Raksha Bandhan 2020: राखी पर विशेष संयोग देंगे शुभ फल

3 Aug 2020: 29 साल बाद दुर्लभ संयोग का दिन, श्रावण पूर्णिमा के दिन सुबह 9.30 बजे से रात 9.17 तक है राखी बांधने का शुभ मुहूर्त

Updated: Aug-02, 2020, 08:16 AM IST

Raksha Bandhan 2020: राखी पर विशेष संयोग देंगे शुभ फल

भोपाल। इस वर्ष तीन अगस्त सोमवार को रक्षाबंधन का पावन पर्व मनाया जाएगा। इस साल रक्षा बंधन के दिन विशेष संयोग बन रहा है। इस साल राखी के दिन सावन का अंतिम सोमवार,श्रावण पूर्णिमा और श्रवण नक्षत्र का महासंयोग बन रहा है जिसे बहुत ही उत्तम संयोग माना जाता है। यह संयोग रक्षा बंधन पर लाभदायक सिद्ध होगा।

पंडित बनवारी लाल मिश्र के अनुसार श्रावणी पूर्णिमा के मौके पर तीन विशेष संयोग बनने से बहन-भाइयों को विशेष लाभ की प्राप्ति होगी। रक्षाबंधन के दिन प्रीति योग, आयुष्मान योग और सर्वार्थ सिद्धि योग भी पड़ रहे हैं। दिन का आरंभ सर्वार्थ सिद्धि योग में होगा। ऐसा 29 साल बाद हो रहा है कि राखी सावन महीने के आखिरी सोमवार को पड़ रही है। और तीन विशेष शुभ संयोग के साथ मनाई जाएगी।

3 अगस्त को सोमवार के दिन सुबह 6:51 बजे से ही सर्वार्थ सिद्धि योग शुरू हो रहा है। इस योग को बहुत ही शुभ फलदाई माना जाता है। रक्षा बंधन पर प्रातः उत्तराषाढ़ा नक्षत्र और 7:18 बजे से श्रवण नक्षत्र रहेगा। रक्षाबंधन पर भद्रायोग सुबह 9.30 पर ही समाप्त हो जाएगा। जिससे पूरे दिन राखी बांधने का समय रहेगा।

रक्षा बंधन का शुभ महूर्त,देगा शुभफल

सावन पूर्णिमा को सुबह 9.30 मिनट के बाद किसी भी समय राखी बांधी जा सकती है। रक्षा बंधन का अति फलदायक शुभ मुहूर्त दोपहर 01.48 बजे से शाम 04.29 बजे तक रहेगा।  

  • राखी बांधने का मुहूर्त: सुबह 09:30 से 21:11 तक
  • रक्षा बंधन दोपहर : 13:45 से 16:23 तक
  • रक्षा बंधन प्रदोष मुहूर्त : 19:01 से 21:11 तक

कैसे सजाएं राखी की थाली

श्रावणी पूर्णिमा पर बहनें अपने भाईयों की कलाई पर राखी बांधकर उनके खुशहाल जीवन की मंगल कामना करती हैं। भाई भी अपनी बहनों को उनकी रक्षा का वचन देते हैं। इस मौके पर सबसे पहले राखी की थाल सजा लें। जिसमें रोली, चंदन, अक्षत, नारियल, राखी और मिठाई रखें। घी का दीपक जलाएं, राखी और पूजा की थाल सबसे पहले भगवान को समर्पित करें।

भाई को पूर्व या उत्तर दिशा की तरफ मुंह करके बैठाएं। भाई के माथे पर अनामिका उंगली से टीका लगाकर अक्षत लगाना चाहिए। अक्षत अखंड शुभता का प्रतीक है। तिलक लगाने के बाद रक्षा सूत्र बांधें और भाई की आरती करें। इसके बाद भाई का मुंह मीठा करें। इस बात का खास ख्याल रखें कि राखी बांधते वक्त भाई और बहन का सिर ढंका होना चाहिए।

इंद्राणी ने बांधी थी देवताओं को राखी

पौराणिक कथा के अनुसार एक बार देवताओं और असुरों में युद्ध आरंभ हो गया था। जिसमें देवताओं को हार की स्थिति समझ आ रही थी। तब इंद्र की पत्नी इन्द्राणी ने देवताओं के हाथ में रक्षा सूत्र बांधा था। जिससे देवताओं की विजय हुई। मान्यता है कि यह रक्षा विधान श्रावण मास की पूर्णिमा तिथि पर ही शुरू किया गया था।

लोक मान्यता के अनुसार, राखी बांधने समय भद्रा नक्षत्र नहीं होना चाहिए। कहा जाता है कि रावण की बहन ने भद्राकाल में ही उसे राखी बांधी थी। जिसके बाद उसका नाश हो गया था।  पुराणों के अनुसार भद्रा भगवान सूर्य देव की पुत्री और शनि की बहन है। शनि की तरह ही इसका स्वभाव भी तेज माना गया है। उनके स्वभाव को नियंत्रित करने के लिए ही भगवान ब्रह्मा ने उन्हें कालगणना या पंचाग के एक प्रमुख अंग विष्टी करण में स्थान दिया। भद्रा नक्षत्र की स्थिति में किसी भी शुभ कार्य, यात्रा जैसे कार्य निषेध माना जाता। 

भाई से दूर हों तो भगवान कृष्ण को बांधे राखी

 कोरोना के कारण दूर रह रहे भाई-बहनों का रक्षाबंधन पर मिलना कठिन है। ऐसे में बहनें भगवान कृष्‍ण को अपना भाई मानकर उन्‍हें राखी भेंट कर सकती हैं। भगवान कृष्‍ण की पूजा कर उनकी तस्‍वीर के सामने राखी रख दें और भाई के लिए मंगल कामना करें।