MP: मक्का की फसल तैयार, सुध नहीं ले रही है शिवराज सिंह सरकार 

Maize Crop in MP: मध्य प्रदेश में मक्का उपजा कर किसान दर दर की ठोकरें खाने पर मजबूर, मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान तक नहीं पहुंच रही किसानों की आवाज़

Updated: Sep 01, 2020 10:06 AM IST

MP: मक्का की फसल तैयार, सुध नहीं ले रही है शिवराज सिंह सरकार 

भोपाल। मध्यप्रदेश में मक्का की फसल पक कर तैयार है। मक्का किसान अब अपने फसल की बिक्री और उचित दाम प्राप्त करने की राह देख रहे हैं। लेकिन अब तक न तो सरकार ने न्यूनतम समर्थन मूल्य तय किया है और न ही कोई ऐसी सूचना है कि जिससे यह पता चल पाए कि सरकार उनके फसल की खरीदी करने पर विचार कर रही है। 

इस समय मक्का के किसान अपनी फसल औने पौने दाम पर बेचने के लिए तैयार हैं। प्रति क्विंटल मक्के पर किसानों को लगभग 1300 रुपए की लागत लगती है। मक्का के किसान 1700 रुपए प्रति क्विंटल अपने फसल की एमएसपी निर्धारित करने की मांग कर रहे हैं। लेकिन किसानों को महज़ 700 रुपए प्रति क्विंटल की दर पर अपनी फसल बेचनी पड़ रही है। प्रदेश के किसानों के पास ऐसी परिस्थिति में घाटा सेहने के अलावा और कोई दूसरा चारा नहीं है। 

मक्का के किसान इस समय दर दर की ठोकरें खाने पर मजबूर हैं। उनकी आवाज़ को प्रदेश के मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान तक पहुंचाने के लिए खुद पूर्व मुख्यमंत्री कमल नाथ कई बार लिख चुके हैं। कमल नाथ ने कई बार शिवराज सिंह चौहान को मक्का के किसानों की स्थिति से अवगत कराया है। लेकिन सरकार है कि किसानों की सुध लेने को तैयार ही नहीं है।

किसानों की समस्या के लिए कितनी ज़िम्मेदार है केंद्र सरकार?

ऐसा नहीं है कि मक्का के किसानों की इस स्थिति की ज़िम्मेदार केवल राज्य सरकार है। केन्द्र सरकार भी कमोबेश वही किरदार निभा रही है, जिससे मक्का के किसानों को आर्थिक दंश झेलते रहने पर मजबूर होना पड़ रहा है। ऐसा भी नहीं है कि किसानों के लिए यह समस्या तत्कालिक है।

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दरसअल केन्द्र सरकार का एक फैसला है जो कि मक्का के किसानों की समस्या को पूर्ण कालिक बना देगा। हाल ही में सरकार ने विदेश से 5 लाख टन मक्के का आयात करने का निर्णय लिया है। सरकार विदेश से मक्के की खरीदी महज़ 15 फीसदी के आयात शुल्क पर करेगी। इससे भारत में मक्का की खेती करने वाले किसानों को काफी बड़े स्तर पर नुकसान होगा। मक्का का इतने कम शुल्क पर आयात होने से भारत के किसानों के लिए मुश्किलें खड़ी हो जाएंगी। अमूमन भारत में मक्के का आयात 60 फीसदी के आयात शुल्क पर किया जाता है, लेकिन अब महज़ 15 फीसदी पर मक्के का आयात किसानों के लिए परेशानी का सबब बन जाएगा।

मक्के का सबसे बड़ा आयातक बन गया भारत

कुछ वर्षों पहले तक भारत दक्षिण पूर्वी एशिया में मक्के सबसे बड़ा उत्पादक था। भारत से बड़ी संख्या में मक्के का निर्यात होता था। लेकिन हाल के वर्षों में भारत में मक्का के उत्पादन में गिरावट देखने को मिली है। जिस वजह से एक समय में विश्व भर में मक्के का सबसे बड़े निर्यातकों में से एक रहा भारत अब मक्के का आयात कर रहा है। आंकड़ों की तरफ नज़र डालें तो महज़ एक वर्ष में मक्के की आयात में भारी इज़ाफ़ा देखने को मिला है। केवल 2019 में भारत ने 3 लाख 12 हज़ार 389 टन मक्के का आयात किया जबकि इसके पिछले साल भारत ने इसके दसवें हिस्से तक का आयात नहीं किया था। 2018 में भारत ने महज़ 30 हज़ार 962 टन मक्का आयात किया था। 

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मक्के का आयात किसानों के लिए मुश्किलें खड़ी कर देगा

मक्के का इतने कम शुल्क पर आयात, मक्के की खेती करने वाले किसानों को परेशानी में डालने वाला निर्णय साबित होगा। ज्ञात हो कि देश भर में मक्का किसान पहले ही मक्के पर न्यूनतम समर्थन मूल्य प्राप्त करने के लिए तरस रहे हैं। मक्के की पैदावार करने में प्रति क्विंटल 1300 रुपए की लागत लगती है। किसान मक्के की 1700 रुपए प्रति क्विंटल पर खरीदी की मांग कर रहे हैं। लेकिन भाव के गिर जाने से पहले ही किसानों को मक्का अपनी लागत से भी कम मूल्य पर बेचना पड़ रहा है। ऐसे में सरकार द्वारा मक्का बाहर से इतने कम शुल्क पर आयात करने का लिया गया यह निर्णय किसी भी तरह से मक्का के किसानों के हित में सिद्ध होता प्रतीत नहीं हो रहा है।