मुंबई को केंद्र शासित प्रदेश बनाने की बीजेपी नेता की माँग पर शिवसेना का पलटवार, जानिए क्या है पूरा मामला

बीजेपी नेता और कर्नाटक के डिप्टी सीएम लक्ष्मण सावदी ने माँग की है कि मुंबई को कर्नाटक में शामिल किया जाए और जब तक ऐसा नहीं होता उसे केंद्र शासित प्रदेश घोषित किया जाए

Updated: Jan 28, 2021, 08:23 PM IST

मुंबई को केंद्र शासित प्रदेश बनाने की बीजेपी नेता की माँग पर शिवसेना का पलटवार, जानिए क्या है पूरा मामला
Photo Courtesy : DNA

मुंबई। शिवसेना के मुख्य प्रवक्तता संजय राउत ने बीजेपी नेता व कर्नाटक के डिप्टी सीएम लक्ष्मण सावदी को करारा जवाब दिया है। राउत ने कहा है कि बीजेपी नेता को जाकर पहले इतिहास की पढ़ाई करनी चाहिए और उसे समझना चाहिए। राउत ने यह भी दावा किया है कि महाराष्ट्र में रहने वाले कन्नड़ भाषी लोग भी यही चाहते हैं कि कर्नाटक में आने वाले मराठी बहुल इलाकों को महाराष्ट्र में शामिल किया जाए।

दरअसल, महाराष्ट्र-कर्नाटक सीमा विवाद को लेकर कर्नाटक के डिप्टी सीएम सावदी ने बुधवार को अजीबोगरीब बयान दिया था। सवाड़ी ने मोदी सरकार से मांग की थी कि मुंबई को कर्नाटक में शामिल किया जाए और जब तक ऐसा नहीं होता, तब तक उसे केंद्रशासित प्रदेश घोषित किया जाए।' सवाड़ी के इस बयान के बारे में पूछे जाने पर शिवसेना सांसद संजय राउत ने कहा कि उनके बयानों को इतना महत्व देने की कोई आवश्यकता नहीं है। लोग कुछ भी बात करते रहें, उससे हम प्रभावित नहीं होंगे।'

यह भी पढ़ें: कृषि क़ानूनों के ख़िलाफ़ विपक्ष एकजुट, कांग्रेस समेत 16 दल करेंगे राष्ट्रपति के अभिभाषण का बहिष्कार

राउत ने आगे कहा कि, 'सावदी को इतिहास समझना चाहिए। कर्नाटक के साथ महाराष्ट्र का विवाद मराठी भाषा और संस्कृति की रक्षा के लिए है। सावदी को महाराष्ट्र आना चाहिए और यहां रहने वाले कन्नड़ भाषी लोगों से बात करनी चाहिए। वे भी उन्हें यही कहेंगे कि बेलगाम, करवार और निपाणी जैसे मराठी बाहुल्य इलाकों को महाराष्ट्र में शामिल कर दिया जाना चाहिए।' राउत ने बताया कि महाराष्ट्र सरकार राज्य के कन्नड़ स्कूलों, पुस्तकालयों और सांस्कृतिक संगठनों को अनुदान प्रदान करती है। उन्होंने कर्नाटक सरकार से पूछा है कि क्या बेलगाम में ऐसा होता है?

दरअसल, महाराष्ट्र बेलगाम, करवार और निपाणी सहित कर्नाटक के कई हिस्सों पर दावा करता है, क्योंकि यहां की ज्यादातर आबादी मराठी भाषी है। यह मामला पिछले कई वर्षों से सुप्रीम कोर्ट में लंबित है। उधर कर्नाटक सरकार ने बेलगाम को अपनी दूसरी राजधानी घोषित कर दिया है। इतना ही नहीं वहां पर विधानमंडल की इमारत का निर्माण किया है जहां साल में एक बार विधानसभा सत्र बुलाया जााता है। महाराष्ट्र सरकार ने इसे सुप्रीम कोर्ट की अवमानना बताया है।

यह भी पढ़ें: किसान नेताओं के ख़िलाफ़ जारी होगा लुकआउट नोटिस, गृह मंत्रालय ने दिया आदेश 

महाराष्ट्र सरकार का यह भी आरोप है कि कर्नाटक की सरकार सीमा प्रांतों में रहने वाले मराठी भाषी लोगों पर अत्याचार कर रही है। राज्य के सीएम उद्धव ठाकरे ने मामले पर मांग की है कि जब तक इस केस का फैसला नहीं आता, तब तक सीमा प्रांत को न तो कर्नाटक का क्षेत्र माना जाए और न ही महाराष्ट्र का। इन क्षेत्रों के नागरिकों के हितों की रक्षा के लिए उन्हें केंद्रशासित प्रदेश का दर्जा दिया जाए।' ठाकरे की इसी मांग के जवाब में कर्नाटक के डिप्टी सीएम ने मुंबई को कर्नाटक में शामिल करने जैसी अजीबोगरीब मांग कर डाली है।