New Zealand: न्यूज़ीलैंड की नई संसद में सबसे ज़्यादा विविधिता, हर धर्म, लिंग और समुदाय के सांसद शामिल

New Zealand Parliament: हाल के चुनावों में लेबर पार्टी को भारी बहुमत, पार्टी की आधे से अधिक सांसद महिलाएं, मूलनिवासी, अल्पसंख्यक और LGBT सांसदों का भी बोलबाला

Updated: Oct 25, 2020, 06:47 PM IST

New Zealand: न्यूज़ीलैंड की नई संसद में सबसे ज़्यादा विविधिता, हर धर्म, लिंग और समुदाय के सांसद शामिल
Photo Courtesy: Inquirer

वेलिंगटन। न्यूज़ीलैंड की वामपंथी नेतृत्व वाली नई संसद अब तक की सबसे अधिक विविधता से भरी संसद होगी। इस संसद में हर धर्म, जाति, क्षेत्र, नस्ल और लिंग के सांसद मौजूद होंगे। यह अपने आप में एक ऐतिहासिक परिघटना बताई जा रही है, जिसे सफल बनाने में देश की लेबर और ग्रीन पार्टी ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। इस बार न्यूज़ीलैंड की संसद में सर्वाधिक महिला और एलजीबीटी समुदाय से आने वाले सांसद मौजूद रहेंगे। 

देश में हाल ही में हुए आम चुनाव में लेबर पार्टी को भारी बहुमत मिला है। इतना कि पार्टी अपने दम पर सरकार बनाने में समर्थ है। देश की मौजूदा प्रधानमंत्री जेसिंडा आर्डर्न को कोरोना वायरस महामारी के खिलाफ उठाए गए कदमों का फायदा मिला और लेबर पार्टी को पिछले पांच दशक में सर्वाधिक वोट मिले। जेसिंडा आर्डर्न अपने प्रगतिशील नजरिए के लिए पूरी दुनिया में जानी जाती हैं। फिर चाहे महिलाओं, एलजीटीबी समुदाय और हाशिए पर पड़े लोगों के उत्थान के लिए सामाजिक-आर्थिक योजनाएं लाना हो या आतंकी हमले का मुकाबला, आर्डर्न ने हमेशा ही अपना नेतृत्व कौशल दिखाया है। 

अपने दम पर सरकार बनाने की कुव्वत रखने के बाद भी जेसिंडा आर्डर्न अपनी पुरानी सहयोगी ग्रीन पार्टी के साथ बातचीत कर रही हैं। उम्मीद जताई जा रही है कि ग्रीन पार्टी को भी उनकी नई सरकार में जगह मिलेगी। 

लेबर पार्टी ने देश की 120 सीटों में से 64 सीटें जीती हैं। लेबर पार्टी की आधे से अधिक सांसद महिलाएं हैं। पार्टी के पास माओरी समुदाय के 16 मूलनिवासी सांसद भी हैं। लेबर पार्टी की तरफ से इस बार इब्राहिम ओमर और वनुशी वाल्टर्स ने भी चुनाव जीता है। वनुशी वाल्टर्स जहां श्रीलंकाई मूल की हैं, वहीं इब्राहिम ओमर अफ्रीकी मूल के मुस्लिम हैं। भारतीय मूल के डॉ. गौरव शर्मा ने भी लेबर पार्टी की तरफ से हैमिल्टन वेस्ट सीट का चुनाव जीता है। 

मैसे विश्वविद्यालय में ह्यूमैनिटीज और सोशल साइंस के प्रोफेसर पॉल स्पूनली ने अंतरराष्ट्रीय न्यूज एजेंसी रॉयटर्स को बताया, "अल्पसंख्यक समुदाय, मूलनिवासियों और लिंग की नजर से यह अब तक की सबसे विविधिता भरी संसद है।"

न्यूज़ीलैंड की नई संसद में एलजीबीटी समुदाय के 10 प्रतिशत सांसद भी मौजूद होंगे। यह किसी भी देश की संसद में इस समुदाय से आने वाले लोगों का अब तक का सबसे ज्यादा प्रतिनिधित्व है। इसी समुदाय से आने वाले ग्रांट रॉबर्टसन देश के वित्त मंत्री हैं, जो खुद को गे बताते हैं। देश की ग्रीन पार्टी ने 10 सीटों पर जीत हासिल की है। इनमें से अधिकतर सांसद महिलाएं हैं और देश के मूलनिवासी और एलजीबीटी समुदाय से ताल्लुक रखते हैं।  

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स्पूनली ने कहा, "इस बार हमने देखा कि बहुत सारे वृद्ध, पुरुष और श्वेत सांसद चुनाव हार गए। ये पिछले करीब 30 साल से देश की संसद पर काबिज थे।" जेसिंडा आर्डर्न जब 2017 में पहली बार न्यूज़ीलैंड की प्रधानमंत्री बनी थीं, तो उनकी मात्र 37 साल थी। तब वे दुनिया के किसी भी देश की अगुवाई करने वाली सबसे कम उम्र की नेता  थीं।