23 साल बाद सागर के बेटे की हुई वतन वापसी, पाकिस्तान की जेल से रिहा होकर भारत आए प्रह्लाद

23 साल की उम्र में भटककर पहुंचा था पाकिस्तान, 56 की उम्र में रिहा होकर वतन लौटे प्रह्लाद, बेटे के इंतजार में हुई मां की मौत, भाई को देख फफक पड़ा छोटा भाई

Updated: Aug 31, 2021, 08:30 PM IST

23 साल बाद सागर के बेटे की हुई वतन वापसी, पाकिस्तान की जेल से रिहा होकर भारत आए प्रह्लाद
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सागर। मध्य प्रदेश के सागर जिले के घोषि पट्टी गांव में आज खुशियों से सराबोर है। गांव के कुछ लोग जश्न मना रहे हैं तो खुशी के मारे कइयों की आंखें नम हैं। वजह है गांव का बेटा प्रह्लाद जो एक-दो नहीं बल्कि 23 साल बाद गांव लौट रहा है। दरअसल, प्रह्लाद 23 साल पहले घर से लापता हो गए थे और पाकिस्तान चले गए थे। तब से उन्हें वहां जेल में कैद कर यातनाएं दी जा रही थी। बेटे के इंतजार करते-करते उनकी मां ने दुनिया को अलविदा कह दिया, लेकिन पाकिस्तान से उनकी रिहाई नहीं हो पाई। तमाम प्रयासों के बाद आखिरकार आज प्रह्लाद वापस अपने वतन लौट आए हैं।

रिपोर्ट्स के मुताबिक आज शाम अमृतसर के अटारी बार्डर पर पाकिस्तानी आर्मी ने सागर के लाल प्रहलाद सिंह को भारतीय सेना के हवाले कर दिया है। यहां पहले से मौजूद सागर पुलिस और प्रह्लाद के छोटे भाई वीर सिंह ने उन्हें रिसीव किया है। बार्डर पर कानूनी प्रक्रिया पूरी करने के बाद कल यानी मंगलवार को वे अपने गृहग्राम सागर स्थित घोषि पट्टी में पहुंचेंगे। नीले कुर्ते और हाथों में दो झोला लिए जब प्रह्लाद की वतन वापसी हुई तो वहां मौजूद अधिकारियों की आंखें नम थी। वहीं दशकों बाद बड़े भाई को देखकर वीर सिंह भी फफक पड़े। 

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मध्य प्रदेश गृह विभाग ने ट्वीट कर इस बात की पुष्टि की है। दरअसल, 33 वर्ष की उम्र में फूंदीलाल राजपूत के जवान बेटे घर से लापता हो गए थे। प्रह्लाद के भाई के मुताबिक वे मानसिक रूप से बीमार थे। परिजनों ने उन्हें ढूंढने की तमाम कोशिशें की लेकिन वे नहीं मिले क्योंकि वे भटककर पाकिस्तान पहुंच गए और वहां पाकिस्तान आर्मी ने उन्हें कैद कर लिया। तब से लेकर अबतक वे पाकिस्तान की जेल में यातना झेल रहे थे। दोनों देशों के बीच कटुता के कारण दो दशक से ज्यादा अवधि तक उनकी रिहाई नहीं हो सकी। 

प्रह्लाद की जिंदगी में क्या हुआ, नहीं हुआ और वे पाकिस्तान कैसे पहुंच गए इस बात की फिलहाल कोई जानकारी नहीं है। हालांकि, परिजनों को उम्मीद है कि अब उनकी मनोदशा ठीक हो गई होगी और घर आकर वे बताएंगे कि वे पाकिस्तान कैसे चले गए और बीते 23 साल में वहां उनके साथ क्या हुआ? ग्रामीणों के मुताबिक प्रह्लाद के जाने के बाद उनकी मां गुलाबरानी काफी परेशान रहती थीं, हालांकि उन्हें उम्मीद थी कि वह जरूर वापस आएगा। लेकिन 5 साल पहले अपने लाडले का इंतजार करते-करते उनकी मां का भी निधन हो गया।