दफ्तर दरबारी: सियासी मैदान में पिछड़ रही उमा भारती का आईएएस अफसरों पर हमला 

क्‍या उमा भारती हताश हैं जो आईएएस अफसरों के बहाने शिवराज सरकार को घेरना शुरू कर दिया है। इधर, एमपी की एक युवा आईएएस क्‍यों कहने को मजबूर हुई है कि मैं जिंदा हूं। इसबीच, नए मुख्‍य सचिव के नाम और रिटायरमेंट के बाद सीएस इकबाल सिंह बैंस के पुनर्वास की क्‍या अटकलें हैं।

Updated: Nov 05, 2022, 12:05 PM IST

दफ्तर दरबारी: सियासी मैदान में पिछड़ रही उमा भारती का आईएएस अफसरों पर हमला 
शिवराज सिंह चौहान और उमा भारती

शराबबंदी को लेकर कभी आक्रामक बयान तो कभी पत्‍थर उठा लेने वाली पूर्व मुख्‍यमंत्री उमा भारती की मंशा क्‍या है? यही कि वे राजनीति में फिर सक्रिय होना चाहती हैं। अपने समर्थकों को महत्‍वपूर्ण पदों पर पहुंचाना चाहती हैं। चुनाव लड़ने की मंशा में खुले तौर पर जता चुकी हैं। मगर बीजेपी ने उन्‍हें अधिक तवज्‍जो दी नहीं। जब उनकी बातें अनसुनी हुई तो उन्‍होंने तीखी भाषा को अपना लिया। शराब को लेकर सरकार पर हमले किए। यहां तक कि शराब दुकानों पर पत्‍थर भी फेंके। ओरछा कि शराब दुकान को लेकर कह दिया कि ओरछा के मुहाने पर देसी विदेशी शराब की बड़ी भारी दुकान मेरी रामभक्ति को चुनौती देती है। यहां जो घटेगा वह पूरे मध्यप्रदेश के लिए उदाहरण होगा, देखते हैं क्या होता है।

शराब बंदी को लेकर घर छोड़ देने की घोषणा कर चुकी उमा भारती ने सोशल मीडिया पर तीखे बोल जरूर बोले हैं मगर जब-जब मुख्‍यमंत्री शिवराज सिंह चौहान से मुलाकात हुई उनके तेवर ठंडे ही हुए हैं। उनके इस बर्ताव को राजनीतिक महत्‍वाकांक्षा पूर्ण करने के जतन ही माने गए हैं। हर बार देखा गया है कि फायर ब्रांड नेता कही जाने वाली उमा भारती केवल गरजी ही हैं, बरसी नहीं हैं। इस कारण कांग्रेस तो ठीक अपनी पार्टी बीजेपी में ही उनकी किरकिरी हो रही है। 

इस सियासी प्रतिद्वंद्विता में पिछडती दिखाई दे रही उमा भारती ने दूसरे मोर्चे पर सरकार को घेरना शुरू कर दिया है। यह मोर्चा है अफसरशाही का। यह जानने और मानने वाले बहुत लोग हैं कि मुख्‍यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ब्‍यूरोक्रेसी से संचालित होते हैं। यही वजह है कि उमा भारती ने अब आईएएस अफसरों के जरिए सरकार की परेशानी बढ़ानी शुरू की है। मुख्‍यमंत्री शिवराज सिंह चौहान की उपस्थिति में आयोजित लाड़ली लक्ष्‍मी कार्यक्रम में महिला एवं बाल विकास विभाग के प्रमुख सचिव आईएएस अशोक शाह ने एक तथ्‍य क्‍या बताया कि उमा भारती उन पर टूट पड़ी। 

