कोरोना : 69 फीसदी मरीजों में लक्षण नहीं, खतरा बढ़ा

ICMR ने बताया कि जब कॉन्टैक्ट ट्रेसिंग शुरू की गई तब तीन में से दो मरीज ऐसे मिले, जो एसिम्प्टोमेटिक थे. मतलब उनमें बीमारी के लक्षण नहीं थे. 

Publish: Apr-22, 2020, 10:05 PM IST

कोरोना :  69 फीसदी मरीजों में लक्षण नहीं, खतरा बढ़ा

भारत की शीर्ष मेडिकल रिसर्च बॉडी ICMR ने बताया कि देश में कोरोना वायरस के 69 फीसदी मरीजों में बीमारी के कोई लक्षण नहीं पाए गए. इसे लेकर संस्था काफी चिंतित है क्योंकि ऐसे मरीज अनजाने में कोरोना वायरस के वाहक होते हैं. 

अब तक देश में 4,47,812 सैंपलों की जांच की जा चुकी है और इनमें 19,984 सैंपल पॉजिटिव पाए गए हैं. वहीं स्वास्थ्य मंत्रालय ने बताया कि वैश्विक आंकड़ों से यह पता चला है कि कोरोना वायरस के 80 प्रतिशत में या तो बीमारी के बहुत कम लक्षण पाए गए या फिर लक्षण नहीं पाए गए. 

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ICMR ने बताया कि जब कॉन्टैक्ट ट्रेसिंग शुरू की गई तब तीन में से दो मरीज ऐसे मिले, जो एसिम्प्टोमेटिक थे. मतलब उनमें बीमारी के लक्षण नहीं थे. संस्था की तरफ से कहा गया कि जब कोई एसिम्प्टोमेटिक मामला सामने आता है तो मरीज द्वारा उसकी जानकारी देने की संभावना बहुत कम होती है क्योंकि मरीज को खुद ही इसका आभास नहीं होता. 

अंग्रेजी दैनिक हिंदुस्तान टाइम्स के एक विश्लेषण के मुताबिक महाराष्ट्र में करीब 65 प्रतिशत और उत्तर प्रदेश में करीब 75 प्रतिशत एसिम्प्टोमेटिक  मामले सामने आए. केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय का कहना है कि एसिम्प्टोमेटिक मामलों का सामना करने के लिए कम्युनिटी सर्विलांस और कॉन्टैक्ट ट्रेसिंग का इस्तेमाल किया जा रहा है. 

विशेषज्ञों का कहना है कि टेस्टिंग करने की गति बढ़ाने से भारत में कोरोना वायरस के और मामले पता लगाने में सफलता प्राप्त हो सकती है. ICMR ने फिलहाल हाई रिस्क एसिम्प्टोमेटिक मरीज के संपर्क में आए दूसरे लोगों की जांच करने की बात कही है. यह जांच एसिम्प्टोमेटिक मरीज के संपर्क में आने के पांचवें और चौदहवें दिन के बीच एक बार जरूर होनी है.