मध्यप्रदेश में सब्जियों के दाम आसमान पर, शतक लगाने की तैयारी में टमाटर

टमाटर की बढ़ती डिमांड, और महंगे परिवहन लागत ने बढ़ाई कीमतें, आम लोगों के घर का बिगड़ा बजट, थालियों से गायब हो रहा सब्जियों का पोषण

Updated: Nov 23, 2021, 04:44 PM IST

मध्यप्रदेश में सब्जियों के दाम आसमान पर, शतक लगाने की तैयारी में टमाटर
Photo courtesy: bhopal samachar

भोपाल। महंगाई अपने चरम पर है, रोटी, कपड़ा सब मंहगा हो रहा है। इनदिनों देश के अन्य राज्यों की तरह मध्य प्रदेश में सब्जियों के दाम आसमान छू रहे हैं। जिसमे टमाटर तो शतक लगाने की तैयारी में है। भोपाल की विभिन्न सब्जी मंडियों में टमाटर 75 से 90 रुपए किलो में बिक रहा है। इसी के साथ अन्य सब्जियों के दाम भी बढ़े हैं। मटर 120-140 रुपए किलो, भिंडी 80-90, आलू 30-40 रुपए किलो, अदरक 60-80 रुपए किलो, लौकी 50-60 रुपए किलो, गोभी 45-50 रुपए किलो बिक रहा है। सर्दी के मौसम मे घरों की शान कही जाने वाली हरी पत्तेदार सब्जियां लोगों के मुंह का जायका बिगाड़ रही है। मेथी 25-30 रुपए गड्डी बिक रही है। लगातार बढ़ते दामों की वजह से आम आदमी के किचन का बजट गड़बड़ा गया है। शादियों से सीजन और कम आवक के कारण टमाटर बाजार में कम हैं। यही वजह है कि वह महंगे दामों मे बिक रहा है।

यही हाल देश के अन्य इलाकों का भी मीडिया रिपोर्ट्स की मानें तो अंडमान निकोबार की राजधानी पोर्ट ब्लेयर में टमाटर 113 रुपए प्रति किलोग्राम पर बिक रहा है। जयपुर में 90-100 रुपए, दिल्ली में अलग-अलग बाजारों में 65 से 90 रुपए प्रति किलो, रायपुर में 60-80 रुपए प्रति किलो बिक रहा है। 

मध्यप्रदेश समेत अन्य राज्यों में लगातार सब्जियों और फलों की कीमतों में बढोतरी के पीछे कम आवक और महंगे परिवहन को दोष दिया जा रहा है। केरल, तमिलनाडू समेत कई राज्यों में बिगड़े मौसम की वजह से टमाटर की आवक कम हो रही है। वहीं रही सही कसर पेट्रोल और डीजल की कीमतें पूरी कर रही है। सब्जियों की लागत में परिवहन शुल्क जोड़कर वसूला जा रहा है।

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अब इससे लोगों को खासी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। भोपाल में सब्जी खरीदने वाली महिलाओं की मानें तो इनकी आसमान छूती कीमतों से घर चलाना मुश्किल हो रहा है। वे सरकार से महंगाई का समाधान खोजने की अपील कर रही हैं।बढ़ते सब्जियों के दामों से व्यापारी भी परेशान हैं, उनका कहना है कि पेट्रोल डीजल के दाम बढ़ने से गांवों से मंडियों तक सब्जियों के परिवहन के रेट्स बढ़ गए हैं, जिसे किसान सब्जियों में जोड़कर ही व्यापारियों को बेच रहे हैं। किसानों का कहना है कि उनकी उपज में कोई मुनाफा नहीं मिल रहा है, सारी पूंजी सब्जियों की खेती और परिवहन में खर्च हो रही है। कई किसान लागत तक नहीं निकलने से परेशान हैं।

किसानों की मानें तो सब्जियों की खेप को खेतों से शहरों की मंडियों तक लाने के लिए उन्हें दोगुने से ज्यादा किराया चुकाना पड़ रहा है। गरीब किसान गाड़ियों का किराया नहीं चुका पाने की वजह से लोकल मंडियों और गांवों में ही सब्जियां बेचने को मजबूर हैं।