ट्विन टॉवर को जमींदोज करने से पहले स्ट्रीट डॉग्स का रेस्क्यू, विस्फोट के बाद वायु प्रदूषण का खतरा

नोएडा के सेक्टर 93 A में सुपरटेक ट्विन टॉवर को ध्वस्त किए जाने के बाद मलबे से वायु प्रदूषण का खतरा और अन्य परेशानियां हो सकती है।

Updated: Aug 28, 2022, 02:16 PM IST

ट्विन टॉवर को जमींदोज करने से पहले स्ट्रीट डॉग्स का रेस्क्यू, विस्फोट के बाद वायु प्रदूषण का खतरा

नोएडा। नोएडा के सेक्टर 93 A में सुपरटेक ट्विन टॉवर अब से कुछ ही देर में गिरा दिए जाएंगे। इसकी तैयारी पूरी हो गई है और ब्लास्ट करने वाली टीम मौके पर पहुंच चुकी है। ट्विन टावर्स को जमींदोज किए जाने से पहले, कई एनजीओ के कार्यकर्ताओं ने ब्लास्ट एरिया से स्ट्रीट डॉग्स को रेस्क्यू कर सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाया।

गैर सरकारी संगठनों का एक संयुक्त दल यह सुनिश्चित करने में लगा था कि विध्वंस स्थल के आसपास एक भी स्ट्रीट डॉग न छूट जाए। एनजीओ के एक सदस्य ने कहा, 'हमने आज लगभग 30-35 कुत्तों को बचाया है। हम उनमें से हर एक को बाहर निकालने पर काम कर रहे हैं।' एक गैर-सरकारी संगठन (एनजीओ) ने अधिकारियों से क्षेत्र में पक्षियों को बचाने के लिए, ट्विन टावरों को तोड़े जाने से ठीक पहले एक 'डमी' विस्फोट या झूठमूठ की गोलीबारी करने का अनुरोध किया है।

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हाउस ऑफ स्ट्रे एनिमल्स के संस्थापक, संजय महापात्रा ने कहा कि, 'हम इन आवारा पशुओं को विध्वंस के प्रभाव से बचाने के लिए आठ अगस्त से योजना बना रहे हैं और काम कर रहे हैं। हमने संबंधित अधिकारियों से पहले दो या तीन बार झूठमूठ की गोलीबारी या 'डमी' विस्फोट करने का भी अनुरोध किया ताकि विस्फोटों के कारण पक्षी प्रभावित न हों।' 

इन टॉवर को ध्वस्त किए जाने के बाद मलबे से वायु प्रदूषण का भी खतरा है। ट्विन टॉवर के आसपास स्थित अपार्टमेंट में धूल और वायु प्रदूषण की रोकथाम के लिए 15 स्थानों पर एंटी स्मॉग गन के साथ एक वाटर टैंकर का भी इंतजाम किया गया है। वहीं जरूरत पड़ने पर और एंटी स्मॉग गन भी लगाई जाएंगी। इस ब्लास्ट के बाद धूल जमने में कितना समय लगेगा? इस सवाल का जवाब देते एक्सपर्ट्स ने कहा यदि हवा की गति सामान्य नहीं रही तो थोड़ा समय लग सकता है। वहीं ब्लास्ट के बाद करीब 55,000 टन मलबा या 3,000 ट्रक को ढोने में तीन महीने लगेंगे।

ब्लास्ट से पहले आज दोपहर 2.15 से 2.45 बजे तक ग्रेटर नोएडा एक्सप्रेसवे पर आधे घंटे के लिए ट्रैफिक रोक दिया जाएगा। ब्लास्ट वाली साइट से 100 मीटर की दूरी पर अफ्रीका के तीन विशेषज्ञ और कुछ अन्य सरकारी अधिकारी कुल 10 लोगों से अधिक मौजूद नहीं होंगे। अधिकारियों की सहायता के लिए एनडीआरएफ की दो टीमों के अलावा, 560 पुलिसकर्मियों और रिजर्व बलों के 100 से अधिक जवानों को भी तैनात किया गया है।