शिवराज सरकार फिर लेगी 2000 करोड़ रुपये का क़र्ज़, 5 हफ़्ते में पांचवीं बार लेना पड़ेगा उधार

Shivraj Chouhan: कर्ज के भरोसे चल रहा है शिवराज सरकार का खर्च, उपचुनाव में मतदान के अगले दिन भी लिया था कर्ज

Updated: Nov 10, 2020, 03:56 PM IST

शिवराज सरकार फिर लेगी 2000 करोड़ रुपये का क़र्ज़, 5 हफ़्ते में पांचवीं बार लेना पड़ेगा उधार
Photo Courtesy : VisionMP

भोपाल। मध्य प्रदेश की 28 विधानसभा सीटों पर उपचुनाव के नतीजे आने के साथ ही प्रदेश की जनता के माथे कर्ज का बोझ और बढ़ जाएगा। चुनाव नतीजे आने के अगले ही दिन बीजेपी की शिवराज सरकार दो हजार करोड़ रुपए का कर्ज लेने जा रही है। पिछले 5 हफ्ते में यह पांचवीं बार है जब मध्य प्रदेश सरकार कर्ज ले रही है। 

हैरान करने वाली बात यह है कि उपचुनाव के अगले दिन भी शिवराज सरकार ने कर्ज लिया था और अब नतीजों के बाद फिर से कर्ज़ लेने की नौबत आ गई है। मार्च में सत्ता में आने के बाद से शिवराज सरकार लगातार कर्ज़ लेती रही है। 

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रिपोर्ट्स के मुताबिक प्रदेश सरकार ने कर्ज के लिए रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया के माध्यम से वित्तीय संस्थाओं से प्रस्ताव मांगे हैं। इसके लिए ऑनलाइन निविदा भरी जाएगी, जिसका आज आखिरी दिन है। बिड भरने वाला जो भी वित्तीय संस्थान सबसे कम ब्याज पर कर्ज देने को तैयार होगा, उससे ही कल सरकार कर्ज़ लेगी। 

हर नागरिक पर पहले से है 34 हजार करोड़ रुपए का कर्ज

बता दें कि सरकार यह कर्ज ऐसे समय में ले रही है जब आबादी के लिहाज से प्रदेश के प्रत्येक नागरिक पर पहले से ही 34 हजार रुपए से ज्यादा का कर्ज है। फिलहाल मध्य प्रदेश सरकार पर 2 लाख करोड़ रुपये से ज़्यादा कर्ज हैं। हैरान करने वाली बात यह है कि मध्य प्रदेश के कुल बजट का 15 फीसदी से ज्यादा हिस्सा कर्ज चुकाने में ही चला जाता है। मध्य प्रदेश सरकार हर साल 16 हजार करोड़ रुपये ब्याज़ भरती है।

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2020 में शिवराज सरकार ने कब कितना कर्ज लिया

  • 30 मार्च - 1500 करोड़ रुपये
  • 7 अप्रैल - 500 करोड़ रुपये
  • 2 जून - 500 करोड़ रुपये
  • 7 जुलाई - 2000 करोड़ रुपये
  • 4 अगस्त - 2000 करोड़ रुपये
  • 10 सितंबर - 1000 करोड़ रुपये 
  • 7 अक्टूबर - 1000 करोड़ रुपये
  • 13 अक्टूबर - 1000 करोड़ रुपये 
  • 21 अक्टूबर - 1000 करोड़ रुपये 
  • 4 नवंबर - 1000 करोड़ रुपये

सरकार को मिली है 4440 करोड़ के अतिरिक्त ऋण लेने की पात्रता

गौरतलब है कि किसी भी राज्य की सरकारें आरबीआई के माध्यम से ऋण लेती हैं। ऋण लेने से पहले सरकार को यह राशि कहां और कैसे खर्च करना है इसकी जानकारी देनी पड़ती है। आरबीआई की अनुशंसा के बाद ही सरकार को रजिस्टर्ड वित्तीय संस्थाएं ऋण देती हैं। साल 2020 में जनवरी से लेकर नवंबर तक सरकार पर 22 हजार करोड़ का कर्ज बढ़ा है। मध्यप्रदेश सरकार को केंद्र से 4440 करोड़ के अतिरिक्त ऋण लेने की पात्रता भी मिली है।

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कर्ज से ही चल रहा है हफ्ते का खर्चा

बीते कुछ अरसे के दौरान शिवराज सरकार ने जिस तरह लगातार कर्ज़ लिए हैं, उससे लगता है, प्रदेश की सरकार कर्ज़ के भरोसे ही चलाई जा रही है। अब सवाल यह है कि अगर ऐसे ही आर्थिक हालात बदतर होते रहे तो आने वाली पीढ़ियों का भविष्य कैसे सुरक्षित होगा।