पीछे कांग्रेस और कम्युनिस्टों का हाथ है। 

दरअसल रविवार को करनाल कैमला गांव में कृषि कानूनों के कथित फायदे गिनाने के लिए मनोहर लाल खट्टर महापंचायत करने वाले थे। महापंचायत स्थल पर कुछ लोग खट्टर के कार्यक्रम में विरोध करने पहुंचे थे। लेकिन वहां पर मौजूद पुलिस बल ने किसानों को खदेड़ने की कोशिश की। किसानों के ऊपर वॉटर कैनन और आंसू गैस गोले छोड़े जाने शुरू हो गए। जिसके बाद किसानों का गुस्सा फूट पड़ा, और किसानों ने महापंचायत स्थल पर टेंट तंबू उखाड़ कर फेंक दिए। इतने भारी विरोध के चलते खट्टर को अपना कार्यक्रम रद्द करना पड़ा। 

लेकिन खट्टर ने रविवार शाम प्रेस कॉन्फ्रेंस में किसानों के विरोध की घिसी-पिटी थ्योरी दोहरा दी। खट्टर ने दावा किया कि इस पूरे किसान आंदोलन में कांग्रेस पार्टी और कम्युनिस्टों का हाथ है। खट्टर ने कहा कि जितने भी नेता सरकार से बातचीत करने के लिए जाते हैं, उनमें से ज़्यादातर कम्युनिस्ट हैं। खट्टर ने कहा कि अगर वे यह सोच रहे हैं कि इसके बल पर वो अपने पैर जमा लेंगे तो गलत सोच रहे हैं। खट्टर ने कहा कि आंदोलन करने वाले लोग किसान नहीं है। और वे एक एक कर एक्सपोज हो रहे हैं।

खट्टर यह दावा कर रहे हैं कि किसान आंदोलन कम्युनिस्टों और कांग्रेस पार्टी द्वारा भड़काया जा रहा है और आंदोलन करने वाले किसान ही नहीं है। खट्टर यह दावा तब कर रहे हैं जब उनके राज्य की पुलिस किसान आंदोलन को कुचलने के लिए हर कोशिश कर रही है और केंद्र सरकार दिल्ली के विज्ञान भवन में आठ बार वार्ता के लिए बुला चुकी है !

किसान खट्टर का इतना विरोध क्यों कर रहे हैं 

यह पहली बार नहीं है जब किसानों द्वारा खट्टर का विरोध किया जा रहा हो। इससे पहले भी मनोहर लाल खट्टर को करनाल के पाढा गांव में किसानों के विरोध के चलते अपना कार्यक्रम रद्द करना पड़ा था। पिछले महीने ही जब खट्टर नगर निकाय चुनावों का प्रचार करने पहुंचे थे, तब उन्हें किसानों का इतना कड़ा विरोध झेलना पड़ा था कि खट्टर को अपना काफिला वापस लौटाना पड़ा। तब खट्टर ने किसानों का विरोध देखते हुए यू टर्न ले लिया था। 

दरअसल किसान आंदोलन को दबाने के लिए खट्टर से शुरू से ही काफी प्रयास किए। सबसे पहले तो खट्टर ने किसानों के आंदोलन को किसानों का न बता कर खालिस्तानियों का आंदोलन करार दे दिया। दिल्ली जा रहे किसानों के रास्ते में खट्टर सरकार ने काफी रुकावटें डालीं और अभी भी डाल रही है। इसके साथ ही किसानों के विरुद्ध खट्टर सरकार ने मुकदमे भी दायर किया। यही वजह है कि आंदोलनरत किसान मनोहर लाल खट्टर से काफी नाराज़ हैं।

खट्टर को क्यों रास नहीं आ रहा किसान आंदोलन 

यहां सवाल यह उठता है कि आखिर खुद मनोहर लाल खट्टर को किसानों का आंदोलन रास क्यों नहीं आ रहा है? दरअसल मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक इसी लोकतांत्रिक व्यवस्था और अभिव्यक्ति की आज़ादी को कुचल नहीं पाने के लिए खट्टर की पार्टी का केन्द्रीय नेतृत्व उनसे नाराज़ चल रहा है। क्योंकि दिल्ली की सीमाओं पर चल रहा किसान आंदोलन पंजाब और हरियाणा के रास्ते ही दिल्ली आया था और खट्टर अपने राज्य में किसानों को रोक पाने में नाकामयाब रहे। खट्टर की इसी नाकामी के लिए बीजेपी का शीर्ष नेतृत्व उनसे नाराज़ है। खट्टर के प्रति शीर्ष नेतृत्व की नाराज़गी इतनी हद तक की बढ़ चुकी है कि बीजेपी हाईकमान खट्टर से मुख्यमंत्री की कुर्सी तक छीनने की तैयारी कर रहा है। 

कुर्सी चले जाने के आशंकाओं से घबराकर खट्टर लगातार किसान आंदोलन को लेकर ऐसी बयानबाज़ी कर रहे हैं, जिससे वे और घिरते जा रहे हैं। वो खुलकर किसान आंदोलन का विरोध भी कर रहे हैं और किसानों से महापंजीयक भी करना चाहते हैं। यही वजह है कि खट्टर को किसान आंदोलन ज़रा भी रास नहीं आ रहा है।