गर्भवती होने के बावजूद हॉस्पिटल में सेवाएं दे रहीं थीं डॉ ख़दीजा, बच्ची को जन्म देने के बाद हारीं कोरोना से जंग

मध्यप्रदेश के देवास स्थित शासकीय अस्पताल की ब्लड बैंक ऑफिसर डॉ ख़दीजा शेख का कोरोना ने निधन हो गया, कोरोना से जंग हारने से पहले उन्होंने सात महीने की बच्ची को जन्म दिया था

Updated: May 17, 2021, 01:18 AM IST

गर्भवती होने के बावजूद हॉस्पिटल में सेवाएं दे रहीं थीं डॉ ख़दीजा, बच्ची को जन्म देने के बाद हारीं कोरोना से जंग

इंदौर। मध्यप्रदेश में कोरोना वायरस ने चारों ओर कोहराम मचा रखा है। इस वायरस से हो रही मौतों का सिलसिला थमने का नाम नहीं ले रहा है। कोरोना ने देवास की एक ब्लड बैंक ऑफिसर की जान ले ली है। डॉ ख़दीजा शेख जो कि गर्भवती होने के बावजूद अस्पताल में सेवाएं दें रहीं थीं, वह आखिरकार कोरोना से जंग हार गईं। हालांकि निधन से पहले उन्होंने एक 7 महीने की बच्ची को जन्म दिया है।

बताया जा रहा है कि 29 वर्षीय डॉ ख़दीजा शेख देवास के शासकीय महात्मा गांधी जिला अस्पताल में पदस्थ थीं। दो वर्ष पहले हीं उन्हें अस्पताल का ब्लड बैंक मेडिकल ऑफिसर बनाया गया था। कोरोना संकट के इस दौर में वे पिछले साल से ही पूरी ताकत के साथ कोरोना संक्रमित मरीजों की सेवा में जुटी हुईं थी। इसी दौरान वह गर्भवती हुईं। गर्भ में पल रहे बच्चे की जानकारी होने के बावजूद वह अस्पताल में सेवाएं देतीं रहीं।

सात महीने की गर्भवती होने के साथ ही वह कोरोना महामारी के चपेट में आ गईं थीं। शेख की हालत बिगड़ने के बाद उन्हें इंदौर रेफर कर दिया गया। इंदौर में डॉक्टरों ने बताया कि उन्हें बचाने के लिए ऑपरेशन कर बच्चे को निकालना होगा। परिजनों से अनुमति लेने के बाद डॉ ख़दीजा शेख का ऑपरेशन किया गया और उन्होंने एक बच्ची को जन्म दिया।

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ख़दीजा के परिजनों ने बताया कि बच्ची को जन्म देने के बाद वह होश में आईं थीं, लेकिन थोड़े देर बाद ही वह कोमा में चलीं गईं। एक सप्ताह तक लगातार वह कोमा में रहीं, और शनिवार की रात आखिरकार उन्होंने दम तोड़ दिया। डॉक्टरों ने ख़दीजा को बचाने के काफी प्रयास किए लेकिन वे असफल रहे। बताया जा रहा है कि बच्ची पूरी तरह से स्वस्थ है और वह डॉक्टरों की निगरानी में है।

डॉ ख़दीजा को ब्लड बैंक अधिकारी बने 2 साल ही हुए थे। वे देवास के करीम कृपा रेस्टोरेंट के मालिक जमील शेख की पुत्री थीं। पिछले साल हीं उनका विवाह हुआ था। ख़दीजा के पति इंदौर में टीचर हैं, वह बच्चों को कॉम्पिटिटिव एग्जाम की तैयारी करवाते हैं। ख़दीजा को शनिवार को ही खजराना स्थित कब्रिस्तान में सुपुर्द-ए-खाक किया गया।