झीरम कांड की 9वीं बरसी, बस्तर में शहीद मेमोरियल जनता को समर्पित, आज भी हरे हैं नरसंहार के जख्म

झीरम घाटी कांड छत्तीसगढ़ के लिए एक अंतहीन दर्द की तरह है, इस नरसंहार के 9 साल पूरे हो गए हैं, लेकिन अब भी झीरम के जख्म हरे हैं

Updated: May 25, 2022, 04:31 PM IST

झीरम कांड की 9वीं बरसी, बस्तर में शहीद मेमोरियल जनता को समर्पित, आज भी हरे हैं नरसंहार के जख्म

बस्तर। छत्तीसगढ़ में बुधवार 25 मई को 'झीरम श्रद्धांजलि दिवस' के रूप में मनाया जा रहा है। प्रदेश के मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने इस मौके पर बस्तर के चित्रकोट में झीरम शहीद स्मारक का लोकार्पण कर झीरम के शहीदों को श्रद्धांजलि दी। बस्तर की झीरम घाटी में 9 साल पहले आज ही के दिन 25 मई 2013 को छत्तीसगढ़ का सबसे बड़ा नरसंहार हुआ था। झीरम नक्सली कांड में छत्तीसगढ़ कांग्रेस की पूरी लीडरशिप खत्म हो गई थी।

शहीद मेमोरियल हत्याकांड के दौरान मारे गए 32 कांग्रेस नेताओं की याद में झीरम घाटी शहीद मेमोरियल स्थापित किया गया है। इसके साथ ही लोकतंत्र पर सबसे बड़े हमले में शहीदों की याद में आम जनता को समर्पित है। घटना में जान गंवाने वाले शहीदों के परिजनों से मुख्यमंत्री मिले। शहीदों के परिजनों की हिम्मत और हौंसले की तारीफ की। साथ ही हर सुख-दुख में साथ रहने का किया वादा किया। परिजनों को शाल, श्रीफल और पौधा के रूप में झीरम स्मृति चिन्ह दिया। 

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इस दौरान सीएम भूपेश बघेल ने बीजेपी पर खुलकर आरोप लगाए। उन्होंने कहा कि भाजपा झीरम कांड की जांच को रोकने में लगी हुई है। वहीं प्रदेश कांग्रेस के प्रभारी सचिव चंदन यादव ने कहा कि जिन वजहों से हमारे नेताओं की शहादत हुई है, उसकी सच्चाई को सामने लाने के लिए कांग्रेस की सरकार पूरी तरह से प्रतिबद्ध है। भाजपा को दिवंगत नेताओं के नाम पर राजनीति नहीं करनी चाहिए। आज के दिन हम राजनीतिक बातें नहीं करेंगे, वे हमारे प्रेरणा श्रोत हैं, जिसे लेकर हम आगे बढ़ रहे हैं।

बता दें कि 25 मई 2013 को कांग्रेस ने परिवर्तन यात्रा निकाली थी। कांग्रेस के नेता और कार्यकर्ता इस परिवर्तन यात्रा में हिस्सा लेते हुए दरभा घाटी के झीरम पहुंचे थे कि तभी नक्सलियों ने कांग्रेस नेताओं के काफिले पर हमला कर दिया। अचानक हुए हमले में कांग्रेस नेताओं और उनके सुरक्षा गार्ड को संभलने का मौका तक नहीं मिला। नक्सलियों ने कांग्रेस नेता महेंद्र कर्मा को ढूंढकर गोली मारी। उसके बाद नक्सलियों ने एक एक कर छत्तीसगढ़ कांग्रेस के नेताओं को मौत के घाट उतार दिया।

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इस हमले में महेंद्र कर्मा के अलावा तत्कालीन कांग्रेस अध्यक्ष नंदकुमार पटेल, उदय मुदलियार समेत कांग्रेस के 29 नेताओं की मौत घटनास्थल पर ही हो गई थी। इलाज के दौरान पूर्व केंद्रीय मंत्री विद्याचरण शुक्ल की भी जान चली गई थी। इस नरसंहार के 9 साल पूरे हो गए हैं। लेकिन अब भी झीरम के जख्म हरे हैं। आंसुओं और दर्द में आज भी झीरम के पीड़ित डूबे हैं। उनकी सुध लेने वाला कोई नहीं है। दूसरी ओर इस घटना पर राजनीति लगातार जारी है। यही वजह है कि 9 साल बाद भी हम झीरम के गुनहगार तक नहीं पहुंच पाए हैं।