सफलता के जादुई मंत्र की तलाश में कांग्रेस, प्रशांत किशोर के रोडमैप पर हाईकमान गंभीर

प्रशांत किशोर के सुझावों पर वरिष्ठ नेताओं की मैराथन मीटिंग्स, जनरल सेक्रेटरी कम्युनिकेशंस के तौर में कांग्रेस ज्वाइन कर सकते हैं किशोर

Updated: Apr 19, 2022, 05:31 PM IST

सफलता के जादुई मंत्र की तलाश में कांग्रेस, प्रशांत किशोर के रोडमैप पर हाईकमान गंभीर

नई दिल्ली। पांच राज्यों में मिली हार के बाद कांग्रेस पार्टी में बैठकों का सिलसिला बदस्तूर जारी है। 10 जनपथ स्थित सोनिया गांधी के आवास पर लगातार हो रही इन मीटिंग्स में यह तय करने पर विचार किया जा रहा है कि प्रशांत के सुझावों पर अमल करना है या नहीं। यदि करना है तो किस हद तक और कैसे आगे बढ़ना है। चुनावी राजनीति के रणनीतिकार कहे जानेवाले प्रशांत किशोर ने 16 अप्रैल को अपनी योजनाओं का रोडमैप कांग्रेस के वरिष्ठ नेताओं के समक्ष रखा था, जिसमें जनसंचार के सभी पहलुओं पर कांग्रेस की कमज़ोरियों का और आगे बढ़ने के तरीकों का उल्लेख है।

रिपोर्ट्स के मुताबिक प्रशांत किशोर पर कांग्रेस का फैसला शुक्रवार तक सामने आ सकता है। इस बीच प्रतिदिन वरिष्ठ नेताओं को किशोर के सुझाए रास्ते और विकल्प पर अपनी बैठकें आयोजित करनी हैं, ताकि जल्द फैसला लिया जा सके। शनिवार की मीटिंग में ही यह तय किया गया था कि कांग्रेस इस मुद्दे पर एक हफ्ते के भीतर अपना फैसला लेगी। फैसले के लिए बनायी गयी कमेटी में वो सभी नेता हैं, जो शनिवार को बुलायी गई आकस्मिक मीटिंग में शामिल थे। यह कमेटी प्रशांत के रोडमैप के बारे में लगातार चर्चा कर कांग्रेस की अंतरिम अध्यक्ष सोनिया गांधी को रिपोर्ट सौंपेगी। इस बीच प्रशांत किशोर ने सोनिया गांधी से दो बार मीटिंग्स की ली है। 

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किशोर के सुझावों पर सहमति बनने के बाद जल्‍द ही उन्हें कांग्रेस पार्टी में जगह भी मिल सकती है। कयास लगाए जा रहे हैं कि प्रशांत किशोर कांग्रेस में महासचिव के पद पर ज्वाइन कर सकते हैं और उन्हें कम्युनिकेशंस का प्रभार दिया जा सकता है। उनकी 'एंट्री' का ऐलान भी इसी हफ्ते के अंत तक होने की संभावना है। 

माना जा रहा है कि हाईकमान ने सफलता के जादुई मंत्र की तलाश में प्रशांत किशोर को हेल्पिंग हैंड के रूप में पार्टी में शामिल करने का मन बना लिया है। अब कांग्रेस के दिग्गजों को कहा गया है कि वे पीके के सुझावों पर त्वरित रिपोर्ट दें। कांग्रेस नेताओं का एक पैनल जो इन बैठकों में शामिल हो रहे हैं वे या तो पीके के सुझाओं को रिजेक्ट कर सकते हैं अथवा यह बता सकते हैं कि धरातल पर पीके का फॉर्मूला कितना कामयाब होगा। साथ ही कांग्रेस चुनावों में इस रोडमैप को लेकर कैसे जाएगी।

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AICC सूत्रों के मुताबिक प्रशांत किशोर ने कांग्रेस को लोकसभा चुनाव में करीब 370 सीटों पर चुनाव लडने का सुझाव दिया है। उन्होंने यह भी सुझाव दिया है कि कांग्रेस को उत्तर प्रदेश, बिहार और ओडिशा में अकेले लड़ना चाहिए जबकि तमिलनाडु, पश्चिम बंगाल और महाराष्‍ट्र जैसे राज्यों में गठबंधन करना चाहिए।

पोल स्ट्रेटजिस्ट के रूप में प्रशांत किशोर का सफलता का रिकॉर्ड कांग्रेस के साथ ज्यादा अच्छा नहीं रहा है। खासकर 2017 में यूपी चुनावों में उनकी रणनीति बुरी तरह फेल हुई थी। इसके बाद प्रशांत किशोर के बयान भी चर्चा में रहे थे जब उन्होंने कहा था कि कांग्रेस के साथ काम करने का उनका अनुभव अच्छा नहीं रहा। हाल ही में प्रशांत के एक और बयान ने लोगों का ध्यान खींचा था जो उन्होंने कांग्रेस पर गांधी परिवार के वर्चस्व को लेकर दिया था। बहरहाल, अमरिंदर सिंह, नीतीश कुमार और खुद प्रधानमंत्री मोदी के साल 2014 में रणनीतिकार के रूप में वे खासे सफल भी रहे।