लोक आस्था के पर्व छठ की मची धूम, शाम को अस्ताचलगामी सूर्य को अर्घ्य देंगी महिलाएं

छठ पर परिवार और संतान की सुख समृद्धि की कामना से महिलाएं कर रहीं निर्जला व्रत, बांस की डलिया में सभी तरह के फल, मेवा मिष्ठान रखकर जलाशयों के किनारे होगी पूजा

Updated: Nov 10, 2021, 12:39 PM IST

लोक आस्था के पर्व छठ की मची धूम, शाम को अस्ताचलगामी सूर्य को अर्घ्य देंगी महिलाएं
Photo courtesy: Jansatta

सूर्य उपासना के महापर्व छठ का तीसरा दिन आज है। बुधवार शाम महिलाएं ढ़लते सूर्य को अर्घ्य देंगी। मंगलवार को महिलाओं ने खरना की रस्म निभाई। छठ व्रतियों ने गुड़, दूध और चावल से बनी खीर का प्रसाद ग्रहण किया। इसे प्रसाद को ग्रहण करने से पहले छठ व्रतियों ने स्नान-ध्यान कर छठ माता को को भोग लगाकर खरना किया। मंगलवार से छठ व्रतियों का 36 घंटे का निर्जला छठ व्रत शुरू हो चुका है। अब बुधवार शाम को अस्ताचलगामी सूर्य को पानी में खड़े रहकर अर्घ्य दिया जाएगा। वहीं गुरुवार सुबह व्रती उगते हुए सूर्य को अर्घ्य देकर पारण करेंगे। छठ की छटा हर जगह दिखाई दे रही है। जलाशयों के घाटों पर छठ मइया के पारंपरिक भोजपुरी लोकगीतों का गायन किया जाएगा। घाटों और कुंड पर लोग पूजा की तैयारी में लगे हैं। 

लोक आस्था का पर्व छठ पूजा 4 दिनों तक चलता है। यह व्रत माताएं अपने परिवार और संतान की सुख-समृद्धि,अरोग्यता और लंबी आयु की कामना के लिए रखती हैं। छठ के दिन सूर्य देवता को अर्घ्य देने से पहले नदियों के किनारे महिलाएं परिवार समेत एकत्रित होती है। वहां पर बांस की डलिया और सूप में फल, ठेकुआ, लड्डू, नारियल और पूजा का सामान रखकर सूप में आकर्षक ढंग से सजाया जाता है। व्रती महिलाएं छठी माई की विधि विधान से पूजा अर्चना करती हैं। फिर ढ़लते सूर्य को अर्घ्य देते हुए अपने परिवार के सुख समृद्धि की कामना करती हैं। छठ पर्व पर सूर्य देवता को अर्घ्य देने के लिए तांबे के पात्र का प्रयोग करना शुभ माना जाता है।

 पूजा की डलिया में पत्ते लगे गन्ने, पानी वाला नारियल, धूप, दीप, चावल, सिंदूर, दीपक, अदरक का हरा पौधा, हल्दी, मूली, मिठाई, नींबू, सेब, शरीफा, केला, नाशपाती, अन्नानास, शकरकंद, गुड़, चावल का आटा, गेहूं,पान, सुपारी, शहद, कुमकुम, चंदन रखना शुभ होता है।

छठ पूजन का मुहूर्त

10 नवंबर 2021 को संध्या अर्घ्य सूर्यास्त का समय 17:30:16

11 नवंबर सुबह उषा अर्घ्य सूर्योदय का समय :06:40:10

छठ पूजा का प्रसाद बनाते समय नमकीन चीजों के गलती से भी स्पर्श न करें। पूजा को लेकर मांगी गई अपनी मन्नत नहीं भूलें। सूर्य को अर्घ्य देने के लिए चांदी, प्लास्टिक, स्टील या शीशे के बर्तन का उपयोग कतई नहीं करें।  कार्तिक मास के शुक्ल पक्ष की सप्तमी के दिन उगते सूरज को अर्घ्य देकर नियम पूर्वक पूजा के बाद छठ माता के गीत गाए जाते हैं। प्रसाद घाटों पर बांटा जाता है। ऐसा करने से छठ माता की विशेष कृपा मिलती है।