दफ्तर दरबारी: अंधेरा, धृतराष्‍ट्र की सभा और संजय की पुकार 

उस महफिल में जब संजय का नाम पुकारा गया तो सहसा महाभारत का दृश्‍य मस्तिष्‍क में कौंध गया। महसूस हुआ जैसे समूचा राज्‍य युद्ध जैसी परिस्थितियों से घिरा हो और सारी स्थितियों से वाकिफ धृतराष्‍ट्र जानबूझ कर अनजान बनते हुए दूरदृष्‍टा संजय को पुकार रहे हों..

Updated: May 02, 2022, 09:34 AM IST

दफ्तर दरबारी: अंधेरा, धृतराष्‍ट्र की सभा और संजय की पुकार 

न तो यह महाभारत काल है और न ही धृतराष्‍ट्र का दरबार.. लेकिन उस महफिल में जब संजय नाम पुकारा गया तो सहसा महाभारत का दृश्‍य मस्तिष्‍क में कौंध गया। महसूस हुआ जैसे समूचा राज्‍य युद्ध जैसी परिस्थितियों से घिरा हो और सारी स्थितियों से वाकिफ धृतराष्‍ट्र जानबूझ कर अनजान बनते हुए दूरदृष्‍टा संजय को पुकार रहे हों। बेबस धृतराष्‍ट्र कातर स्‍वर में संजय को यूं पुकारते हैं मानो संजय अंधेरे काल को उजले दिन में परिवर्तित कर देंगे। 

कुछ ऐसा ही कातर स्‍वर था मुख्‍यमंत्री शिवराज सिंह चौहान का जब सिविल सर्विस डे पर प्रशासन अकादमी के कार्यक्रम में अचानक बत्ती गुल हो गई। कार्यक्रम में आईएएस, आईएफएस और आईपीएस अफसर मौजूद थे यानि टीम मध्‍य प्रदेश, प्रदेश के मुखिया के सामने थी और मंच हो या मंच से नीचे.. वहां बैठा हर व्‍यक्ति जानता था कि प्रदेश में बिजली संकट गहरा रहा है। मगर सिंहासन से बंधे होने के कारण कोई भी सार्वजनिक रूप से इस सच को स्‍वीकार नहीं कर रहा था।   

मंच से सीएम शिवराज सिंह चौहान का संबोधन चल रहा था। अपने स्‍वभाव के अनुरूप सीएम संबोधन के दौरान एक कहानी सुनाने जा रहे थे तभी बिजली चली गई। कक्ष में अंधेरा छा गया और मंच का माइक भी बंद हो गया। तभी सन्‍नाटे से सीएम की आवाज उभरी...संजय दुबे हैं क्या? मंच से सीएम की लगायी इस आवाज़ का कोई उत्‍तर नहीं मिला और बिजली भी न आई.. तो फिर शिवराज चौहान ने कहा कि कोयले का भी संकट है अभी। कल सुबह ही संजय से बात हुई तो कह रहे थे रैक ज्यादा दिलवा दो।

तो खुद शिवराज और उस सभा में बैठे अधिकारीगण जानते थे कि बिजली संकट गहरा रहा है। लेकिन मुख्‍यमंत्री के सार्वजनिक कार्यक्रम में ऐसे भी पोल खुलेगी कि अपने बयानों से छलनी करनेवाले विपक्ष को वो मौका दे बैठेंगे, शायद सोचा न होगा। खैर, कुछ देर में बिजली तो आ गई। माइक भी चालू हो गया और भाषण भी पूरा हो गया मगर पांच मिनट के अंधेरे ने प्रदेश के मुख्यमंत्री की कातर अवस्था और घर-घर छाए बिजली संकट का पर्दाफाश खुद मंच से जरूर कर दिया।

स्‍वच्‍छता की सफलता.. श्रेय लेने के मंच पर किरदारों की होड़ 

इंदौर के चर्चे पूरे देश में हैं। इस शहर ने एक नहीं पांच बार सबसे स्‍वच्‍छ शहर होने का खिताब जीता है। अब तो 2009 बैच के आईएएस अधिकारी इंदौर कलेक्टर मनीष सिंह को पीएम नरेंद्र मोदी भी पुरस्‍कृत कर चुके हैं। पहले इंदौर नगर निगम आयुक्त और अब कलेक्टर के तौर पर इंदौर को उत्कृष्ट बनाने में जुटे मनीष सिंह को सिविल सेवा दिवस के अवसर पर उत्कृष्ट कार्यों के लिए प्रधानमंत्री उत्कृष्टता पुरस्कार प्रदान किया गया है। 

इस पुरस्‍कार के बाद एक बार फिर कहा गया कि इंदौर की स्‍वच्‍छता और मनीष सिंह एक दूसरे के पर्याय बन गए हैं। कई बार सुर्खियां बनी हैं कि इंदौर यदि स्‍वच्‍छ हुआ है तो मनीष सिंह के कारण। मगर इस कहने के पीछे उन अधिकारियों का योगदान छूट गया जो 2014 के बाद इंदौर के कलेक्‍टर रहे हैं। इनमें से एक आईएएस पी. नरहरि भी हैं। इंदौर को याद दिलाने के लिए अपनी कोशिशों पर उन्होंने एक किताब लिख डाली।

इंदौर कलेक्‍टर रहते हुए अपने कार्य-अनुभव पर आधारित इस किताब ने फिर स्वछता अभियानवालों का ध्यान अपनी ओर खींचा। किताब यह बताने से नहीं चूकती कि कैसे इंदौर लगातार देश का सबसे स्वच्छ शहर बना हुआ है। और किताब को महत्व देता है उसकी प्रस्तावना लिखनेवाले सचिन तेंदुलकर का आलेख.. सचिन तेंदुलकर पीएम मोदी द्वारा 2014 में स्‍वच्‍छता ब्रांड एंबेसडर चुने गए थे त उनकी बातों को कोई नजरअंदाज़ भी नहीं कर सकता। 

