रक्षाबंधन पर कैसे मिलेगी सुख समृद्धि, राखी बांधने का शुभ मुहुर्त जानें यहां

बहनें भाई की कलाई पर राखी बांधकर भाइयों की आयु, स्वास्थ्य, धन, यश, कीर्ति, विद्या, बुद्धि के विकास की कामना करेंगी, भाई बहन की रक्षा का संकल्प करेंगे

Publish: Aug 22, 2021, 12:05 AM IST

रक्षाबंधन पर कैसे मिलेगी सुख समृद्धि, राखी बांधने का शुभ मुहुर्त जानें यहां
Photo courtesy: ichowk

व्रत, पर्व और त्योहार का संगम रक्षाबंधन सनातन संस्कृति दिवस के रूप में मनाया जाता है। पूर्णिमा तिथि होने की वजह से इस दिन पूर्णिमा का व्रत रखा जाता है। सनातन संस्कृति वेद के अनुयायी इस दिन हेमाद्री दस विधि स्नान कर श्रावणी पर्व मनाते हैं। वहीं बहनें अपने भाइयों की कलाइयों पर राखी बांधकर रक्षाबंधन का त्यौहार मनाती हैं, इस तरह रक्षाबंधन का दिन व्रत, पर्व और त्यौहार का संगम है।

इस वर्ष रक्षाबंधन 22 अगस्त श्रावण पूर्णिमा रविवार के दिन मनाया जा रहा है, आकाश मंडल के आकाशीय ग्रह बुधादित्य योग, गजकेसरी योग, शोभन एवं मातंग योग की छाया प्रदान करेंगे। सभी शुभ योगों के अलावा पूर्णिमा के दिन होने वाला भद्रा योग का प्रभाव सूर्योदय के पहले ही समाप्त हो जाएगा। इसी के साथ सूर्योदय से सूर्यास्त तक रक्षाबंधन का यह त्रिसंगम व्रत, पर्व और त्यौहार शुभ फलकारी रहेगा।

रक्षाबंधन का शुभ मूहुर्त

रक्षाबंधन पर पूरे दिन शुभ मुहूर्त है। जिसकी शुरुआत सूर्योदय से सिंह लग्न में होगी एवं सूर्यास्त गोधूलि बेला काल में धनु लग्न तक शुभ मुहूर्त ही रहेगा। ज्योतिष मठ संस्थान, भोपाल के ज्योतिषाचार्य पंडित विनोद गौतम के अनुसार रविवार को दोपहर में अभिजीत काल मुहूर्त 11:30 से 12:30 तक रहेगा, चौघड़िया मुहूर्त में चर का चौघड़िया 7:30 से प्रातः 9:00 बजे तक लाभ 9:00 से 10:30 तक अमृत 10:30 से 12:00 बजे दोपहर एवं शुभ का चौघड़िया 130 से 3:00 बजे तक रहेगा।

दोपहर 12:00 बजे से 1:30 बजे तक काल का चौघड़िया छोड़कर पूरे दिन भाइयों की रक्षा हेतु बहनें राखी बांधकर भाइयों की आयु, स्वास्थ्य, धन, यश, कीर्ति, विद्या, बुद्धि एवं संस्कृति की रक्षा करेंगी।

 रक्षाबंधन के मौके पर ब्राह्मणों द्वारा भी अपने यजमानों को रक्षासूत्र बांधकर उनकी रक्षा का संकल्प लेते हैं। वहीं यजमान भी अपने पंडित, गुरु को दक्षिणा भेंट करते हैं। इस प्रकार से बहनें अपने भाइयों की सनातन संस्कृति की रक्षा करती हैं।

 हिंन्दू धर्म के प्रमुख त्योहारों में रक्षाबंधन को शास्त्रों में व्रत, पर्व, त्यौहार का संगम कहा गया है। रक्षाबंधन के दिन रक्षासूत्र वैदिक राखी, श्रीफल, मिष्ठान, आरती, तिलक, ऋतु फल, सूखे मावे आदि जो भी यथाशक्ति उपलब्ध हो थाली में सजा कर व्रत त्योहार मनाने का संकल्प करें। सर्व प्रथम भगवान गणेश को रक्षा सूत्र, कलावा, राखी अर्पण कर मंत्र पढ़ें। येन बद्धो बली राजा दानवेंद्रो महाबला तेंनित्यप्रतिबद्धनामी । रक्षे मा चल माचल,, ।। रक्ष रक्ष गणाध्यक्षय रक्ष त्रिलोक रक्षिका ।

आसन बिछाकर भाई को पूर्वा दिशा की ओर मुंह करके होकर बैठा ले, सिंचित आचमन कराकर तिलक लगावें, इसके बाद रक्षा सूत्र राखी बांधकर श्रीफल ,ऋतु फल, मिष्ठान आदि देकर आशीर्वाद प्रदान कर आरती करें। इससे रक्षा सूत्र परम सिद्ध हो कर आपके भाई की रक्षा करेगा। बहन द्वारा बांधा गया रक्षा सूत्र सुख, शांति, समृद्धि के साथ सनातन संस्कृति, धन ,वैभव, यश ,कीर्ति ,विद्या, बुद्धि,स्वास्थ्य,आयु, संतति, एवं सौभाग्य की रक्षा करेगा। इस प्रकार से माताएं बहने शक्ति स्वरूपा कलावा राखी बांधकर  अपने भाइयों के कष्टों का हरण करती हैं, पंडित आचार्य कलावा रक्षा, सूत्र बांधकर अपने यजमान को  रक्षा प्रदान करते हैं।