भारतीय सेना ने 5 महिला अफसरों को कर्नल रैंक पर किया प्रमोट, ऐतिहासिक फैसले के तहत 26 साल की सेवा पूरी करने पर मिला प्रमोशन

सेना में कर्नल बनीं 5 महिला अफसर, लेफ्टिनेंट कर्नल संगीता सरदाना, सोनिया आनंद, नवनीत दुग्गल, रीनू खन्ना और रिचा सागर ने रचा इतिहास

Updated: Aug 24, 2021, 11:39 AM IST

भारतीय सेना ने 5 महिला अफसरों को कर्नल रैंक पर किया प्रमोट, ऐतिहासिक फैसले के तहत 26 साल की सेवा पूरी करने पर मिला प्रमोशन
Photo Courtesy: The Hindu

भारतीय सेना के इतिहास में यह पहला मौका है जब 3 ब्रांच में महिलाओं का प्रतिनिधित्व बढ़ाने के लिए कर्नल रैंक पर प्रमोशन दिया गया है। भारतीय सेना में महिलाओं का प्रतिनिधित्व लगातार बढ़ रहा है। अब 5 महिलाओं को लेफ्टीनेंट कर्नल की रैंक से कर्नल  रैंक पर प्रमोट किया गया है।  जिन 5 महिला अफसरों कर्नल बनने का मौका मिला है, उन्होंने सेना में अपनी सर्विस के  26 साल  पूरे कर लिए हैं।  
भारतीय सेना के चयन बोर्ड ने  कॉर्प्स ऑफ सिग्नल्स, कॉर्प्स ऑफ इलेक्ट्रॉनिक्स एंड मैकेनिकल इंजीनियर (EME) और कॉर्प्स ऑफ इंजीनियर्स में सर्विस दे रहीं 5 महिला अफसरों को कर्नल रैंक पर पदोन्नत किया है। भारत के इतिहास में  यह पहला मौका है जब इन ब्रांच में महिला अधिकारियों को कर्नल पद पर प्रमोट करने की मंजूरी प्रदान की गई है।
कर्नल रैंक पाने वाली महिला अफसरों में  कोर ऑफ सिग्नल से लेफ्टिनेंट कर्नल संगीता सरदाना, EME कोर से लेफ्टिनेंट कर्नल सोनिया आनंद और लेफ्टिनेंट कर्नल नवनीत दुग्गल और कोर ऑफ इंजीनियर्स से लेफ्टिनेंट कर्नल रीनू खन्ना और लेफ्टिनेंट कर्नल रिचा सागर को चुना गया है।

इंजीनियरिंग कोर में प्रमोशन से पहले केवल 3 ब्रांच में महिलाओं को कर्नल रैंक दी जाती थी।  मेडिकल कोर, लीगल और एजुकेशन कोर की महिला अफसरों  के लिए परमानेंट कमिशन था। दरअसल सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद महिला अफसरों को अब उन सभी ब्रांच में परमानेंट कमिशन मिल सकता है,   जिनमें वह शॉर्ट सर्विस कमिशन के तहत आई हैं।

कुछ दिनों पहले सुप्रीम कोर्ट के एक अंतरिम आदेश के तहत महिलाओं को NDA में एंट्रेंस एग्जाम देने की परमीशन मिली थी। पहले नेशनल डिफेंस अकादमी एंट्रेस एक्जाम में केवल पुरुषों के शामिल होने की परमीशन थी।  केंद्र की तरफ से अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल ऐश्वर्या भाटी ने तर्क दिया कि यह सरकार का नीतिगत निर्णय है। केंद्र की दलील से असहमत, जस्टिस संजय किशन कौल और हृषिकेश रॉय की पीठ ने कहा कि यह लैंगिक भेदभाव पर आधारित एक नीतिगत निर्णय है, केंद्र को रचनात्मक दृष्टिष्टिकोण रखना चाहिए।