भोपाल में सरकारी ज़मीनें और भवन बेचेगी शिवराज सरकार, प्रॉपर्टी बेचकर जुटाएगी विकास के लिए पैसे

मुख्यमंत्री के साथ हुई एक बैठक में अधिकारियों ने सरकारी ज़मीनों और भवनों को बेचने का दिया था सुझाव, ज़िला प्रशासन ने शुरू की नीलामी की तैयारी

Updated: Mar 03, 2021, 08:45 AM IST

भोपाल में सरकारी ज़मीनें और भवन बेचेगी शिवराज सरकार, प्रॉपर्टी बेचकर जुटाएगी विकास के लिए पैसे

भोपाल। राजधानी भोपाल के विकास के लिए राज्य सरकार शहर में खाली पड़ी सरकारी ज़मीनों और भवनों को बेचने की तैयारी कर रही है। भोपाल ज़िला प्रशासन ने पूरे शहर में ऐसे कुल 9 जगहों को चिन्हित किया है, जिनकी नीलामी की जानी है। ये सभी ऐसी सरकारी प्रॉपर्टी हैं, जिनका अभी कोई उपयोग नहीं हो रहा है। 85 करोड़ रुपये की 9 प्रॉपर्टी को बेचने के किए नीलामी की तैयारी शुरू कर दी गई है। 

भोपाल ज़िला प्रशासन ने अपने पोर्टल पर राजधानी की 9 प्रॉपर्टी का विवरण अपलोड भी कर दिया है। प्राइड सिटी कॉलोनी के सामने प्लॉट, कटारा प्राइड कॉलोनी के सामने प्लॉट, ग्लोबल पार्क कटारा के सामने प्लॉट सहित कुल 9 प्रॉपर्टी को बेचकर पैसे जुटाने की तैयारी की जा रही थी। हालांकि इसमें दो जगह ऐसी हैं जहां अवैध तौर पर कब्ज़ा जमा लिया गया है। 85 वार्ड की प्राइड सिटी कॉलोनी के सामने खाली पड़ी ज़मीन के सामने बारह दुकानें जबकि कटारा हिल्स एरिया में 15 दुकानें बना ली गई हैं। लेकिन अधिकारी यह कह रहे हैं कि प्रॉपर्टी खरीदने वाले व्यक्ति को ये ज़मीन खाली करा कर ही दी जाएंगी।

राज्य सरकार ने क्यों लिया यह फैसला 

दरअसल हाल ही में मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान और अधिकारियों के बीच बैठक हुई थी। बैठक में शिवराज ने आगामी पांच वर्षों में भोपाल के विकास के लिए रोडमैप की जानकारी मांगी थी। उस बैठक में ही अधिकारियों ने मुख्यमंत्री को  बताया कि आगामी पांच वर्षों में 1600 करोड़ रुपये की ज़रूरत है। उन्होंने बताया कि शहर की सड़कों के मेंटेनेंस के लिए अगले पांच वर्षों में 88 करोड़ रुपए की आवश्यकता पड़ेगी। 

बैठक के दौरान अधिकारियों ने मुख्यमंत्री को सलाह दी कि पैसे जुटाने के लिए खाली पड़ी ज़मीनों और भवनों को बेचा जा सकता है। अफसरों ने ने कहा कि शहर में कई जगह ऐसी हैं, जो कि काफी समय से खाली पड़ी हैं साथ ही कई भवन ऐसे हैं जो इस्तेमाल नहीं हो रहे और जर्जर हालत में हैं। अधिकारियों ने शिवराज से कहा कि इन जगहों पर किसी विभाग का कार्यालय नहीं खोला जा सकता। इसलिए बेहतर यही होगा कि इन ज़मीनों को बेचकर शहर के विकास के लिए धनराशि जुटाई जाए।