सामिया हसन ने रचा इतिहास, तंजानिया की पहली महिला राष्ट्रपति बनीं

तंजानिया की पहली महिला राष्ट्रपति के तौर पर सामिया सुलुहु हसन ने शपथ ली, जॉन मैगुफुली के अचानक निधन के बाद बनीं राष्ट्रपति, पहले संबोधन में देश की जनता से एकजुट होने की अपील

Updated: Mar 19, 2021, 05:44 PM IST

सामिया हसन ने रचा इतिहास, तंजानिया की पहली महिला राष्ट्रपति बनीं
Photo Courtesy: twitter

तंजानिया की उपराष्ट्रपति सामिया सुलुहु हसन देश की पहली महिला राष्ट्रपति बन गई हैं। शुक्रवार को उन्होंने पद और गोपनीयता की शपथ ली। वे देश की छठी राष्ट्रपति हैं। सुलुसु राष्ट्रपति जॉन मैगुफुली के अचानक निधन के बाद पूर्वी अफ्रीकी देश तंजानिया की पहली महिला राष्ट्रपति बनीं है। उन्होंने कुरान हाथ में लेकर राष्ट्रपति पद और गोपनीयता की शपथ ली और देश के संविधान की रक्षा करने की कसम खाई।उन्होंने शपथ ग्रहण के दौरान हिजाब पहन रखा था, उन्हें मुख्य न्यायाधीश इब्राहिम जुमावोइंग ने शपथ दिलाई। 

सौम्य और सॉफ्ट स्पोकन सामिया सुलुहु हसन का नाम एक ही दिन में पूरी दुनिया में फेमस हो गया है। सुलुहु ने दार-अस-सलाम के सरकारी कार्यालय में राष्ट्रपति पद की शपथ ली। वे 2025 तक तंजानिया के सर्वोच्च पद पर आसीन रहेंगी। राष्ट्रपति बनते ही अपने पहले संबोधन में उन्होंने देश के लोगों से आपसी मतभेद भुलाकर एकजुट होने की अपील की। उन्होंने कहा कि यह हमारे मतभेदों को दफनाने और एक देश के रूप में एकजुट होने का समय है।


शपथ ग्रहण के मौके पर तंजानिया के मुख्य न्यायाधीश और मंत्रिमंडल के सदस्य मौजूद थे। तंजानिया के पूर्व राष्ट्रपति अली हसन मवेनी, जकया किवेटे और अबीद कयूम भी शपथ ग्रहण के कार्यक्रम में शामिल हुए। सुलुहु हसन ज़ांज़ीबार द्वीप की निवासी हैं। उनके राजनीतिक करियर की शुरुआत साल 2000 में हुई। वे कई मंत्री पदों पर रह चुकी हैं। 2014 में सुलुहु हसन संवैधानिक सभा की उपाध्यक्ष चुनी गई थीं। इसके तुरंत बाद 2015 के आम चुनाव में वे उपराष्ट्रपति बनीं।

ऐसी अटकलें हैं कि तंजानिया के पिछले राष्ट्रपति जॉन मगुफुली की तबीयत कोरोना संक्रमण की वजह से बिगड़ी थी। हालांकि उनके कोरोना संक्रमित होने की आधिकारिक पुष्टि नहीं की गई। उन्हें 27 फरवरी के बाद से किसी सार्वजनिक कार्यक्रम में देखा नहीं गया था। मगुफुली तेजतर्रार नेता थे, जिन्हें आक्रामक लीडरशिप स्टाइल के लिए जाना जाता था। सड़क निर्माण में भ्रष्टाचार के खिलाफ लड़ाई लड़ने की वजह से समर्थकों ने प्यार से उनका नाम बुल्डोजर रख दिया था।