गाय को घोषित किया जाए राष्ट्रीय पशु, गो मांस खाना मौलिक अधिकार नहीं: इलाहाबाद हाईकोर्ट

गोहत्या पर इलाहाबाद हाईकोर्ट की सख्त टिप्पणी, जीवन का अधिकार मारने के अधिकार से ऊपर, जीभ के स्वाद के लिए जीवन का अधिकार नहीं छीना जा सकता

Updated: Sep 02, 2021, 11:54 AM IST

गाय को घोषित किया जाए राष्ट्रीय पशु, गो मांस खाना मौलिक अधिकार नहीं: इलाहाबाद हाईकोर्ट
Photo Courtesy: The Quint

प्रयागराज। इलाहाबाद हाईकोर्ट ने गोहत्या को लेकर सख्त टिप्पणी की है। उच्च न्यायालय ने भारतीय शास्त्रों, धर्मग्रंथों और पुराणों में गाय के महत्व का उल्लेख करते हुए कहा है कि गाय को राष्ट्रीय पशु घोषित करना चाहिए। न्यायालय ने केंद्र सरकार को सुझाव दिया है कि गोहत्या को रोकने के लिए संसद में विधेयक पेश करना चाहिए। कोर्ट ने तर्क दिया है कि जीवन का अधिकार मारने के अधिकार से ऊपर है। 

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने उत्तर प्रदेश में गोहत्या रोकथाम अधिनियम के तहत अपराध के आरोपी जावेद को बेल देने से इनकार करते हुए कहा है कि गो मांस खाना मौलिक अधिकार नहीं है। उच्च न्यायालय का तर्क है कि जीभ के स्वाद के लिए जीवन का अधिकार नहीं छीना जा सकता। जस्टिस शेखर कुमार यादव ने मामले की सुनवाई के दौरान यह भी कहा कि गोहत्या करने वालों को दंडित करने के लिए सख्त कानून बनाना चाहिए। 

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जस्टिस यादव ने कहा कि केवल बीफ खाने वालों के मौलिक अधिकारों को नहीं देखा जा सकता, बल्कि जो लोग गाय का पूजा करते हैं और आर्थिक रूप से गोवंश पर निर्भर हैं, उनके मौलिक अधिकारों की भी रक्षा होनी चाहिए। उन्होंने गोरक्षा को हिंदुओं के मौलिक अधिकार में शामिल करने की भी वकालत की है। हालांकि, उन्होंने यह भी कहा है कि गोरक्षा किसी एक संप्रदाय के लिए नहीं है बल्कि यह भारत की संस्कृति है। और भारतीय संस्कृति को बचाए रखना प्रत्येक नागरिक का कर्तव्य है चाहे वह किसी भी धर्म से हो।

न्यायालय ने कहा कि इतिहास में कई मुस्लिम राजाओं ने भी गोवध पर प्रतिबंध लगाया था। ऐसे पांच मुसलमान शासक रहे जिन्होंने गोवध पर रोक लगाए।बाबर, हुमायूं और अकबर ने भी अपने धार्मिक उत्सवों में गायों की बलि पर रोक लगाई थी। रसखान ने कहा जन्म मिले तो नंद के गायों के बीच मिले। गाय की चर्बी को लेकर ही मंगल पांडेय ने क्रांति की।'

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इतना ही नहीं हाईकोर्ट ने यहां तक कहा है कि हमारा देश तब ही सुरक्षित रहेगा जब गायों का कल्याण होगा। गो संरक्षण से ही देश समृद्ध होगा। जस्टिस यादव ने आगे कहा कि ऐसे सैंकड़ों उदाहरण हैं जब हमने अपनी संस्कृति भूली विदेशियों ने हमपर आक्रमण किया और हम गुलाम हो गए। उन्होंने इस बात को लेकर दुःख जताया कि कई लोग जो बातें गो संरक्षण की करते हैं लेकिन गो भक्षि बन जाते हैं। हाईकोर्ट ने कहा है कि सरकार को इस मामले पर गंभीरता से विचार करना चाहिए।