दफ्तर दरबारी: सीएम मोहन यादव से लेकर टीचर तक, सब को एक तकलीफ

अटेंडेंस का मुद्दा ऐसा हो गया है कि सीएम से लेकर ठेठ गाँव में काम कर रहे शिक्षक तक परेशान है। इस समस्या को आईएएस सुधार सकते हैं लेकिन ब्यूरोक्रेसी को अपनी सुविधा की फिक्र है, मैदानी अमले के कष्टों की क्या परवाह?

Updated: Jul 04, 2026, 01:37 PM IST

ड्यूटी पर उपस्थिति का मुद्दा ऐसा नासूर बन गया है जिससे प्रदेश के मुखिया डॉ. मोहन यादव से लेकर दूर अंचल में बच्चों को पढ़ाने पहुंचने वाले शिक्षक तक परेशान हैं। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने जब अपनी घोषणाओं की समीक्षा करने के लिए बैठक की तो उनका एक सवाल प्रशासिनक अधिकारियों के लिए चुप्पी का सबब बन गया। सीएम डॉ. मोहन यादव ने बैठक में पूछ लिया कि 10 से 6 बजे का ऑफिस टाइम है ता मंत्रालय व सचिवालय में कर्मचारी-अधिकारी समय पर क्यों नहीं आते? मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा कि राजधानी के सरकारी दफ्तरों में बायो मैट्रिक सिस्टम से उपस्थिति दर्ज होनी चाहिए। 

यह जानकार अचरज हो सकता है कि मंडला, डिंडोरी, आलीराजपुर जैसे आदिवासी जिलों के दूरस्थ अंचलों में वहां सरकार ने शिक्षकों के लिए ई अटेंडेंस जरूरी कर दी है। ये वे इलाके हैं जहां नेटवर्क हमेशा मिलता नहीं है। दूसरी तरफ, सारी सुविधा होने के बाद भी राजधानी में बायो मैट्रिक सिस्टम की पुख्ता व्यवस्था नहीं बन पाई है।    

एक तरफ शिक्षक जनगणना ड्यूटी में लगे हुए हैं दूसरी तरफ कौशल परीक्षण के लिए शिक्षक पात्रता परीक्षा के आदेश हो चुके हैं। इस परीक्षा में फेल हुए तो बरसों पुरानी नौकरी जा सकती है। इसके साथ ही लोक शिक्षण संचालनालय के आदेश के बाद ई अटेंडेंस न होने पर शिक्षकों का वेतर काटा जा रहा है। शाजापुर में तो जिला शिक्षा अधिकारी ने आदेश दिया है कि ई अटेंडेंस नहीं होने पर भी जिन शिक्षकों को सेलेरी दे दी गई है वे उन तारीखों में अनुपस्थिति माने जाएंगे और उन्हें उन दिनों का वेतन लौटाना होगा। शिक्षकों पर कार्रवाई का समय सीमा में पालन नहीं करने पर संभागीय संयुक्त संचालक और जिला शिक्षा अधिकारीके खिलाफ भी अनुशासनात्मक कार्रवाई होगी।

शिक्षक संगठनों का कहना है कि सरकार दूसरे विभागों में सख्ती नहीं कर रही है, उसे केवल शिक्षक ही दिखाई देते हैं। समय पर स्कूल पहुंचने के बावजूद ऐप में उपस्थिति दर्ज नहीं होती है और उन्हें गैरहाजिर दिखा दिया जाता है। ऐप के माध्यम से हाजिरी लगाने में 10 से 15 मिनट की देरी आम बात है। शिक्षक मौजूद रहते हैं, लेकिन नेटवर्क की समस्या या सर्वर की धीमी गति के कारण लोकेशन सत्यापित नहीं हो पाती है। तय समय सीमा निकलने पर ऐप सीधे अनुपस्थित दर्शा देता है। शिक्षक पूरे समय विद्यालय में मौजूद रहते हैं। एक बार ऐप में गैरहाजिर दर्ज होने के बाद शिक्षकों के पास अपनी उपस्थिति साबित करने का कोई वैकल्पिक माध्यम भी नहीं है।

इस व्यवस्था के खिलाफ शिक्षक संगठन बीते कई दिनों से आवाज उठा रहे हैं। राज्य शिक्षक संघ के अध्यक्ष जगदीश यादव का कहना है कि प्रश्न केवल ई-अटेंडेंस का नहीं, बल्कि शिक्षक के आत्मसम्मान और शासन के विश्वास का है। सरकार की नीतियों के कारण शिक्षक हर नए आदेश के बाद स्वयं को संदेह के कठघरे में खड़ा महसूस कर रहा है। यदि उद्देश्य केवल व्यवस्था सुधार है तो फिर शिक्षकों में भय और भ्रम का वातावरण क्यों बनाया जा रहा है? 

