फसल बीमा पोर्टल से पांच लाख किसानों का डाटा गायब, नहीं मिलेगा लाभ

MP Congress: केंद्र सरकार ने कहा 30 सितंबर तक दर्ज करें किसानों की जानकारी, कांग्रेस नेता भूपेंद्र गुप्ता का आरोप बीजेपी सरकार कर रही है किसानों के साथ धोखा

Updated: Sep-21, 2020, 01:00 AM IST

फसल बीमा पोर्टल से पांच लाख किसानों का डाटा गायब, नहीं मिलेगा लाभ
Photo Courtesy: Dnaindia

भोपाल। राज्य सरकार की लापरवाही की वजह से क़रीब पांच लाख किसानों का डाटा प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना पोर्टल पर दर्ज नहीं हुआ है। केंद्र सरकार के कृषि मंत्रालय ने कहा है कि शिवराज सरकार अधिसूचित फसलों और गांव के नाम 30 सितंबर तक पोर्टल पर दर्ज करे। यदि ये डाटा दर्ज नहीं हुआ तो किसानों को फसल बीमा दावा प्राप्त नहीं होगा। 

केंद्र सरकार के प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना के मुख्य कार्यपालन अधिकारी ने मध्य प्रदेश सरकार को भेजे पत्र में कहा है कि योजना में दर्ज नहीं हुए गांव की अधिसूचित फसलों और गांव के नाम पोर्टल पर हर हाल में 30 सितंबर तक दर्ज किए जाएं। इसका अर्थ है कि मध्य प्रदेश सरकार एक माह में भी किसानों के डाटा पोर्टल पर सुधार नहीं पाई है। डाटा दर्ज नहीं होने पर लगभग 4 से 5 लाख किसानों को  फसल बीमा राशि का दावा प्राप्त करने में दिक्कत आएगी। 

फसल बीमा पत्र

कांग्रेस बार बार किसानों का डाटा गायब होने का मुद्दा उठाती रही है। केंद्र के पत्र के बाद कांग्रेस नेता भूपेन्द्र गुप्ता ने कहा है कि उन्होंने 12 सितंबर को मध्य प्रदेश की विभिन्न समितियों और सेंट्रल बैंक ऑफ इंडिया के दस्तावेजों को जारी कर बीजेपी पर यह आरोप लगाया था कि लगभग 7 हजार गांव का डाटा पोर्टल पर दर्ज ही नहीं है। तब मध्य प्रदेश सरकार ने इसे झूठ बताया था। जबकि शिवराज सरकार ने 11 सितंबर को इस बारे में केंद्र सरकार को चिट्ठी लिखकर बीमा अवधि बढ़ाने का आग्रह किया था। मध्य प्रदेश के कृषि मंत्री कमल पटेल रोज फर्जी बयान बाजी करते रहते हैं किंतु यह नहीं देखते कि उनका विभाग किस तरह किसानों के साथ धोखेबाजी कर रहा है ।

पोर्टल दुरुस्त न करने पर होगा आन्दोलन 
भूपेंद्र गुप्ता ने पोर्टल को दुरुस्त न करने की स्थिति में आंदोलन करने की चेतावनी दे डाली है। गुप्ता ने कहा है कि अगर 30 सितंबर तक पोर्टल पर अधिसूचित फसलों एवं गांव के नाम दुरुस्त नहीं किए गए तो सरकार को बड़े किसान आंदोलन का सामना करना पड़ेगा। उन्होंने कहा झूठे बयान, विज्ञापन और हेड लाइन मैनेजमेंट से अब किसानों को भरमाया नहीं जा सकता।