राजनीतिक रंग देने से हो जाता है मानवाधिकार का हनन, NHRC के स्थापना दिवस पर पीएम ने किया दावा

प्रधानमंत्री मोदी ने अपने संबोधन में कहा कि बीते वर्षों में भारत ने अलग अलग स्तर हो रहे अन्याय को दूर करने का प्रयास किया, इस दौरान पीएम अपनी सरकार की प्रशंसा करना नहीं भूले

Updated: Oct 12, 2021, 12:46 PM IST

राजनीतिक रंग देने से हो जाता है मानवाधिकार का हनन, NHRC के स्थापना दिवस पर पीएम ने किया दावा

नई दिल्ली। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने यह दावा किया है कि किसी मामले को राजनीतिक रंग देने से मानवाधिकार का हनन हो जाता है। प्रधानमंत्री ने कहा है कि मानवाधिकार का नुकसान तब होता है जब उसे राजनीतिक चश्मे से देखा जाता है। जब उसे राजनीतिक नफा नुकसान के तराजू पर तौला जाता है। यह लोकतंत्र के लिए भी उतना ही घातक होता है। 

प्रधानमंत्री मोदी ने यह बातें राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग के 28वें स्थापना दिवस को संबोधित करते हुए कहीं। प्रधानमंत्री मोदी ने कहा है कि मानवाधिकार का बहुत ज्यादा हनन तब होता है जब उसे राजनीतिक रंग से देखा जाता है, राजनीतिक चश्मे से देखा जाता है, राजनीतिक नफा-नुकसान के तराजू से तौला जाता है।इस तरह का सलेक्टिव व्यवहार, लोकतंत्र के लिए भी उतना ही नुकसानदायक होता है। 

हालांकि प्रधानमंत्री ने यह भी कहा कि हाल के वर्षों में मानवाधिकार की व्याख्या कुछ लोग अपने अपने तरीके से और अपने अपने हितों को देखकर लड़ने लगे हैं। प्रधानमंत्री ने कहा कि एक ही प्रकार की घटना में उन लोगों को मानवाधिकार का हनन दिखता है और दूसरी प्रकार की घटना में उन्हें मानवाधिकार का हनन नहीं दिखता। पीएम ने कहा कि ऐसी मानसिकता मानवाधिकार को बहुत ज्यादा नुकसान पहुंचाती है। 

अपने संबोधन के दौरान प्रधानमंत्री मोदी अपनी पीठ थपथपाना नहीं भूले। उन्होंने कहा कि हमारी सरकार ने ट्रिपल तलाक के खिलाफ कानून बनाकर मुस्लिम महिलाओं को अधिकार दिया है। दशकों से मुस्लिम महिलाएं ट्रिपल तलाक के खिलाफ कानून की मांग कर रही थीं। 

प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि बीते दशकों में कई ऐसे मौके आए जब दुनिया भटक गई, भ्रमित हो गई। लेकिन भारत मानवाधिकारों के प्रति हमेशा प्रतिबद्ध रहा, संवेदनशील रहा। प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि भारत में मानवाधिकारों के लिए प्रेरणा स्त्रोत आजादी का आंदोलन और हमारा इतिहास रहा है। प्रधानमंत्री ने राष्ट्रपिता महात्मा गांधी का ज़िक्र करते हुए कहा कि जब दुनिया अहिंसा के आग में झुलस रही थी, तब बापू ने सिर्फ भारत को ही नहीं बल्कि पूरे विश्व को अहिंसा का मार्ग सुझाया। बापू को भारत ही नहीं बल्कि पूरा विश्व मानवाधिकार मूल्यों के प्रतीक के तौर पर देखता है।