साफ है कि अटेंडेंस के नियम ने शिक्षकों को परेशान कर रखा है तो सीएम डॉ. मोहन यादव कर्मचारियों की लेटलतीफी से नाराज है। इस परेशानी का हल ब्यूरोक्रेसी के पास है, अगर वह समाधान करना चाहे तो। 

सीएस बने तेलंगाना के, फोटो पर चर्चा भोपाल में

केंद्र सरकार ने प्रतिनियुक्ति खत्म कर आईएएस संजय जाजू को तेलंगाना का मुख्य सचिव बनाया है। इस नियुक्ति पर भोपाल में मिठाई बांटी गई क्योंकि आईएएस संजय जाजू का परिवार भोपाल में रहता है। वे भोपाल के कैंपियन स्कूल तथा फिर मेनिट (मौलाना आज़ाद राष्ट्रीय प्रौद्योगिकी संस्थान) से इंजीनियरिंग की है। परिवार के लिए यह खुशी का मौका था तो जश्न मना लेकिन बात यहीं नहीं रुकी। एक अखबार में बधाई का विज्ञापन भी छापा गया। 

विज्ञापन में आईएएस जाजू की मध्यप्रदेश के सीएम डॉ. मोहन यादव के साथ फोटो छापी गई। यही फोटो चर्चा का कारण बन गया। तेलंगाना में कांग्रेस सरकार है, वहां के सीएम की जगह मध्यप्रदेश की बीजेपी सरकार के सीएम डॉ. मोहन यादव की तस्वीर होने के अपने राजनीतिक एंगल हैं। आईएएस संजय जाजू को हालांकि तेलंगाना सरकार के आग्रह पर प्रतिनियुक्ति खत्म कर भेजा गया है मगर माना जा रहा है कि वे केंद्र सरकार के विश्वस्त हैं और उनका होना कांग्रेस सरकार पर केंद्र के नियंत्रण की तरह होगा। बीजेपी सरकार के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के साथ फोटो इस धारणा को पुष्ट करती महसूस होती है। 

सीएस अनुराग जैन का मिजाज बदलने का राज

मध्यप्रदेश के मुख्य सचिव अनुराग जैन अपनी सख्त छवि के कारण चर्चा में रहते हैं। जब पद संभाला था तब अनुराग जैने ने सख्त व्यवहार ही दिखा कर प्रशासनिक कसावट की कोशिश की थी। बीते कुछ समय से उनका व्यवहार नरम सा है। मंत्रालय के गलियारों में कानाफूसी भी है कि बदले-बदले से सरकार नजर आते हैं, मगर सीएस अनुराग जैन का बदला सा बर्ताव अधीनस्थों को यह चौंका भी नहीं रहा है। 

सब अपनी तरह से कयास लगा रहे हैं। इन सारे कयासों की दिशा एक ही है, अनुराग जैन की विदाई। आईएएस अनुराग जैन अगस्त में रिटायर हो रहे है। अनुराग जैन मध्यप्रदेश आने के पहले दिल्ली में प्रतिनियुक्ति पर थे और वे पीएम नरेंद्र मोदी के पसंदीदा अफसरों में शुमार होते हैं। यदि अब उन्हें मध्यप्रदेश के मुख्यसचिव के रूप में एक्सटेंशन नहीं मिलता है तो संभव है कि दिल्ली में उनका पुनर्वास हो सकता है। जाहिर है कोई भी अफसर अच्छे व्यवहार की यादों के साथ विदाई चाहता है। आईएएस अनुराग जैन के व्यवहार में आए परिवर्तन को इसी दृष्टि से देखा जा रहा है। 

तबादले के बाद ज्यादा वायरल हुए पति–पत्नी

नक्सलियों के खात्मे के लिए गठित हॉर्क फोर्स के डीएसपी संतोष पटेल और उनकी पत्नी रोशनी पटेल इंटरनेट सनसनी हैं। बीते दिनों पत्नी रोशनी की एक भावुक पोस्ट की थी। रोशनी पटेल ने लिखा था, बालाघाट में नक्सल क्षेत्र में नियम हैं कि वहां 1 साल की ड्यूटी होगी लेकिन मेरे पतिदेव को ड्यूटी करते हुए 1 साल 5 माह हो गए हैं। अभी भी ट्रांसफर की कोई सूचना तक नहीं है।बच्चों की पढ़ाई का टाइम आ गया है। स्कूल में एडमिशन करवाना है। मां बीमार है, उनकी टाइम से दवाइयां नहीं हो पाती हैं। मेरे जैसी कई पत्नियां इंतजार कर रही हैं कि अपने परिवार के साथ रहें। सरकार से निवेदन है कि जल्द से जल्द ट्रांसफर करवाए। 

इस पोस्ट के एक सप्ताह के अंदर ही डीएसपी संतोष पटेल का भोपाल तबादला हो गया है। रोशनी पटेल ने इसके बाद पोस्ट कर हनुमान जी, शंकर भगवान सहित पुलिस प्रशासन व सरकार को धन्यवाद दिया। तबादले के बाद बाद डीएसपी संतोष पटेल बैगा समुदाय से मिली विदाई के वीडियो पोस्ट कर अपने भाव व्यक्त कर रहे हैं। डीएसपी संतोष पटेल और उनकी पत्नी रोशनी पटेल पहले भी सोशल मीडिया पर अपनी पोस्ट के कारण चर्चा में रहे हैं लेकिन जाता घटनाक्रम के बाद दोनों की पोस्ट ज्यादा वायरल होने लगी है।