वाराणसी का हनुमानप्रसाद पोद्दार ब्लाइंड स्कूल बंद, अनिश्चितकालीन हड़ताल पर बैठे 40 छात्र कर रहे फैसला वापस लेने की मांग

यूपी का सबसे बड़ा ब्लाइंड स्कूल फंड की कमी से बंद, हनुमानप्रसाद पोद्दार ब्लाइंड स्कूल बंद होने के विरोध में 40 छात्र बेमियादी हड़ताल पर बैठे, प्रधानमंत्री के संसदीय क्षेत्र में बेहाल दिव्यांगों की कोई नहीं ले रहा सुध

Updated: Aug 03, 2021, 01:08 PM IST

वाराणसी का हनुमानप्रसाद पोद्दार ब्लाइंड स्कूल बंद, अनिश्चितकालीन हड़ताल पर बैठे 40 छात्र कर रहे फैसला वापस लेने की मांग
Photo Courtesy: twitter

वाराणसी। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के संसदीय क्षेत्र वाराणसी के दिव्यांग छात्र अपने हक की लड़ाई लड़ने में जुटे हैं। हनुमानप्रसाद पोद्दार अंधविद्यालय बंद होने के विरोध में छात्रों ने अब अनिश्चितकालीन हड़ताल करने का फैसला लिया है। छात्रों ने इस धरने की शुरुआत सोमवार से कर दी है। इस ब्लाइंड स्कूल के करीब 40 छात्र धरने पर बैठे हैं। उनकी मांग है कि उनके स्कूल का संचालन दोबारा से शुरू किया जाए।

वाराणसी के हनुमानप्रसाद पोद्दार अंधविद्यालय में कक्षा 9वीं से 12वीं तक की क्लासें बंद करने का फैसला लिया गया है। जिससे छात्रों में खासी नाराजगी है। करीब एक महीने से छात्र यहां प्रदर्शन कर रहे थे। लेकिन किसी ने इन दिव्यांगों की कोई सुध नहीं ली। अब छात्रों ने अनिश्चित कालीन हड़ताल करने का फैसला लिया है। वाराणसी स्थित BHU के पास 40 से ज्यादा दिव्यांग छात्र अनिश्चितकालीन धरने पर बैठे हैं उनका कहना है कि जब तक स्कूल प्रबंधन अपना फैसला वापस नहीं लेता तब तक उनकी हड़ताल जारी रहेगी।

दरअसल प्रदेश में 5 ब्लाइंड स्कूल हैं। हनुमानप्रसाद पोद्दार अंधविद्यालय प्रदेश का सबसे बड़ा ब्लाइंड स्कूल है, जहां 250 सीट्स हैं। इस स्कूल के संचालन की जिम्मेदारी सेवा स्मृति ट्रस्ट की है। अब ट्रस्ट ने आर्थिक तंगी और फंड की कमी का हवाला देकर कक्षा 9 से 12 तक बंद कर दी हैं। छात्रों को इसे लेकर नाराजगी है। वाराणसी के हनुमान प्रसाद पोद्दार ब्लाइंड स्कूल की स्थापना 1972 में की गई थी, जो कि सरकारी अनुदान से संचालित किया जाता रहा है। वहीं बहुत से दानदाता समय-समय पर ब्लाइंड बच्चों की पढ़ाई के लिए डोनेशन देते रहते थे।

और पढ़ें: प्रधानमंत्री मोदी के संसदीय क्षेत्र वाराणसी में फंड की कमी से दृष्टिबाधितों का ब्लाइंड स्कूल बंद, छात्रों ने किया प्रदर्शन

 

स्कूल प्रबंधन पर आरोप है कि दान की राशि का उपयोग ट्रस्ट के कार्यों में होता है। छात्रों के लिए कोई सुविधा नहीं जुटाई जाती। छात्रों का कहना है कि दिव्यागों को स्वावलंबी और आत्मनिर्भर बनाने के ब्लाइंड स्कूल खोलने चाहिए जबकि जहां इसे बंद किया जा रहा है। अब छात्र इस स्कूल को खुलावाने के लिए बेमियादी धरने पर बैठ गए हैं।