मध्यप्रदेश हाईकोर्ट के जज बने प्रणय वर्मा, सुप्रीम कोर्ट कॉलेजियम ने की अनुशंसा, राष्ट्रपति ने लगाई मुहर

पूर्व चीफ जस्टिस विपिन चंद्र के बेटे प्रणय वर्मा को मप्र उच्च न्यायालय का जज नियुक्त किया गया, प्रणय वर्मा ने मप्र के पूर्व महाधिवक्ता रवीश कुमार अग्रवाल से सीखी है वकालत की बारीकियां, खास अंदाज में अपना पक्ष रखने के लिए जाने जाते हैं

Updated: Aug 26, 2021, 06:19 PM IST

मध्यप्रदेश हाईकोर्ट के जज बने प्रणय वर्मा, सुप्रीम कोर्ट कॉलेजियम ने की अनुशंसा, राष्ट्रपति ने लगाई मुहर
Photo Courtesy: twitter

 मध्य प्रदेश हाई कोर्ट में प्रणय वर्मा को जज नियुक्त किया गया है। मध्यप्रदेश उच्च न्यायालय में तीन साल बाद किसी सीनियर एडवोकेट को जज बनाया गया है। केंद्र सरकार ने इस बारे में अधिसूचना जारी कर दी है। जिसमें कहा गया है कि भारतीय संविधान के अनुच्छेद 217 के खंड (1) द्वारा प्रदत्त अधिकार का इस्तेमाल करते हुए राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद ने प्रणय वर्मा को उनके पदभार ग्रहण करने की तारीख से मध्य प्रदेश उच्च न्यायालय के न्यायधीश के रूप में नियुक्त किया है। 48 वर्षीय प्रणय वर्मा का जन्म 12 दिसंबर 1973 को हुआ है। 

दरअसल सुप्रीम कोर्ट कॉलेजियम द्वारा एडवोकेट प्रणय वर्मा को जज बनाने की सिफारिश की गई थी। मार्च 2021 में की गई सिफारिश के 5 महीने बाद अब भारत सरकार ने प्रणय वर्मा को मध्य प्रदेश हाईकोर्ट का जज बना दिया है। प्रणय वर्मा के पिता हाईकोर्ट के पूर्व चीफ जस्टिट विपिन चंद्र वर्मा हैं। प्रणय वर्मा ने पूर्व एडवोकेट जनरल रवीश कुमार अग्रवाल के मार्ग दर्शन में लंबे समय तक काम किया है। प्रणय वर्मा कोर्ट में अपना पक्ष बड़ी मजबूती से रखने के लिए जाने जाते हैं। वे कानून की बारीकियों को बखूबी समझते हैं। उन्हें लीगल मामलों की हर विधा में महारत हासिल है।

दरअसल सुप्रीम कोर्ट के जज के रूप में नियुक्तियों के लिए CJI एनवी रमना की अध्यक्षता वाले सुप्रीम कोर्ट कॉलेजियम की तरफ 9 नामों को भेजा गया था।  जिनमें जस्टिस बीवी नागरत्ना का नाम भी शामिल है, वे देश की पहली महिला मुख्य न्यायाधीश बनने की कतार में हो सकती हैं। मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार औपचारिकताओं और नियुक्तियों के लिए राष्ट्रपति के पास भेजा गया है।राष्ट्रपति के पास भेजे गए 9 नामों में सुप्रीम कोर्ट बार एसोसिएशन के आठ जज और एक वकील शामिल हैं। इनमें कर्नाटक के मुख्य न्यायाधीश ए.एस. ओका भी हैं, जो सभी HC के मुख्य न्यायाधीशों में सबसे वरिष्ठ मुख्य न्यायाधीश हैं।