लेकिन यह संयोग ही है कि जब पी. नरहरि की पुस्‍तक आई तभी कलेक्‍टर मनीष सिंह को शहर स्वच्छता का पुरस्‍कार मिला। मगर इस सफलता की रणनीति से सबको अवगत करवाने की दृष्टि से नरहरि की पुस्‍तक लोगों को इसकी नींव जमानेवालों की याद दिलाने की गरज से लिखी गई लगती है। अब इसे श्रेय लेने की होड़ ही माना जाएगा कि बात जब पुराने किरदारों की चली तो मनीष सिंह ने इस लकीर को और बढ़ा दिया.. पीछे की लाइन बढ़ाते हुए इसमें उन्होंने इंदौर के उन सभी कलेक्टरों को शामिल करा दिया जिनका कोई न कोई योगदान स्वच्छता आधार को मजबूत करने में रहा। 

और इस योजना को बल मिला सिविलि सेवा दिवस पर प्रधानमंत्री मोदी के संदेश से.. उन्होंने स्‍वच्‍छ शहर के पूर्व कलेक्‍टरों का सम्‍मेलन आयोजित करने की बात क्या कही, कलेक्‍टर मनीष सिंह इस दिशा में तत्काल सक्रिय हो गए। उनकी योजना कामयाब रही तो स्‍वच्‍छता की सफलता का जश्‍न मनाने पूर्व के सभी कलेक्‍टर इंदौर में जुटेंगे। साफ है इंदौर की सफलता का श्रेय बतौर पूर्व कलेक्‍टर अकेले पी. नरहरि के खाते में नहीं जाएगा जैसा किताब के कारण होता दिखाई दे रहा था।  

इस तरह कलेक्‍टर मनीष सिंह ने बड़ी कुशलता से अपनी रेखा बड़ी कर बतौर निगम आयुक्‍त और फिर कलेक्‍टर सफाई अभियान में अपने योगदान को रेखांकित करवाने की तैयारी कर ली है।

आईएएस की करोड़ों की जमीन लापता, कहां चलेगा बुलडोजर 

प्रदेश की राजनीतिक और प्रशासनिक गतिविधियों का अंदाजा लगाने के लिए जानकार लोग आईएएस बिरादरी की चाल पर नजर रखते हैं। आईएएस बिरादरी के बर्ताव को समझकर राजनीतिक मौसम का रुख पढ़ा जा सकता है। अभी देश में हर चीज बढ़ रही है चाहे वह महंगाई हो या अमीरी। मगर ऐसे खुशहाल दिनों में भी मध्‍य प्रदेश के कुछ आईएएस की संपत्ति घट गई है। कहा जा रहा है कि कल तक जिनके पास करोड़ों की जमीन थी वह आज ‘लापता’ है। 

यह हम नहीं कह रहे हैं बल्कि खुद आईएएस ने सरकार के सामान्‍य प्रशासन विभाग को यह जानकारी दी है। विभाग की वेबसाइट पर उपलब्ध जानकारी के विश्‍लेषण से पता चलता है कि प्रदेश के एसीएस मोहम्‍मद सुलेमान ने वर्ष 2020 में सहारनपुर यूपी में कृषि भूमि, नोएडा में फ्लैट और भोपाल में प्रेमपुरा में 1.20 करोड़ की जमीन बताई गई थी, लेकिन अब 2022  में दी गई जानकारी में भोपाल की जमीन का जिक्र ही नहीं किया गया है। नगरीय प्रशासन विभाग में पदस्‍थ निकुंज कुमार श्रीवास्तव ने बाग मुगालिया में 1 करोड़ की और कालापानी में 35 लाख की जमीन बताई थी लेकिन अब दिए गए विवरण में कालापानी की जमीन का जिक्र ही नहीं किया गया है। आईएएस गोपाल चंद डाड ने बताया है कि उनके इंदौर के फ्लैट की कीमत 65 लाख से घटकर 63 लाख हो गई है। 

जिन अफसरों ने अपनी संपत्ति में कमी बताई है उनमें से कुछ अफसरों की सूची में कीमती जमीनों का उल्‍लेख नहीं है। यह किसी को पता भी नहीं कि आखिर वह जमीन गायब कैसे हो गई। उसे बेच दिया गया या किसी अपने के नाम कर सुरक्षित हो जाया गया? 

26 आईएएस अफसर ऐसे हैं, जिन्होंने बीते साल नई संपत्ति खरीदी है। इनके द्वारा अधिकांश नई सम्पत्ति भोपाल में ही खरीदी गई है। लेकिन 76 आईएएस अफसरों ने अपने संपत्ति विवरण में निल लिखा है यानी उनके पास संपत्ति के नाम पर अभी कुछ नहीं है। 

सम्‍पत्ति को लेकर इन दिनों प्रदेश के दो वरिष्‍ठ आईएएस चर्चा में हैं। एक तो मुख्‍य सचिव इकबाल सिंह बैंस और दूजे पूर्व एसीएस राधेश्‍यान जुलानिया। दोनों पर बड़े तालाब के कैचमेंट क्षेत्र में अवैध रूप से बंगले बनाने का आरोप है। सवाल उठ रहे हैं कि अवैध निर्माण हटा रही बुलडोजर सरकार का बुलडोजर क्‍या अब इन आईएएस के कथित अवैध निर्माण पर चलेगा या बुलजडोजर मामा के होते हुए भी नियमों को बदलकर अवैध को वैध करवाने की अफसरी ठसक काम कर जा जाएगी?