झीरम घाटी हमले के 8 बरस बाद भी दोषियों को नहीं मिली सजा, वरिष्ठ कांग्रेस नेताओं समेत 30 लोगों की गई थी जान

25 मई 2013 को छत्तीसगढ़ कांग्रेस के अग्रिम पंक्ति के नेताओं समेत 30 लोगों की हुई थी हत्या, कांग्रेस नेताओं समेत 30 लोगों की शहादत को मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने किया याद, सीएम का झलका दर्द बोले हमें याद है कि अभी शहीदों को न्याय नहीं मिला है और यह कार्य अधूरा है।

Updated: May 25, 2021, 11:28 AM IST

झीरम घाटी हमले के 8 बरस बाद भी दोषियों को नहीं मिली सजा, वरिष्ठ कांग्रेस नेताओं समेत 30 लोगों की गई थी जान
Photo courtesy: twitter

रायपुर। झीरम घाटी हमले की आज 8वीं बरसी है। आज ही के दिन दरभा-झीरम घाटी में नक्सलियों ने काली करतूत को अंजाम दिया था। 25 मई 2013 को नक्सलियों कांग्रेस की परिवर्तन यात्रा को निशाना बनाया था। जिसमें 30 लोगों की मौत हो गई थी। इस परिवर्तन यात्रा में छत्तीसगढ़ कांग्रेस के प्रथम पंक्ति के नेता मौजूद थे। पूर्व केंद्रीय मंत्री विद्याचरण शुक्ल, तत्कालीन प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष नंदकुमार पटेल, दिनेश पटेल, दिनेश नंदकुमार के बेटे थे। वहीं पूर्व मंत्री महेंन्द्र कर्मा, पूर्व विधायक उदय मुदलियार समेत कांग्रेस के दिग्गज नेता, कार्यकर्ता, जवानों की विभत्स हत्या की थी। नक्सलियों ने कांग्रेस नेताओं के शवों के टुकड़े कर दिए थे। 

मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने झीरम घाटी हमले में मारे गए नेताओं श्रद्धांजलि देते हुए याद किया है।  उन्होंने ट्वीट में इस बात का जिक्र भी किया है कि कांग्रेस अपने नेताओं के सपनों को लेकर आगे बढ़ रही है। साथ ही उन्होंने यह बात भी दोहराई है कि अभी शहीदों को न्याय नहीं मिला है और यह काम अबतक अधूरा है।

 

सुकमा ज़िले से जगदलपुर के लिए 25 मई 2013 को कांग्रेस की परिवर्तन यात्रा निकली थी, तभी  दरभा थाने से महज चंद किलोमीटर दूर नेशनल हाइवे पर नक्सलियों कांग्रेस के काफिले पर हमला कर दिया। जिसमें 30 लोगों ने अपनी जान गंवाई थी।

झीरम घाटी हमले के 8 साल के बाद दोषी आजाद घूम रहे हैं, दोषियों को सजा नहीं मिली है। इस हमले में कई बड़े नक्सली नेता शामिल थे। जो कि अब तक खुले घूम रहे हैं। इस नक्सली हमले की जांच नेशनल इनवेस्टिगेशन एजेंसी (NIA) को सौंपी गई थी। यह जांच 6 साल से हो रही है। इस जांच के दौरान NIA ने 39 नक्सलियों के खिलाफ दो चार्जशीट पेश की हैं। वहीं अब तक मजह 9 नक्सलियों की गिरफ्तारी हुई है। इतने साल बाद भी जांच एजेंसी घटना के पीछे के मकसद का कोई खुलासा नहीं कर पाई है। वहीं इस मामले में राजनीति भी जारी है।

बीजेपी और कांग्रेस के अपने-अपने तर्क हैं। कांग्रेस NIA की जांच पर लगातार सवाल उठाती रही है। कांग्रेस का आरोप है कि NIA तत्कालीन बीजेपी सरकार की गलतियों पर पर्दा डालने की कोशिश कर रही है। वह रमन सिंह सरकार की लापरवाही छिपाने में लगी रही। जांच एजेंसी ने हमले में घायलों के बयान नहीं लिए। कांग्रेस ने आरोप लगाया था कि इस नक्सली हमले के मास्टर माइंड नक्सलियों के नाम हटा दिए गए है। NIA पर आरोप है कि उसने मास्टर माइंड नक्सली नेता गणपति और रमन्ना को बचाने की कोशिश की है, उनके नाम किसी दबाव में आकर चार्ज शीट से हटा दिए हैं।