Dhar: टेस्ट करवाया नहीं फिर भी 15 लोग कोरोना पॉज़िटिव

Corona in MP: कोरोना जांच में गड़बड़झाला, कुक्षी के टाना गांव में बिना जांच 15 लोगों की रिपोर्ट पॉजिटिव, दो स्वास्थ्य कर्मचारी निलंबित

Updated: Sep 16, 2020 07:24 PM IST

Dhar: टेस्ट करवाया नहीं फिर भी 15 लोग कोरोना पॉज़िटिव
Photo Courtesy: Indian Express

धार। कोरोना से जूझते धार जिले में स्वास्थ्य विभाग की गंभीर लापरवाही का मामला सामने आया है। जिले में उन मरीजों की रिपोर्ट पॉजिटिव आई है, जिन्होंने कोरोना जांच करवाई ही नहीं। लोगों का कहना है कि जब उन्होंने कोरोना जांच करवाई ही नहीं, तो उन्हे पॉजिटिव कैसे बताया जा रहा है। धार कलेक्टर आलोक कुमार सिंह ने कोरोना जांच दल के दोनों कर्मचारियों डी ब्लॉक कम्युनिटी मोबालाइजर बच्चन मुजाल्दा और लैब तकनीशियन गुमान सिंह चौहान को निलंबित कर दिया हैं। कलेक्टर ने मामले की जांच के आदेश दिए हैं।

दरअसल 8 सितंबर को धार जिले के कुक्षी स्थित निसरपुर सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र की एक टीम टाना गांव में कोरोना जांच के लिए गई थी। वहां उन्होंने पंचायत सचिव, सरपंच और आशा कार्यकर्ता के माध्यम से 19 लोगों के नाम लिख लिए। उनमें से केवल 4 लोगों के ही सैंपल लिए गए। बाकी 15 टेस्ट टयूब्स पर केवल ग्रामीणों की नाम की पर्ची लगा दी गई। जिसे इंदौर की लैब में जांच के लिए भेजा गया। वहीं 11 सितंबर की रात को 17 लोगों की कोरोना रिपोर्ट पॉजिटिव आई। इस रिपोर्ट में उन 15 लोगों के नाम भी शामिल थे जिन्होंने अपनी कोरोना जांच करवाई ही नहीं। जब उन्होने सैंपल दिया ही नहीं तो उन्हे कैसे कोरोना पॉजिटिव बता दिया गया।

धार में कोरोना

टाना गांव में जिन लोगों ने सैंपल दिया था उनमें से केवल 2 लोगों के नाम कोरोना पॉजिटिव की लिस्ट में हैं। अन्य दो लोगों की कोरोना रिपोर्ट अभी आना बाकी है। स्वास्थ्य विभाग की इस घोर लापरवाही के बारे में निसरपुर के सीबीएमओ ने मामले की जांच करने और दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई करने के निर्देश दिए थे। 

लैब टैक्नीशियन ने दी सफाई कहा जानबूझकर भेजे थे फर्जी सैंपल

वहीं इस बारे में निलंबित किए गए लैब टेक्नीशियन गुमान सिंह चौहान का कहना है कि आए दिन स्वास्थ्य अमले पर हो रहे हमले और कोरोना रिपोर्ट को लेकर संशय की स्थिति बन रही थी। कोरोना जैसी बात लोग नहीं मान रहे थे, इसलिए उन्होंने सच्चाई का पता लगाने के लिए 15 लोगों की फर्जी सैंपल कोरोना जांच इंदौर भेजे थे, जिससे वास्तविकता का पता लगाया जा सके।