दरअसल, लाड़ली लक्ष्मी योजना 2.0 के शुभारंभ पर महिला एवं बाल विकास विभाग के प्रमुख सचिव अशोक शाह ने कहा कि 2005 में 15% माताएं बेटियों को दूध पिलाती थी, अब 42% माताएं अपनी बेटियों को दूध पिलाती है। प्रमुख सचिव अशोक शाह लाड़ली लक्ष्‍मी योजना की सफलता व बाल मृत्‍यु दर घटाने के सरकार के प्रयासों को बता रहे थे। इस बयान को उमा भारती ने मातृशक्ति की छवि खराब करने वाला बताया है। उमा भारती ने कहा कि अगर यह कथन सही छपा है तो यह बेटी विरोधी, माता विरोधी एवं मध्यप्रदेश की मातृशक्ति की छवि खराब करने वाला है। अमीर हो या गरीब, बेटा हो या बेटी, बच्चे के जन्मते ही हर मां अपने बच्चे को दूध पिलाती ही है। 

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अफसर को टारगेट करते हुए उमा भारती ने कहा कि मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान महिलाओं के सम्मान के लिए बहुत सजग एवं संवेदनशील हैं। जब मैंने आज फोन पर बात करके उनको यह बात बताई तो वह इस कथन से असहमत एवं आश्चर्यचकित थे। मुख्यमंत्री की बात से लगा कि समारोह में बहुत शोर के कारण वह इस बात को सुन नहीं पाए। मुझे लगता है कि वह इस कथन को ठीक करने का रास्ता स्वयं निकाल लेंगे।

बात केवल एक अफसर के बयान की नहीं है। अफसरों के भ्रष्‍टाचार के बहाने भी उमा ने शिवराज सरकार को घेरा है। जब लोकायुक्‍त ने कभी मुख्‍यमंत्री शिवराज सिंह चौहान के पसंदीदा अफसर रहे राधेश्‍याम जुलानिया पर भ्रष्‍टाचार की शिकायत पर जांच शुरू की तो उमा भारती को जैसे एक और मौका मिल गया। उमा भारती ने ट्वीट कर कहा कि केन बेतवा प्रोजेक्ट अटकाने में जुलानिया की महत्वपूर्ण भूमिका रही थी। उमा भारती ने अपने ट्वीट में कहा कि प्रदेश के एक पूर्व वरिष्ठ अधिकारी पर लोकायुक्त ने भ्रष्टाचार का केस दर्ज किया गया है, मैं शिकायतकर्ता का अभिनंदन करती हूं। आपको याद होगा कि करीब तीन महीने पहले मैं केन-बेतवा पर इस व्यक्ति का जिक्र करते हुए ट्वीट कर चुकी हूं।

उन्होंने कहा कि मैंने दो अधिकारियों का जिक्र किया था, जिनकी वजह से केन-बेतवा प्रोजेक्ट 2017 में रेडी होते हुए भी शुरू नहीं हो सका उसमें यह एक व्यक्ति था। मैंने उस समय के मुख्य सचिव से मुख्यमंत्री के सामने ही इस अधिकारी को जल संसाधन मंत्रालय से हटाने को कहा था एवं वह हट भी गया। मेरा विभाग बदलते ही वह जल संसाधन में वापस हुआ यह भी एक आश्चर्य का विषय है कि ऐसे लोग प्रभावशाली जगहों पर मौजूद कैसे रह सके।

मुख्यमंत्री के नजदीक रहने वाले दो आईएएस अधिकारियों को केन बेतवा प्रोजेक्ट में देरी का कारण बताने वाली उमा भारती ने भ्रष्‍ट अफसर की पद पर वापसी पर सवाल उठा कर सरकार की मंशा को ही संदिग्‍ध करार दिया है। यह सीधे-सीधे सरकार पर हमला है कि क्‍यों भ्रष्‍ट अधिकारियों को प्रश्रय दिया गया। उमा भारती के ये तेवर बताते हैं कि राजनीतिक बिसात पर कुछ पांसें कमजोर पड़े हैं तो क्‍या, वे इतनी जल्‍दी मुकाबले से हटने वाली नहीं हैं। 

