सात सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स ने लागू किए नए आईटी रूल्स से जुड़े बदलाव, ट्विटर ने नहीं मानी सरकार की बात

आईटी एक्ट के नए नियमों का पालन करते हुए वॉट्सऐप, फेसबुक समेत सात सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स ने आईटी मंत्रालय के साथ संबंधित विवरण साझा किया है

Updated: May 29, 2021, 12:56 PM IST

सात सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स ने लागू किए नए आईटी रूल्स से जुड़े बदलाव, ट्विटर ने नहीं मानी सरकार की बात
Photo Courtesy: The Wire

नई दिल्ली। केंद्र सरकार द्वारा बनाए गए नए आईटी नियमों को देश के सात प्रमुख सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स ने मान लिया है। रिपोर्ट्स के मुताबिक नए नियमों को मानते हुए इन कंपनियों ने इलेक्ट्रॉनिक्स और आईटी मंत्रालय के साथ संबंधित विवरण भी साझा कर दिया है। हालांकि, माइक्रोब्लॉगिंग साइट ट्विटर ने गोपनीयता का हवाला देते हुए तीन महीने का समय मांगा है।

केंद्र सरकार के नियमों का पालन करने वाले सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स में फेसबुक, वॉट्सऐप, कू, टेलीग्राम, शेयरचैट, लिंक्डइन और गूगल शामिल है। बताया जा रहा है कि केंद्र सरकार के अड़ियल रवैए को देखते हुए ट्विटर ने भी शुक्रवार देर रात अपनी कंपनी में काम कर रहे वकील की जानकारी साझा की है जो भारत में उसके नोडल कॉन्टैक्ट पर्सन और शिकायत अधिकारी के तौर पर काम करेंगे। हालांकि, अनुपालन अधिकारी को लेकर कंपनी ने अबतक कोई जानकारी नहीं दी है।

क्या है पूरा मामला

दरअसल, भारतीय आईटी मंत्रालय की ओर से इस साल 25 फरवरी को 50 लाख से ज्यादा यूजर्स वाली सोशल मीडिया कंपनियों के लिए नए दिशानिर्देश जारी किए गए थे। सरकार ने कंपनियों से यूजर्स की शिकायतों का निपटारा करने के लिए मैकेनिज्म तैयार करने को कहा और इससे जुड़े तीन पद तय किए गए। गाइडलाइंस के मुताबिक सोशल मीडिया कंपनियों को भारत में अपने मुख्य अनुपालन अधिकारी, नोडल संपर्क व्यक्ति और शिकायत अधिकारी नियुक्त करना होगा।

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मुख्य अनुपालन अधिकारी का काम यह सुनिश्चित करना है कि सभी एक्ट और नियमों के पालन हो। नोडल कॉन्टैक्ट पर्सन का काम कानून संबंधी एजेंसियों से हर समय जुड़े रहना होगा। वहीं, शिकायत अधिकारी का काम 24 घंटे के भीतर यूजर्स के शिकायतों का निपटारा करना होगा। सरकार ने इनकी नियुक्ति के लिए 25 मई 2021 का डेडलाइन तय किया था, लेकिन अधिकांश कंपनियों ने इसे नहीं माना।

केंद्र सरकार ने इसपर सख्त रुख अख्तियार करते हुए 15 दिनों के भीतर कंपनियों से गाइडलाइंस फॉलो करने का ब्यौरा मांगा था। जिसके बाद कंपनियों ने आनन-फानन में इसे स्वीकार कर लिया। उधर ट्विटर ने खुलकर इन नियमों का विरोध किया है। कंपनी ने अभिव्यक्ति की आजादी को लेकर चिंता जताते हुए कहा है ये नियम  फ्री स्पीच के लिए बाधक हैं। ट्वीटर का मानना है कि इससे लोग खुलकर बात नहीं कर सकेंगे। कंपनी ने इसके खिलाफ दिल्ली हाईकोर्ट में अपील भी किया है।

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ट्विटर को जवाब देते हुए भारत सरकार ने कहा था कि भारत में अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता की रक्षा करना भारत सरकार की जिम्मेदारी है न कि ट्विटर जैसी किसी निजी लाभकारी, विदेशी संस्था की। कंपनी दुनिया के सबसे बड़े लोकतंत्र को यह सिखाने की कोशिश न करे कि हमें क्या करना है। हालांकि, एक्सपर्ट्स का एक धड़ा ट्वीटर की बातों से सहमति रखता है। चूंकि इस नियम के लागू होने के बाद सरकार किसी मैसेज के 'फर्स्ट ओरिजनेटर' को ट्रैक कर सकती है। 

वॉट्सऐप जैसे कई प्लेटफॉर्म्स जो यूजर्स को एंड-टू-एंड एनक्रिप्शन देने का दावा करते हैं, यानी कि मैसेज भेजने वाला और उसे प्राप्त करने वाले के अलावा कोई तीसरा व्यक्ति उसे नहीं पढ़ सकता। नए नियम लागू करने और फर्स्ट ओरिजिनेटर का पता लगाने के लिए इसे खत्म करना होगा। वॉट्सऐप ने भी एंड-टू-एंड एनक्रिप्शन को लेकर दिल्ली हाईकोर्ट का रुख किया है। देशभर में यह चर्चा जोरों पर है कि केंद्र सरकार कंपनियों की जिम्मेदारी तय करने के नाम पर सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर नियंत्रण करने की कोशिशें कर रही है।