हेमा मालिनी का विवादित बयान, कहा किसानों को पता ही नहीं उन्हें क्या चाहिए

आज लोहड़ी के मौके पर कृषि कानूनों की कॉपी जला रहे हैं किसान, हेमा मालिनी के बयान पर बरसे कुमार विश्वास

Updated: Jan 13, 2021, 07:22 PM IST

हेमा मालिनी का विवादित बयान, कहा किसानों को पता ही नहीं उन्हें क्या चाहिए
Photo Courtesy : Mint

नई दिल्ली। कृषि कानूनों के खिलाफ चल रहे आंदोलन के 49वें दिन आज लोहड़ी के मौके पर किसान तीनों कानूनों की प्रतियां जला रहे हैं। इसी बीच बीजेपी सांसद हेमा मालिनी ने किसानों को लेकर फिर से विवादित बयान दिया है। हेमा मालिनी ने कहा है कि किसानों को खुद नहीं पता है कि वह क्या चाहते हैं। बीजेपी सांसद के इस बयान पर मशहूर कवि कुमार विश्वास ने उन्हें खरी खोटी सुनाई है।

दरअसल, हेमा मालिनी अपने संसदीय क्षेत्र मथुरा के वृंदावन स्थित अपने आवास पर आई हैं। इस दौरान उन्होंने न्यूज़ एजेंसी एएनआई से बात करते हुए कहा, 'नए कृषि कानूनों में कोई कमी नहीं है। लेकिन विपक्ष के बहकावे में आकर लोग आंदोलन कर रहे हैं। जो प्रदर्शन कर रहे हैं, उन्हें तो खुद पता नहीं कि वे क्या चाहते हैं और कृषि कानूनों में दिक्कत क्या है? इससे पता चलता है कि वे किसी के कहने पर प्रदर्शन कर रहे हैं।' हेमा यहीं नहीं रुकीं उन्होंने यहां तक कह डाला कि केंद्र सरकार किसानों की समस्या सुनने और उसका समाधान निकालने के लिए आतुर है लेकिन किसान ही इस विषय पर बातचीत ही नहीं करना चाहते।

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हेमा मालिनी के इस बयान का सोशल मीडिया पर जमकर विरोध हो रहा है। कवि कुमार विश्वास ने भी उनपर निशाना साधा है। विश्वास ने हेमा के बयान को साझा करते हुए मशहूर  शायर दुष्यन्त कुमार की इन पंक्तियों के जरिए तंज़ किया है,  'उनकी अपील है कि उन्हें हम मदद करें, चाकू की पसलियों से गुज़ारिश तो देखिये।'

 

 

सुप्रीम कोर्ट ने बनाई कमेटी

गौरतलब है कि कृषि कानूनों के खिलाफ लगातार तेज हो रहे आंदोलन को देखते हुए सुप्रीम कोर्ट ने कल ही तीनों कानूनों के लागू होने पर रोक लगा दी है। साथ ही बातचीत से मुद्दे को सुलझाने के लिए 4 एक्सपर्ट्स की कमेटी बनाई है। कमेटी में भारतीय किसान संघ के अध्यक्ष भूपिंदर सिंह मान, अंतरराष्ट्रीय खाद्य नीति अनुसंधान संस्थान के डायरेक्टर डॉ. प्रमोद कुमार जोशी, कृषि अर्थशास्त्री अशोक गुलाटी और महाराष्ट्र के शेतकारी संगठन के अध्यक्ष अनिल घनवट हैं। ये सभी लोग कृषि कानूनों का समर्थन करते रहे हैं।

कोर्ट ने कमेटी को 10 दिन में काम शुरू करने के आदेश दिए हैं। हालांकि, किसान संगठनों ने इस कमेटी को सरकारी करार दिया है। किसानों का कहना है कि कमेटी के सभी सदस्य इन कानूनों का खुला समर्थन करते हैं, ऐसे में यह कमेेटी निष्पक्ष कैसे हो सकती है और किसानों के मुद्दों को सही ढंग से कैसे पेश कर सकती है।