पुरानी पेंशन स्कीम को लेकर आर-पार की लड़ाई के मूड में कर्मचारी संगठन, 2 अक्टूबर से सड़कों पर उतरेंगे

पुरानी पेंशन स्कीम की बहाली की मांग को लेकर 2 अक्टूबर से सड़कों पर उतरेंगे मध्य प्रदेश के कर्मचारी, राजस्थान और छत्तीसगढ़ के तर्ज पर पुरानी पेंशन बहाली की मांग

Updated: Sep 26, 2022, 11:54 AM IST

पुरानी पेंशन स्कीम को लेकर आर-पार की लड़ाई के मूड में कर्मचारी संगठन, 2 अक्टूबर से सड़कों पर उतरेंगे

भोपाल। मध्य प्रदेश में भर्ती की मांग को लेकर युवा आंदोलित हैं। इसी बीच अब कर्मचारियों ने भी सड़कों पर उतरने का ऐलान कर दिया है। कर्मचारी संगठन 2 और 7 अक्टूबर को बड़ा आंदोलन करने वाले हैं। उनकी मांग है कि राजस्थान और छत्तीसगढ़ की तरह मध्य प्रदेश सरकार भी पुरानी पेंशन स्कीम बहाल करे। 

दरअसल, कर्मचारी संगठनों की लगातार मांग के बावजूद राज्य सरकार ने अब तक पुरानी पेंशन बहाल के संकेत नहीं दिए गए हैं। इससे नाराज प्रदेश भर के करीब 9 लाख कर्मचारी आर-पार की लड़ाई के मूड में आ गए हैं। मध्य प्रदेश अधिकारी-कर्मचारी संयुक्त मोर्चा ने 2 अक्टूबर को प्रदेश व्यापी धरने का ऐलान किया है। संयुक्त मोर्चा से 50 से अधिक कर्मचारी संगठन जुड़े हैं। वहीं 7 अक्टूबर को तृतीय वर्ग कर्मचारी संघ बड़ा आंदोलन करेगा। 

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कर्मचारी संघ ने बताया कि 2 अक्टूबर को सभी जिला मुख्यालयों में दोपहर 12 से 2 बजे के बीच 2 घंटे का उपवास करेंगे। महात्मा गांधी की प्रतिमा पर माल्यार्पण कर मांगों से संबंधित ज्ञापन भी रखेंगे। इधर पूर्व सीएम कमलनाथ ने ऐलान किया है कि प्रदेश में कांग्रेस की सरकार बनते ही पुरानी पेंशन स्कीम लागू करेंगे। बता दें कि मध्य प्रदेश से सटे राजस्थान और छत्तीसगढ़ की सरकारों ने पुरानी पेंशन स्कीम बहाल कर दी है। दोनों जगह कांग्रेस की सरकार है। 

इधर प्रदर्शनों को दबाने के लिए सरकार भी कर्मचारियों को डराने में जुट गई है। बीते 13 सितंबर को हुए शिक्षकों के आंदोलन को लेकर स्कूल शिक्षा विभाग ने करीब 50 से ज्यादा शिक्षकों को सस्पेंड कर दिया। स्कूल शिक्षा विभाग ने प्रदेशभर के करीब 400 शिक्षकों को नोटिस भेजकर पूछा था कि क्या वे भोपाल में हुए प्रदर्शन में शामिल थे? जवाब नहीं मिलने पर उन्हें सस्पेंड किया जा रहा है।

शासकीय शिक्षक संघ के प्रदेश अध्यक्ष उपेंद्र कौशल ने कहा कि सरकार की ये कार्रवाई ठीक नहीं। मध्य प्रदेश के सभी शिक्षक अपनी पुरानी पेंशन बहाली और दूसरी मांगों के लिए संघर्षरत हैं। सरकार अहंकार से ग्रसित होकर निलंबित करने का कार्य कर रही है। यह शिक्षकों की आवाज को दबाने का काम है।