रिटायरमेंट के बाद इकबाल सिंह बैंस का क्‍या होगा 

मुख्‍य सचिव इकबाल सिंह बैंस का रिटायरमेंट करीब आ रहा है। 30 नवंबर 2022 को बतौर आईएएस उनका आखिरी दिन है। पिछले छह माह से अटकलें लगाई जा रही हैं कि मुख्‍यमंत्री शिवराज सिंह चौहान पहले के मुख्‍य सचिव की तरह वर्तमान मुख्‍य सचिव के कार्यकाल को भी छह माह बढ़ाने की पैरवी करेंगे। विधानसभा चुनाव 2023 को देखते हुए ऐसा संभव भी लगता है। मगर शिवराज सरकार ने अब तक अपने पत्‍ते नहीं खोले हैं। 

जैसे-जैसे 30 नवंबर करीब आ रहा है, प्रशासनिक गलियारों में नए मुख्‍य सचिव के नाम को लेकर कई चर्चाएं चल पड़ी हैं। सबसे मुख्‍य दावेदारों में दिल्‍ली में पदस्‍थ वरिष्‍ठ आईएएस अनुराग जैन माने जा रहे हैं। दीपावली पर अनुराग जैन सपरिवार भोपाल आए थे। उन्‍होंने मुख्‍यमंत्री शिवराज सिंह चौहान सहित मुख्‍य सचिव तथा अन्‍य अफसरों से मुलाकात की थी। इसे एक संकेत माना जा रहा है अनुराग जैन मुख्‍य सचिव हो सकते हैं। 

अगले एक पखवाड़े में यह फैसला होना है कि इकबाल सिंह बैंस मुख्‍य सचिव बने रहेंगे या उनकी जगह कोई और आएगा। इसके साथ यह अटकलें भी हैं कि बैंस रिटायर्ड होंगे तो उनका पुनर्वास कहां होगा? आम तौर पर सीएस को रिटायरमेंट के बाद राज्‍य चुनाव आयोग का मुखिया बना दिया जाता है। पूर्व सीएस बीपी सिंह को रिटायर होने के तुरंत बाद 1 जनवरी 2019 में राज्‍य निर्वाचन आयुक्‍त नियुक्‍त किया गया था। इसके पहले आर. परशुराम को भी निर्वाचन आयुक्‍त ही बनाया गया था। कांग्रेस सरकार में मुख्‍य सचिव रहे दो आईएएस एम. गोपाल रेड्डी और एसआर मोहंती का पुनर्वास नहीं हुआ है। 

अब देखना है कि मुख्‍यमंत्री शिवराज सिंह चौहान अपने प्रिय अफसर इकबाल सिंह बैंस का कार्यकाल बढ़वाएंगे या उन्‍हें किसी अन्‍य महत्‍वपूर्ण पद पर नियुक्‍त करेंगे। परंपराग रूप से बैंस को राज्‍य निर्वाचन आयुक्‍त बनाने में वर्तमान आयुक्‍त बीपी सिंह का कार्यकाल बाधा बन रहा है। बीपी सिंह को 1 जनवरी 2019 में 6 वर्ष या 66 वर्ष की उम्र तक नियुक्ति मिली है। 1958 में जन्‍मे बीपी सिंह के कार्यकाल में अभी दो वर्ष बकाया है। ऐसे में यदि बैंस का पुनर्वास निर्वाचन आयोग में हुआ तो बीपी सिंह को हटाना पड़ेगा। नजरें टिकी हैं कि इकबाल सिंह बैंस को फिट करने के फेर में कौन ‘आउट’ होगा? 

