भारत में कोरोना से हुई 47 लाख लोगों की मौत, हर तीसरा मृतक भारतीय: विश्व स्वास्थ्य संगठन

WHO का आकलन है कि कोरोना की वजह से भारत में 47 लाख लोगों की मौत हो गई जो कि आधिकारिक आंकड़ों से लगभग 10 गुना ज्यादा है। यह संख्या दुनियाभर में हुई मौतों की एक तिहाई है। भारत ने इस आंकड़े पर आपत्ति जताई है।

Updated: May 06, 2022, 11:46 AM IST

भारत में कोरोना से हुई 47 लाख लोगों की मौत, हर तीसरा मृतक भारतीय: विश्व स्वास्थ्य संगठन
Photo Courtesy: Hrw.org

नई दिल्ली। विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) ने कहा है कि भारत में कोरोना से 47 लाख लोगों की मौत हुई है। ये संख्या आधिकारिक आंकड़ों से क़रीब 10 गुना ज़्यादा है। हेल्थ एजेंसी के मुताबिक, दुनिया भर में कोरोना से लगभग 1.5 करोड़ लोगों की जान गई है। WHO के मुताबिक दुनिया भर की मौतों में एक तिहाई लोगों की मृत्यु भारत में हुई है। यानी विश्वभर में कोरोना से मरने वालों में हर तीसरा नागरिक भारतीय था।

WHO के कोविड से मरने वालों के आंकड़ा और स्वास्थ्य मंत्रालय के आंकड़ों में जमीन आसमान का फर्क है। WHO का कहना है कि 1 जनवरी 2020 से 31 दिसंबर 2021 के बीच ही 47 लाख लोगों की मौत हो गई थी। भारत में जो गिनती की गई है उससे लगभग 10 गुना ज्यादा लोगों की मौत हुई है। भारत में सरकारी आंकड़े महज 5.2 लाख मौतों की पुष्टि करते हैं।

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भारत सरकार ने स्वास्थ्य संगठन के इस दावे पर सवाल भी उठाए हैं। भारत सरकार की तरफ से जारी बयान में कहा गया है कि इस प्रक्रिया, कार्यप्रणाली और परिणामों पर भारत की आपत्ति के बावजूद डब्ल्यूएचओ ने अतिरिक्त मृत्यु दर का अनुमान जारी किया है। केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय के शीर्ष अधिकारियों ने मीडिया से कहा कि इस डेटा पर हमें आपत्ति है। WHO के मॉडल, डेटा कलेक्शन, डेटा सोर्स, प्रक्रिया पर सवाल है। हम चुप नहीं रहेंगे, सभी ऑफिशियल चैनल का हम इस्तेमाल करेंगे और इस डेटा की आपत्ति को हम एक्जीक्यूटिव बोर्ड में रखेंगे।

दरअसल, डब्लूएचओ ने यह आकलन जिस मेथड से दिया है उसे एक्सेस डेथ कहा जाता है। इस मेथड में महामारी से जूझने वाले क्षेत्र की मृत्यु दर के आधार पर आकलन किया जाता है कि कितने लोगों की मौत हुई होगी। WHO ने कहा है कि यह आंकड़ा न केवल महामारी के प्रभाव के बारे में बताता है बल्कि देशों को इससे सीख लेनी चाहिए कि वे अपने स्वास्थ्य तंत्र को बेहतर करें। संकट के समय में अच्छी स्वास्थ्य सुविधाएं ही मानवता की रक्षा कर सकती हैं।