35 साल बाद घर में जन्मी बेटी, तो दादा ने स्वागत में बिछाए फूल और हेलीकॉप्टर से उड़ाकर लाए घर

जन्म लेते ही बेटियों को मार देनेवाले और भ्रूण हत्या के लिए बदनाम राजस्थान में 35 साल बाद बेटी के पैदा होने पर एक शख़्स ने फसल बेचकर किया अरमान पूरा, 5 लाख रुपए खर्च कर हेलीकॉप्टर से ले आए घर

Updated: Apr 23, 2021, 05:07 PM IST

35 साल बाद घर में जन्मी बेटी, तो दादा ने स्वागत में बिछाए फूल और हेलीकॉप्टर से उड़ाकर लाए घर
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नागौर। राजस्थान के नागौर में बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ  का नायाब उदाहरण देखने को मिला है। नागौर के निम्बड़ी चांदावता गांव के एक परिवार में 35 साल बाद बेटी के जन्म की खुशियां अलग ही अंदाज में मनाई गईं। बेटी के दादा के लिए पोती का जन्म किसी सपने के पूरा होना जैसा था। उनके यहां पोती पैदा हुई तो उन्होंने उसके स्वागत की खास तैयारी की, तैयारी भी ऐसी जिसे देखने कई गांवों के लोग जमा हो गए। बच्ची का जन्म उसके ननिहाल में हुआ था। तो दादा उसे अपने घर लाने के लिए हेलीकॉप्टर लेकर पहुंचे। और पोती के स्वागत में गांव में फूल बिछाए गए, बेटी पूजा की गई, गाजे बाजे के साथ बच्ची का स्वागत किया गया। बच्ची के कदमों की छाप ली गई। बच्ची का यह अनोखा स्वागत देखने दूर-दूर के लोग जमा हुए।

बच्ची का गृह प्रवेश दुर्गा नवमी के दिन हुआ, इसलिए घरवालों ने उसका नाम सिद्धि रखा है। बच्ची के दादा मदनलाल प्रजापत का कहना है कि उनके समाज में आज भी कई ऐसे लोग हैं, जिनके यहां लड़की के पैदा होने पर लोग खुश नहीं होते, घर में उदासी छा जाती है। उनका मानना है कि बेटियां बेटों से कहीं ज्यादा बेहतर होती हैं। उन्होंने बताया कि उनकी बड़ी तमन्ना थी की उनके घर में भी बेटी की किलकारी गूंजे। 10 साल पहले ही उन्होंने तय कर लिया था कि घर में बिटिया का जन्म होने पर उसका भव्य स्वागत करेंगे। उनका सपना था कि बच्ची को हेलिकॉप्टर से ही घर लाएंगे। मदनलाल का कहना है कि उनके परिवार ने इस प्रथा की शुरूआत की है उन्हें उम्मीद है कि अब गांव-समाज के दूसरे लोग भी प्रेरणा लेकर बिटिया के जन्म पर भरपूर खुशियां मनाएंगे। बेटियों को खूब पढ़ाएंगे और उसे बोझ नहीं मानेंगे।

मदनलाल प्रजापत नागौर जिले के कुचेरा क्षेत्र के गांव निम्बड़ी चांदावता के एक साधारण किसान हैं। पोती के भव्य स्वागत के लिए उन्होंने 6-7 लाख रुपए खर्च किए। फसल बेची और पैसे जमा किए। और उसके भव्य स्वागत का खास इंतजाम किया। मदनलाल प्रजापत के बेटे हनुमान प्रजापत की पत्नी चुका देवी ने अपने मायके में तीन मार्च के बच्ची को जन्म दिया था। बच्ची को पहली बार उसके ददिहाल रामनवमी के दिन लाने की तैयारियां तभी से शुरू हो गई थीं। बच्ची के दादा पिता और कई नजदीकी रिश्तेदार नन्ही बच्ची को लिवाने धूमधाम से पहुंचे। बच्ची के स्वागत के मौके पर रिश्तेदारों का निमंत्रण किया गया।

लेकिन मदनलाल के लिए यह सब इतना आसान नहीं था, मदनलाल प्रजापत ने हेलीकॉप्टर उतारने की परमिशन के लिए नागौर जिला कलेक्टर से बाकायदा नाक रगड़ी। इसके बाद निम्बड़ी और हरसोलाव के खेतों में अस्थायी हैलिपैड तैयार किया गया। पुलिस और दमकल का भी इंतजाम किया गया। इस सब में लगभग डेढ़ लाख रुपए का खर्चा आया। वहीं हेलीकॉप्टर की बुकिंग में भी खर्चा किया गया। गांव में तैयार हैलीपैड से घर तक फूलों से सजाया गया।