मध्य प्रदेश ने रचा इतिहास, 41 बार की चैंपियन मुंबई को हराया, पहली बार किया रणजी ट्रॉफी अपने नाम

रणजी ट्रॉफी 2021-22 का फाइनल मुकाबला जीतकर मध्य प्रदेश की टीम ने इतिहास रच दिया है, मध्य प्रदेश की टीम ने फाइनल मुकाबले में मुंबई को छह विकेट से शिकस्त दी, मध्य प्रदेश की टीम 88 सालों के इतिहास में पहली बार रणजी चैंपियन बनी है

Updated: Jun 26, 2022, 04:10 PM IST

मध्य प्रदेश ने रचा इतिहास, 41 बार की चैंपियन मुंबई को हराया, पहली बार किया रणजी ट्रॉफी अपने नाम

बेंगलुरु। मध्य प्रदेश की क्रिकेट टीम ने रणजी ट्रॉफी जीतकर इतिहास रच दिया है। मध्य प्रदेश की टीम ने फाइनल मुकाबले में 41 बार की चैंपियन मुंबई को छह विकेट से शिकस्त दी। मध्य प्रदेश की टीम 88 सालों के इतिहास में पहली बार रणजी चैंपियन बनी है। 

मध्य प्रदेश की इस प्रचंड जीत पर बधाइयों का तांता लग गया है। मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने कहा कि, 'पहली बार कई बार की विजेता मुंबई को हराकर मध्य प्रदेश की टीम ने रणजी ट्रॉफी जीत कर कमाल कर दिया है। हम सब गदगद, प्रसन्न और भावविभोर हैं। मैं टीम के चंद्रकांत पंडित, कप्तान आदित्य श्रीवास्तव एवं समस्त टीम को हार्दिक बधाई एवं शुभकामनाएं देता हूं। पूरी क्रिकेट टीम का राजधानी भोपाल में भव्य स्वागत व नागरिक अभिनंदन किया जाएगा। क्रिकेट का एक नया इतिहास रचने वाले हमारे क्रिकेट- वीर रणबाकुरों का भव्य स्वागत होगा।'

पीसीसी चीफ कमलनाथ ने कहा कि, 'मध्यप्रदेश की क्रिकेट टीम ने पहली बार रणजी ट्रॉफी जीतकर नया इतिहास रचा है। इस शानदार जीत पर पूरे मध्यप्रदेश को हमारी टीम पर गर्व है। सभी खिलाड़ियों को इस शानदार जीत की बहुत-बहुत बधाई।'

बता दें कि पांचवें दिन के शुरुआती सत्र में ही मुंबई ने अपने बाकी आठ विकेट गंवा दिए, जिसके चलते मुंबई की दूसरी पारी 269 रनों पर सिमट गई। मुंबई के लिए दूसरी पारी में सुवेद पारकर ने सबसे ज्यादा 51 रनों का योगदान दिया।  वहीं टीम के लिए सरफराज ने 45 और कप्तान पृथ्वी शॉ ने 44 रनों की पारी खेली। 

मध्य प्रदेश की ओर से कुमार कार्तिकेय ने सबसे ज्यादा चार विकेट चटकाए। 108 रनों के टारगेट को एमपी ने आसानी से हासिल कर लिया। एमपी के लिए दूसरी पारी में हिमांशु मंत्री ने सबसे ज्यादा 37 रनों का योगदान दिया। वहीं शुभम शर्मा और रजत पाटीदार ने 30-30 रनों की पारियां खेली। 

मध्य प्रदेश की टीम को पहली बार खिताब दिलाने में पांच खिलाड़ियों की भूमिका अहम रही। इनमें किसी को पहली बार टीम की कप्तानी करने का मौका मिला, तो किसी ने पहली बार पारी की शुरुआत की। लेकिन, सभी ने शानदार प्रदर्शन किए और नतीजा मध्य प्रदेश की टीम 88 साल में पहली बार खिताब जीतने में सफल रही। इस जीत के लिए चंद्रकांत पंडित की खूब सराहना हो रही है। मध्य प्रदेश की टीम साल 1999 में चंद्रकात पंडित की कप्तानी में फाइनल तक पहुंची थी, जहां कर्नाटक ने 96 रनों से हरा दिया था। चंद्रकात पंडित फिलहाल एमपी के हेड कोच हैं।