Sharad Pawar: एक व्यक्ति की आत्महत्या पर इतनी चर्चा क्यों

Majeed Memon: मौत के बाद PM नरेंद्र मोदी और अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप से भी ज्यादा मशहूर हो गए सुशांत 

Updated: Aug 13, 2020 07:36 AM IST

Sharad Pawar: एक व्यक्ति की आत्महत्या पर इतनी चर्चा क्यों
courtsey : dnaindia

मुंबई। बॉलीवुड के दिवंगत अभिनेता सुशांत सिंह राजपूत के मौत पर राजनीति थमने का नाम नहीं ले रही है। बिहार से लेकर मुंबई तक इस हाई प्रोफाइल केस में चल रही राजनीति के बीच एनसीपी नेता मजीद मेमन विवादित बयान देकर फंस गए हैं। मेमन ने बुधवार को ट्वीट कर कहा कि सुशांत अपने जीवन काल में उतने मशहूर नहीं थे जितना मौत के बाद हो गए हैं। मीडिया में उन्हें जितनी जगह मिल रही है, उतनी जगह तो हमारे पीएम मोदी या अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप को भी नहीं मिलती होगी। 

मेमन के इस बयान के बाद उनका चौतरफा विरोध शुरू हो गया है। विरोध को देखते हुए एनसीपी ने उनके बयानों से किनारा कर लिया है। पार्टी ने मेमन के इस ट्वीट को निजी टिप्पणी बताते हुए कहा है कि एनसीपी इस बयान का समर्थन नहीं करती और वह पार्टी के प्रवक्ता नहीं हैं इसलिए उनके बयानों को पार्टी से नहीं जोड़ा जाए। 

 

किसी ने किसानों की आत्महत्या पर चर्चा नहीं की

एनसीपी सुप्रीमो शरद पवार ने कहा है कि इस मामले पर आखिर इतनी चर्चा ही क्यों हो रही है। पवार ने बुधवार को मीडिया से बात करते हुए कहा, 'मैने महाराष्ट्र पुलिस को 50 साल से देखा है। दूसरों ने उनपर क्या आरोप लगाए हैं, मैं उसपर कुछ नहीं कहूंगा। अगर कोई सीबीआई जांच की मांग करता है तो मैं इसका विरोध नहीं करूंगा।' पवार ने आगे कहा कि  यह दुर्भाग्यपूर्ण है कि एक आदमी ने आत्महत्या कर ली। लेकिन इसकी इतना चर्चा क्यों हो रही है? मुझे नहीं लगता कि यह इतना बड़ा मुद्दा है। मुझे पता चला कि 20 से अधिक किसानों ने आत्महत्या की है लेकिन किसी ने इसकी चर्चा नहीं की।

पार्थ पवार की मांग को हम महत्व नहीं देते

शरद पवार ने इस दौरान अपने पोते पार्थ पवार को अपरिपक्व करार दिया है। उन्होंने कहा है कि हम पार्थ की मांग को महत्व नहीं देते क्योंकि वह अपरिपक्व हैं। गौरतलब है कि बीते दिनों महाराष्ट्र के उपमुख्यमंत्री अजीत पवार के बेटे पार्थ पवार ने गृहमंत्री अनिल देशमुख से मिलकर इस केस की सीबीआई जांच की मांग की थी। पार्थ ने कहा था कि अभिनेता सुशांत सिंह राजपूत की मौत की सही जांच होनी चाहिए, यह पूरे देश, विशेषकर युवाओं की भावना है।