हाईकोर्ट ने कहा- भरोसे के लायक नहीं है एमपी पुलिस, गैंगरेप केस सीबीआई को ट्रांसफर करने का आदेश

पुलिस ने नाबालिग गैंगरेप पीड़िता को किया प्रताड़ित, आरोपियों को बचाने का प्रयास, हाईकोर्ट ने पुलिसकर्मियों के खिलाफ केस दर्ज करने का दिया आदेश

Updated: Jun 24, 2021, 10:56 AM IST

हाईकोर्ट ने कहा- भरोसे के लायक नहीं है एमपी पुलिस, गैंगरेप केस सीबीआई को ट्रांसफर करने का आदेश
Photo Courtesy: Patrika

ग्वालियर। दलित नाबालिग लड़की के साथ हुए गैंगरेप मामले में मध्यप्रदेश हाईकोर्ट की ग्वालियर बेंच ने बड़ा फैसला सुनाया है। उच्च न्यायालय ने इस मामले में सीबीआई जांच का आदेश जारी करते हुए कहा है कि एमपी पुलिस भरोसे के लायक नहीं है। इतना ही नहीं कोर्ट ने सिलसिलेवार तरीके से पुलिस को दोषी मानते पुलिसकर्मियों के खिलाफ एफआईआर दर्ज करने का आदेश भी जारी किया है। साथ ही पुलिस पर 50 हजार जुर्माना भी लगाया गया है।

मामला ग्वालियर के मुरार थाना क्षेत्र का है। यहां 31 जनवरी 2021 को एक नाबालिग दलित लड़की के साथ गंगा सिंह भदौरिया के नाती आदित्य भदौरिया और उसके दोस्तों ने कथित रूप से गैंगरेप किया था। पीड़िता को गंगा सिंह ने 20 दिसंबर 2020 से अपने घर काम पर रखा था। पीड़िता के मुताबिक वह उसी के घर में ग्राउंड फ्लोर पर ही रहती थी। 31 जनवरी की रात आदित्य भदौरिया अपने एक दोस्त को लेकर कमरे में आया और पीड़िता के साथ दुष्कर्म किया। इसके बाद उसे धमकाकर दोनों चले गए।

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आरोप है कि शिकायत के बाद थाने में पुलिस ने पीड़िता और उसके मां-बाप के साथ पूरी रात मारपीट की। यह सब आरोपी आदित्य के दादा गंगा भदौरिया के कहने पर हुआ। कोर्ट ने आरोपी के खिलाफ सख्त कार्रवाई करने के बजाय उलटे पीड़िता का उत्पीड़न करने के पुलिस की कार्रवाई को गंभीर कृत्य माना है। हाई कोर्ट ने स्पष्ट कहा है कि पुलिस के रवैये को देखकर नहीं लगता कि पीड़िता को न्याय मिल सकेगा। इसलिए यह पूरा मामला सीबीआई को सुपुर्द की जाए।  

कोर्ट ने मुरार थाने के टीआई और सब इंस्पेक्टर कीर्ति उपाध्याय पर नाबालिग दलित लड़की और उसके परिवार के साथ मारपीट करने के मामले में एफआईआर दर्ज करने के निर्देश दिए हैं। न्यायालय ने यह भी कहा है कि चूंकि लड़की दलित वर्ग से आती है। इसलिए पुलिस अधिकारियों के खिलाफ दलित उत्पीड़न की धाराओं के तहत भी मामला दर्ज किया जाए। इसके अलावा इस मामले में लिप्त पुलिस अधिकारियों पर 50 हजार रुपए का हर्जाना भी लगाया गया है। यह राशि पीड़िता को दिया जाएगा।

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हाईकोर्ट ने पीड़ित पक्ष को इस बात की भी स्वतंत्रता दी है कि वह अतिरिक्त मुआवजे के लिए न्यायालय में अलग से याचिका दायर कर सकते हैं। न्यायालय ने एएसपी सुमन गुर्जर, सीएसपी रामनरेश पचौरी, मुरार टीआई अजय पवार, सिरोल टीआई प्रीति भार्गव, सब इंस्पेक्टर कीर्ति उपाध्याय को ग्वालियर-चंबल क्षेत्र से बाहर ट्रांसफर करने के आदेश भी दिए हैं। न्यायालय ने डीजीपी को चेतावनी देते हुए ये सुनिश्चित करने कहा है कि प्रदेश के सभी थानों के सीसीटीवी कैमरे चालू हों।