आईएस सृष्टि देशमुख को क्‍यों कहना पड़ रहा है, जिंदा हूं मैं
 

2019 बैच की आईएएस सृष्टि देशमुख गौंडा इन दिनों खुद को जिंदा साबित करने में जुटी हैं। गाडरवाड़ा में बतौर एसडीएम पदस्‍थ सृष्टि देशमुख गौंडा तब अचरज में पड़ गईं जब उन्‍हें श्रद्धांजलि की सूचनाएं मिलने लगी।

हुआ यूं कि कुछ यू-ट्यूब चैनल पर आईएएस सृष्टि देशमुख गौंडा की फोटो के साथ उनके निधन की जानकारी दी गई। उनके फोटो पर माला और विलाप करते लोगों को देख दर्शकों ने इसे सच मान कर खबर की पड़ताल शुरू की तो पता चला कि आईएएस सृष्टि देशमुख स्‍वस्‍थ हैं तथा अपने कार्यस्थल पर तैनात हैं। यू-ट्यूब से होते हुए ये वीडियो सोशल मीडिया पर भी वायरल हो गए। 

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इस झूठ से परेशान हो कर तथा इसके पीछे की साजिश को उजागर करने के लिए आईएएस सृष्टि देशमुख गौंडा ने पुलिस की मदद मांगी है। साइबर सेल को शिकायत करने के साथ ही उन्‍होंने नरसिंहपुर एसपी से भी दोषियों का पता लगाने का आग्रह किया है। सृष्टि देशमुख को परेशान करने का यह दूसरा मामला है। इसके पहले उनकी 12 वीं की एक कथित मार्कशीट वायरल की गई थी। संभव है कि उनकी कार्यप्रणाली से नाराज लोग उन्‍हें तंग करने के उद्देश्‍य से ऐसे हथकंड़े अपना रहे हैं। 

आईएएस राजीव शर्मा की नर्मदा पदयात्रा से बदलेंगे दिन  

शंकराचार्य और परशुराम पर उपन्‍यास लिख कर चर्चित हो चुके आईएएस और शहडोल के कमिशनर राजीव शर्मा इनदिनों तीन दिन की पदयात्रा पर हैं। नर्मदा नदी के किनारे के क्षेत्रों की पदयात्रा करते हुए वे ग्रामीणों को नर्मदा नदी को स्वच्छ बनाए रखने का संदेश देने के साथ ही गांव में रात बिताकर समस्याओं से रूबरू होंगे। नर्मदा परिक्रमा करने वाले श्रद्धालुओं को मिलनेवाली सुविधाओं का उपयोग करेंगे और ग्रामीणों के साथ रात बिताकर समस्याओं से रूबरू होंगे।

कमिश्नर शर्मा ने कहा है कि श्रद्धालु नर्मदा परिक्रमा और स्नान के लिए आते हैं लेकिन कई बार हम और हमारे अधिकारी नर्मदा किनारे के गांवों तक नहीं पहुंच पाते। इससे नहीं पता चलता कि आने वाले श्रद्धालुओं को किन दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। तीन दिवसीय पदयात्रा के दौरान आईएएस राजीव शर्मा ग्रामीणों और अन्य श्रद्धालुओं के साथ ठहरेंगे। 

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संभव है उनका यह कदम नर्मदा परिक्रमावासी श्रद्धालुओं की पीड़ा को जान-समझ कर उन समस्‍याओं के उपाय करने में महत्‍वपूर्ण साबित हो। साथ ही नर्मदा पर आए संकट का प्रशासनिक स्तर पर समाधान खोजने की भी आस है। यूं भी शहडोल से निकली नर्मदा नदी गुजरात में समुद्र में मिलने से पहले अनेक स्‍थानों पर प्रदूषण, रेत खनन, अवैध अतिक्रमण, गंदे नाले, जहरीले रसायनों को मिला दिए जाने के कारण अस्तित्‍व का संकट भोग रही है। प्रदेश की जीवन रेखा कही जाने वाली नर्मदा नदी अपने उद्गम से कुछ दूरी पर ही प्रदूषित होना शुरू हो जाती है। कमिश्‍नर राजीव शर्मा अपने कार्यकाल में इस दिशा में कुछ कर पाए तो यह उनके कॅरियर का सितारा उपलब्धि होगी।