ऑक्सफोर्ड की वैक्सीन को भारत में इमरजेंसी अप्रूवल देने की तैयारी, जल्द ख़त्म हो सकता है इंतज़ार

Corona Vaccine: ऑक्सफ़ोर्ड यूनिवर्सिटी और दवा कंपनी आस्ट्रा-ज़ेनेका मिलकर इस वैक्सीन को डेवलप कर रहे हैं, जिसे ब्रिटेन में बहुत जल्द मंज़ूरी मिल जाने की उम्मीद है

Updated: Dec 27, 2020, 09:25 PM IST

ऑक्सफोर्ड की वैक्सीन को भारत में इमरजेंसी अप्रूवल देने की तैयारी, जल्द ख़त्म हो सकता है इंतज़ार
Photo Courtesy : Financial Times

नई दिल्ली। कोविड 19 महामारी के ख़िलाफ़ जारी भारत की जंग में बहुत जल्द नई ताक़त आने की उम्मीद है। खबर है कि सरकार जल्द ही कोविशील्ड वैक्सीन के इमरजेंसी इस्तेमाल को मंज़ूरी दे सकती है। ये वैक्सीन ऑक्सफ़ोर्ड यूनिवर्सिटी और आस्ट्रा जेनेका कंपनी मिलकर तैयार कर रहे हैं। बताया जा रहा है कि देश में विकसित किए जा रहे टीकों को मंज़ूरी मिलने में विलंब हो रहा है, जिसके चलते फ़िलहाल ब्रिटिश वैक्सीन को ही आपातकालीन स्थितियों में इस्तेमाल की इजाज़त दी जा सकती है।

मीडिया में आ रही ख़बरों के मुताबिक़ ऑक्सफोर्ड आस्ट्राजेनेका वैक्सीन को ब्रिटेन के ड्रग रेगुलेटर से मंज़ूरी मिल जाने के बाद भारत में एक विशेषज्ञ समिति इस पर विचार करेगी। वैक्सीन के सेफ़्टी और इम्यूनिटी रिस्पॉन्स से जुड़े डेटा का बारीकी से अध्ययन करने के बाद कमेटी इसे भारत में इस्तेमाल करने की इजाज़त दे सकती है। इस बीच एक अच्छी खबर यह भी है कि आस्ट्रा-ज़ेनेका के सीईओ ने अपनी वैक्सीन के 95 फीसदी तक प्रभावशाली होने का दावा किया है। हालांकि इससे जुड़े आंकड़ों का विवरण अब तक सामने नहीं आया है। उन्होंने यह उम्मीद भी जाहिर की है कि उनकी वैक्सीन ब्रिटेन में मिले कोरोना वायरस नए स्ट्रेन के खिलाफ भी असरदार साबित होगी। 

सूत्रों का कहना है कि  'कोवैक्सीन' के नाम से बनाई जा रही भारत बायोटेक की कोरोना वैक्सीन को इमरजेंसी इस्तेमाल के लिए अप्रूवल देने में और वक़्त लग सकता है। फ़िलहाल इस टीके का परीक्षण तीसरे चरण में है। जबकि अमेरिकी कंपनी फाइज़र ने भी अब तक अपनी वैक्सीन का प्रेजेंटेशन ही नहीं दिया है। इन हालात में ऑक्सफोर्ड की कोविशील्ड ही ऐसी वैक्सीन नज़र आ रही है, जिसे भारत में इस्तेमाल करने के लिए सबसे जल्द मंज़ूरी दिए जाने की उम्मीद है।

मीडिया में सूत्रों के हवाले से आ रही खबरों के मुताबिक सीरम इंस्टिट्यूट ऑफ इंडिया (SII) ने पिछले हफ्ते ड्रग कंट्रोलर जनरल ऑफ इंडिया (DGCI) को कुछ आंकड़े दिए हैं। ब्रिटेन में हाल ही ही में कोरोना का नया स्ट्रेन मिलने के बाद मची खलबली के बारे में पूछे जाने पर जानकारों का यही कहना रहा है कि वैक्सीन के असरदार होने न होने पर इसका कोई खास प्रभाव पड़ने की आशंका नहीं है।

इस महीने के आरंभ में भारत बायोटेक, सीरम इंस्टिट्यूट ऑफ इंडिया और फाइज़र ने DGCI से अपनी-अपनी वैक्सीन के इमरजेंसी इस्तेमाल को मंजूरी देने की मांग की थी। इसके बाद सेंट्रल ड्रग्स स्टैंडर्ड कंट्रोल ऑर्गनाइजेशन (CDSCO) के विशेषज्ञों ने सीरम इंस्टीट्यूट और भारत बायोटेक से ही उनके टीके के प्रभाव और सुरक्षा के बारे में और डेटा मांगा था। फाइज़र के आवेदन पर उस वक्त गौर नहीं किया गया क्योंकि कंपनी ने प्रेजेंटेशन देने के लिए और वक्त मांगा था। हालांकि फाइज़र की वैक्सीन को अमेरिका और ब्रिटेन समेत कई देशों में इस्तेमाल की मंजूरी मिल चुकी है, लेकिन भारत में मंज़ूरी देने से पहले मंजूरी की प्रक्रिया से गुज़रना ज़रूरी है।