Hockey India: रिटायर्ड खिलाड़ी जूनियरों को देंगे कोचिंग

दो दर्जन से ज़्यादा रिटायर्ड हॉकी खिलाड़ी हॉकी इंडिया और इंटरनेशनल हॉकी फेडरेशन के जरिए सीख रहे हैं खेल के नए गुर

Updated: Jul-31, 2020, 12:11 PM IST

Hockey India: रिटायर्ड खिलाड़ी जूनियरों को देंगे कोचिंग
photo courtesy : business standard

नई दिल्ली। भारतीय हॉकी टीम की तरफ से हॉकी खेलने वाले ज़्यादातर खिलाड़ी अब जूनियर हॉकी खिलाड़ियों को कोचिंग देंगे। दो दर्जन से ज़्यादा हॉकी खिलाड़ी हॉकी इंडिया और इंटरनेशनल हॉकी फेडरेशन के माध्यम से हॉकी के नए आयाम और गुर सीख रहे हैं। ये सभी खिलाड़ी वे हैं जो पिछले दशक इस खेल को अलविदा कह चुके हैं। अब चूंकि खेल में अपने जूनियरों को कुछ नया दे सकें इसलिए वे कोच की उपाधि पाने हेतु प्रमाणन प्रक्रिया से गुज़र रहे हैं। 

हर चार पांच साल में बदल रही है हॉकी 
भारतीय हॉकी टीम के स्टार खिलाड़ी रहे तुषार खांडकेर ने एक अंग्रेज़ी अख़बार से बात करते हुए कहा कि अब हॉकी में हमारे समय की तुलना में काफी बदलाव आ गए हैं। हमारे समय में हॉकी खेलने के जो तरीके अचंभित कर देने वाले होते थे, वो सभी तरीके आज बेसिक स्किल बन चुके हैं। हॉकी का खेल अब हर चार से पांच साल में खेल बिल्कुल ही बदल रहा है। हॉकी खेलने का तरीका, खेल की ज़रूरतें सब बड़ी रफ्तार से बदल रही हैं। खांडकेर ने कहा है कि पिछले पांच दशकों में दुनिया की तुलना में भारतीय हॉकी बदलावों के साथ कदम ताल मिलाने में काफी पीछे रहा है। 

ज़ाहिर है हॉकी में आए बदलाव के प्रति अपने जूनियरों को प्रशिक्षित करने के लिए पूर्व खिलाड़ी खांडकेर के साथ साथ दो दर्जन से ज़्यादा पूर्व खिलाड़ी प्रशिक्षण ले रहे हैं। हॉकी टीम में खांडकेर के साथी दीपक ठाकुर, प्रभजोत सिंह, देवेश चौहान, शिवेंद्र सिंह सरीखे खिलाड़ी भारतीय हॉकी के कोचिंग के स्वरूप को बदलने के लिए प्रशिक्षण ले रहे हैं, ताकि नए खिलाड़ियों को हॉकी के आयामों ने अवगत कराया जा सके।

भारतीय हॉकी को जागने में काफी देर लगी है 
हॉकी इंडिया के परफॉर्मेंस डायरेक्टर जॉन डेविस का कहना है कि इस खेल के ज़्यादातर कड़ियों को पकड़ने और समझने में भारतीय हॉकी को काफी देर लगी है। पूर्व खिलाड़ियों को कोचिंग के क्षेत्र में उतारने में भारतीय हॉकी काफी देर से जागा है। जॉन ने एक अंग्रेज़ी अख़बार को बताया कि नीदरलैंड जैसे देश में तो राष्ट्रीय टीम के खिलाड़ी हॉकी खेलने के दौरान ही जूनियर खिलाड़ियों को प्रशिक्षित करने का काम करते हैं। कुछ ऐसा ही ऑस्ट्रेलिया में भी है। भारत को इसकी महत्ता समझने में काफी देर लगी है। जॉन डेविस ने ऑस्ट्रेलियन खिलाड़ी क्रिस सिलेरियो का उदाहरण देते हुए बताया कि ऑस्ट्रेलिया जैसे देशों में हॉकी खिलाड़ियों का विभिन्न राष्ट्रीय टीमों का प्रशिक्षण देना आम बात है। ज्ञात हो कि क्रिस सिलेरियो अभी भारतीय हॉकी पुरुष टीम के एनालिटिकल कोच हैं। सिलेरियो 2016 ओलंपिक में ऑस्ट्रेलियाई हॉकी टीम के खिलाड़ी रह चुके हैं। 

घरेलू खिलाड़ियों को एक कोच के तौर पर नहीं देखा गया 
जॉन डेविस भारतीय हॉकी टीम के लगातार गिरते प्रदर्शन के ग्राफ की सबसे बड़ी वजह इसे ही मानते हैं कि भारतीय हॉकी ने घरेलू खिलाड़ियों को एक कोच के तौर पर नहीं देखा गया। जॉन ने भारतीय हॉकी टीम के पिछले हेड कोच ग्राहम रिड का उदाहरण देते हुए बताया कि पिछले 25 वर्षों में ग्राहम भारतीय हॉकी टीम के 26 वें कोच थे। इससे समझा सकता है कि भारतीय हॉकी के पास घरेलू खिलाड़ियों की एक फौज नहीं है जो अपने खिलाड़ियों को प्रशिक्षित कर सके।