PM, नेता प्रतिपक्ष और CJI की कमेटी करेगी चुनाव आयुक्त का चयन, सुप्रीम कोर्ट का ऐतिहासिक फैसला

सुप्रीम कोर्ट की पांच सदस्यीय संविधान पीठ अपने फैसले में कहा कि प्रधानमंत्री, लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष और सीजेआई की कमेटी मुख्य चुनाव आयुक्त और चुनाव आयुक्तों का चयन करेगी।

Updated: Mar 02, 2023, 12:14 PM IST

नई दिल्ली। सर्वोच्च अदालत ने निर्वाचन आयुक्त की नियुक्ति पर आज ऐतिहासिक फैसला सुनाया है। अब देश के प्रधानमंत्री, लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष और चीफ जस्टिस मुख्य चुनाव आयुक्त और अन्य चुनाव आयुक्तों का चयन करेंगे। जस्टिस के एम जोसेफ ने यह फैसला सुनाते हुए कहा कि लोकतंत्र को बनाए रखने के लिए चुनाव प्रक्रिया की शुद्धता बनाए रखी जानी चाहिए अन्यथा इसके विनाशकारी परिणाम होंगे।

न्यायमूर्ति केएम जोसेफ की अध्यक्षता वाली पांच सदस्यीय संविधान पीठ ने निर्वाचन आयुक्तों की नियुक्ति के लिए कॉलेजियम जैसी व्यवस्था बनाने की मांग करने वाली याचिकाओं पर गुरुवार को अपना फैसला सुनाया। संविधान पीठ ने अपने फैसले में कहा कि मुख्य चुनाव आयुक्त और चुनाव आयुक्तों की नियुक्ति एक तीन सदस्यीय कमेटी करेगी। इस कमेटी में देश के प्रधानमंत्री, लोकसभा में नेता विपक्ष या सबसे बड़ी विपक्षी पार्टी के नेता और सुप्रीम कोर्ट के चीफ जस्टिस शामिल होंगे।

यह भी पढ़ें: अडानी मामले में सुप्रीम कोर्ट ने गठित की कमेटी, रिटायर्ड जज एएम सप्रे करेंगे अध्यक्षता

हालांकि, नियुक्ति का अधिकार राष्ट्रपति के पास ही रहेगा। यह कमेटी राष्ट्रपति को सिफारिश करेगी और राष्ट्रपति इस पैनल की सिफारिश पर आखिरी फैसला लेंगे। जस्टिस के एम जोसेफ ने कहा कि लोकतंत्र को बनाए रखने के लिए चुनाव प्रक्रिया की स्पष्टता बनाए रखी जानी चाहिए। नहीं तो इसके अच्छे परिणाम नहीं होंगे। उन्होंने कहा कि डेमोक्रेसी बहुत महीन तरीके से लोगों की ताकत से जुड़ी है। इन्हें अलग नहीं किया जा सकता है। हमें अपने दिमाग में एक ठोस और उदार डेमोक्रेसी का हॉलमार्क लेकर चलना होगा। 

उन्होंने आगे कहा कि वोट की ताकत सुप्रीम है, इससे मजबूत से मजबूत पार्टियां भी सत्ता हार सकती हैं। इसलिए इलेक्शन कमीशन का स्वतंत्र होना जरूरी है। यह भी जरुरी है कि यह अपनी ड्यूटी संविधान के प्रावधानों के मुताबिक और कोर्ट के आदेशों के आधार पर निष्पक्ष रूप से कानून के दायरे में रहकर निभाए।

बता दें कि पिछली सुनवाई में सुप्रीम कोर्ट ने CEC और EC की नियुक्ति प्रक्रिया पर सवाल उठाया था। कोर्ट ने मामले में केंद्र से चुनाव आयुक्तों की अपॉइंटमेंट की फाइल मांगी थी। अदालत के आदेश के बाद केंद्र सरकार ने चुनाव आयुक्त अरुण गोयल के अपॉइंटमेंट की ओरिजिनल फाइल सुप्रीम कोर्ट को सौंपी। फाइल देखने के बाद कोर्ट ने केंद्र से कहा था कि चुनाव आयुक्त के अपॉइंटमेंट की फाइल बिजली की तेजी से क्लियर की गई। यह कैसा मूल्यांकन है। सवाल उनकी योग्यता पर नहीं है। हम अपॉइंटमेंट प्रोसेस पर सवाल उठा रहे हैं।